RCEP: क्या है दुनिया के इस सबसे बड़े व्यापार समझौते का मतलब, किसे मिलेगा फायदा?

हनोई में 37वें आसियान समिट के दौरान आरसीईपी सहमति पर वर्चुअल साइनिंग सेरेमनी.
हनोई में 37वें आसियान समिट के दौरान आरसीईपी सहमति पर वर्चुअल साइनिंग सेरेमनी.

हाल ही में चीन समेत 15 देशों ने रीजनल कंप्रेहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) की व्यापारिक संधि पर हस्ताक्षर किया है. इस संधि के दायरे में वैश्विक आबादी का लगभग एक तिहाई और सकल घरेलू का लगभग तीस फीसदी हिस्सा शामिल है. भारत इस व्यापारिक संधि का हिस्सा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 21, 2020, 8:03 AM IST
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नई दिल्ली. 15 एशिया पैसेफिक देशों (Asia-Pacific Countries) ने 'रीजनल कंप्रेहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप' (RCEP) की व्यापारिक संधि (Trade Deal) पर दस्तखत कर दिए हैं. जिसके चलते एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाएं चीन (China) की अर्थव्यववस्था से अब और अच्छे से जुड़ जाएंगी. यह व्यापारिक संधि वैश्विक आबादी का लगभग एक तिहाई और अपने वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 30 फीसदी कवर करती है. इससे इन सदस्यों देशों की चीन पर मुक्त व्यापार (Free Trade) के मामले में निर्भरता बढ़ जाएगी. भारत (India) ने इस संधि से खुद को अभी तक दूर रखा हुआ है. आइए एक नजर डालते हैं इस संधि के पहलुओं पर.

किन-किन देशों ने किए हस्ताक्षर
आरसीईपी (RCEP) में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और आसियान के 10 सदस्य देश ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, कम्बोडिया, थाइलैंड, म्यांमार, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और फिलीपिंस ने हस्ताक्षर किये हैं. भारत ने खुद को इस समझौते से दूर रखना बेहतर समझा है. भारत ने अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिहाज से समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं. वहीं, आरसीआईपी के सदस्य राज्य कह रहें है कि भारत के लिए संगठन में आने का रास्ता साफ है. वह जब चाहे इस संगठन से जुड़ सकता है.

अब आगे क्या होगा
बता दें कि वियतनाम की राजधानी हनोई में चार दिवसीय आसियान शिखर सम्मेलन में आरसीईपी पर हस्ताक्षर हुए थे, लेकिन अब इसके प्रभाव में आने से पहले इस संधि की पुष्टि होना बाकी है जिसमें लंबा समय लग सकता है. न्यूजीलैंड के विदेश मंत्रालय का कहना है कि 510 पेज के इस 20 चैप्टर के समझौते को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. आरसीईपी सदस्य राज्यों के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किए गए समझौते की कॉपी के अनुसार, इस डील के लागू होने से पहले छह आसियान देशों और तीन गैर आसियान हस्ताक्षरकर्ता देशों द्वारा इसकी पुष्टि की जानी है.



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डील के कारण एक ही मंच पर आए ये तीन देश
डील में यह गौर करने वाली बात है कि यह पहली बार है जब इस एकल व्यापार समझौते के तहत चीन, जापान और दक्षिण कोरिया एक ही मंच पर साथ-साथ नजर आए हैं. जबकि इन तीनों देशों में ऐतिहासिक और रानजीतिक रूप से विवाद लंबा है. सिंगापुर स्थित एशियन ट्रेड सेंटर की एक्सीक्यूटिव डायरेक्टर डेबोरा एल्म्स ने कहा कि जापान को इस समझौते से बड़ा फायदा नजर आ रहा है क्योंकि अब उसकी पहुंच चीन और दक्षिण कोरिया तक होने लगेगी जो पहले मुमकिन नहीं थी.

कम विकसित देशों को राहत
आरसीईपी संधि में कम विकसित सदस्य देशों का भी ख्याल रखा जाएगा. उन्हें संधि के तहत व्यावहारिक और कानूनी परिवर्तनों को लागू करने के लिए थोड़ी राहत दी जाएगी. इसमें कंबोडिया और लाओस जैसे कम विकसित देशों को अपनी सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को अपग्रेड करने के लिए तीन से पांच साल तक का समय दिया जाएगा. विशेष रुप से आरसीआईपी के तहत टैरिफ कटौती के लिए कौन से क्षेत्र खुले हैं, यह अभी साफ नहीं है. आरसीआईपी के लिए एक अच्छी बात यह है कि जिन देशों के बीच पहले से ही मुक्त व्यापार समझौते हो रखें है उनमें किसी तरह का मनमुटाव देखने को नहीं मिलेगा.

CPTPP और RCEP में क्या अंतर
बता दें कि आरसीईपी का विचार चीन को साल 2012 में आया था. चीन इस संगठन का सबसे बड़ा निर्यात और आयात करने वाला सदस्य देश है. आरसीईपी के मंच को तैयार करने के पीछे एक बड़ा कारण एशिया-प्रशांत क्षेत्रों में अमेरिका का बढ़ता प्रभाव भी है. इसे तैयार करने में और भी तेजी तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने यूएसए को साल 2017 में ट्रांस-पेसेफिक पार्टनरशिप से खुद को अलग कर लिया था. बाद में इस संगठन का नाम टीपीपी से कॉम्प्रेहेंसिव एंड प्रोगेसिव एग्रीमेंट फ़ॉर ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप ( CPTPP) कर दिया गया. आरसीईपी टैरिफ में कटौती और बाजारों तक पहुंच बढ़ाने में ध्यान देता है लेकिन सीपीटीपीपी की तुलना में यह कम है.

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आरसीईपी में राजनीतिक या आर्थिक रियायत की जरुरत पड़ती है और यह श्रम अधिकारों, पर्यावरण और बौद्धिक संपदा सुरक्षा और डिस्प्यूट रेजुलोशन मेकेनिज्म पर कम जोर देता है. RCEP का बाज़ार का आकार CPTPP से लगभग पांच गुना बड़ा है और वहीं यह इससे एनुअल व्यापार वेल्यू और कंबाइड ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट के मामले में दोगुना बड़ा है. RCEP कई कंपनियों को महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ पहुंचाएगा.
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