इन 3 सेक्टरों के लिए शुरू हो सकती हैं निर्यात प्रोत्साहन योजना

प्रतीकात्मक तस्वीर
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संसाधनों की कमी के कारण वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) शुरू में केवल तीन क्षेत्रों में निर्यातकों के लिए एक नई रिम्बर्समेंट दर की घोषणा करेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 5:09 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार शुरुआत में निर्यात प्रोत्साहन योजना 3 सेक्टरों के लिए शुरू कर सकती है. संसाधनों की कमी के कारण वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) शुरू में केवल तीन क्षेत्रों में निर्यातकों के लिए एक नई रिम्बर्समेंट दर की घोषणा करेगा. एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स (RoDTEP) योजना पर शुल्क या टैक्स छूट के तहत इस उद्देश्य के लिए एक समिति गठित की गई है, नवंबर में इसकी रिपोर्ट आने की उम्मीद है.

न्यूज18 की सहयोगी वेबसाइट मनीकंट्रोल से सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने बात करते हुए कहा कि इस साल संसाधनों की तंगी है. इस वजह से योजना को सभी क्षेत्रों तक नहीं बढ़ाया जा सकता है, इसलिए समिति तीन क्षेत्रों की पहचान करेगी जिसके साथ हम योजना को शुरू कर सकते हैं. रिपोर्ट अगले महीने पेश की जानी चाहिए. जिन सेक्टरों के लिए दरें तय की जाएंगी, वे शुरू में ऑटोमोबाइल, रेडिमेड गारमेंट्स और आयरन एंड स्टील हो सकते हैं. वित्त मंत्रालय ने इससे पहले आगामी RoDTEP योजना के तहत निर्यातकों को इनपुट टैक्स के लिए प्रतिपूर्ति और निर्यातकों के टैक्स की दरों का अध्ययन करने के लिए एक समिति गठित की थी.

अधिकारी ने कहा कि अन्य क्षेत्रों की दरें बाद में तय की जाएंगी. यह एक आसान प्रक्रिया नहीं है, इसमें समय लगता है. समिति को केवल केंद्रीय और राज्य स्तर पर ही नहीं बल्कि स्थानीय स्तर पर भी इनपुट टैक्स और लेवी तय करनी होगी. निर्यातकों द्वारा इनपुट पर भुगतान की गई स्थानीय लेवी को भी प्रतिपूर्ति के लिए ध्यान में रखना होगा. मंडी टैक्स, या बिजली सेस आदि चीजों पर किसी योजना के तहत रिफंड नहीं मिलता है. इसमें एम्बेडेड करों की भी आवश्यकता है, क्योंकि यह सेट-ऑफ दर में दिखाई देता है.



वित्त मंत्रालय ने पिछले साल घोषणा की थी कि RoDTEP योजना 1 जनवरी 2021 से चालू होगी. विश्व व्यापार संगठन द्वारा शासित बहुराष्ट्रीय व्यापार मानदंडों के खिलाफ होने के बाद मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट को इंडिया स्कीम (MEIS) से बदल देगा. MEIS को बंद करने के लिए पिछले साल सरकार की घोषणा के बाद केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने जुलाई में एक समिति का गठन किया था. इसका मकसद RoDTEP योजना के तहत नई दरों का पता लगाना था. एक फंड क्रंच ने वाणिज्य मंत्रालय को हर निर्यातक के लिए 2 करोड़ रुपये में MEIS के तहत निर्यात लाभ कैप करने के लिए मजबूर किया.
MEIS के साथ नहीं रहने की सरकार की घोषणा के बाद कई हितधारकों ने चिंता व्यक्त की थी कि यह उन्हें गंभीर रूप से प्रभावित करेगा. वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि 98 प्रतिशत निर्यातक दावा करते हैं कि परिवर्तन का फर्क नहीं पड़ेगा. नई RoDTEP योजना MEIS की तुलना में विश्व व्यापार संगठन के मानदंडों के अनुरूप हो सकती है. क्योंकि यह वास्तविक संस्करणों पर आधारित होगा और MEIS की तरह नहीं था. हालांकि निर्यातकों को चिंता है कि RoDTEP योजना के तहत रिम्बर्समेंट दर कम होगी.
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