Fact Check: क्‍या इन वैज्ञानिकों ने रोकी रामदेव की दवा 'कोरोनिल', जानें पूरा सच

पतंजलि आयुर्वेद ने हाल में दावा किया था कि उसने कोविड-19 की दवा बना ली है. हालांकि, आयुष मंत्रालय ने अभी इस पर रोक लगा दी है.

पतंजलि आयुर्वेद (Patanjali Ayurved) की दवा 'कोरोनिल' (Coronil) पर रोक के बाद एक मैसेज तेजी से वायरल हुआ कि आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) के 6 मुस्लिम वैज्ञानिकों के पैनल ने ये रोक लगाई है. आइए जानते हैं कि वायरल मैसेज (Viral Message) में किए गए दावे में कितनी सच्‍चाई है...

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    नई दिल्‍ली. पतंजलि (Patanjali) ने दावा किया कि उसने कोविड-19 की कारगर दवा 'कोरोनिल' (Coronil) ढूंढ ली है. इसके बाद आयुष मंत्रालय ने बाबा रामदेव (Baba Ramdev) की इस दवा के यह कहकर प्रचार करने पर रोक लगा दी कि ये कोरोना वायरस की दवा (Coronavirus Treatment) है. अब सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल (Viral Message) हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) में दवाओं पर रिसर्च और अप्रूवल देने वाले साइंटिफिक पैनल के मुस्लिम वैज्ञानिकों ने 'कोरोनिल' पर रोक लगाई है. यही नहीं, इस मैसेज में दवा पर रोक लगाने वाले 6 मुस्लिम वैज्ञानिकों के नाम भी दिए गए हैं. इसके बाद ये मैसेज बहुत तेजी से वायरल हो गया. आइए जानते हैं कि क्‍या वास्‍तव में आयुष मंत्रालय के इन्‍हीं वैज्ञानिकों ने पतंजलि की दवा पर रोक लगाई. सूची में बताए गए वैज्ञानिक आयुष मंत्रालय में हैं भी या नहीं...

    वायरल मैसेज में आयुष मंत्रालय में दवाओं पर रिसर्च और अप्रूवल देने वाले साइंटिफिक पैनल के टॉप 6 साइंटिस्टों के नाम असीम खान, मुनावर काजमी, खादीरुन निशा, मकबूल अहमद खान, आसिया खानुम, शगुफ्ता परवीन दिए गए हैं.

    खुद केंद्र ने वैज्ञानिकों की सूची को बताया है फर्जी
    मैसेज वायरल होने के बाद लोगों ने केंद्र सरकार और आयुष मंत्रालय पर निशाना साधना शुरू कर दिया. फिर भारत सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक पर सरकार ने ट्वीट कर कहा कि आयुष मंत्रालय में ऐसा कोई पैनल नहीं है. इस ट्वीट से साफ हो गया कि आयुष मंत्रालय में दवाओं को अप्रूवल देने वाले पैनल के सदस्यों के नाम की सूची फर्जी है, जिसे खुद केंद्र सरकार ने गलत करार दिया है.

    राज्‍य जारी करते हैं आयुर्वेदिक दवाओं के लाइसेंस
    आयुर्वेदिक दवाओं के लिए लाइसेंस राज्य सरकारों के आयुष मंत्रालय देते हैं. उत्तराखंड आयुर्वेद विभाग के लाइसेंस अफसर डॉ. वाईएस रावत ने कोरोनिल पर विवाद बढ़ने के बाद बताया था कि पतंजलि को खांसी-बुखार ठीक करने और इम्यूनिटी बढ़ाने वाली दवा के लिए लाइसेंस जारी किया गया था. साथ ही बताया कि पतंजलि के आवेदन में कोविड-19 महामारी की दवा बनाने का कोई जिक्र नहीं था और न ही इसके लिए लाइसेंस जारी किया गया.

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    सीसीआरयूएम में हैं सूची में दिए गए वैज्ञानिक
    अब अगर ये वैज्ञानिक ऐसे किसी पैनल में नहीं है तो उनका नाम कहां से आया? आयुष मंत्रालय की वेबसाइट पर उससे जुड़ी संस्थाओं और उनके अधिकारियों के बारे में भी जानकारी उपलब्‍ध है. पड़ताल करने पर पता चला कि सूची में शामिल आसिम अली खान केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRUM) में हैं. ये परिषद आयुष मंत्रालय के अधीन आती है. सूची में शामिल बाकी 5 वैज्ञानिक भी सीसीआरयूएम में ही हैं. इनका आयुर्वेदिक दवाओं से कोई लेनादेना नहीं है. ये सभी यूनानी चिकित्‍सा पद्धति और दवाओं से जुड़े हैं.

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