तिरुपति बालाजी के नाम पर फर्जीवाड़ा, फेक वेबसाइट पर बिक रहा था प्रसाद, पुलिस ने किया केस दर्ज

तिरुपति बालाजी का प्रसाद फर्जी वेबसाइट के जरिए बेचा जा रहा था.

ठगों ने www.balaliprasadam.com वेबसाइट पर दावा किया था कि वह बेहद कम कीमत पर तिरुपति (Tirupati) के लड्‌डुओं को देश में कही भी भेज सकते हैं. जिसकी जानकारी मिलने के बाद मंदिर प्रशासन (Temple administration) ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

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    तिरुपति. ठगी के लिए लोग भगवान को भी नहीं छोड़ते. ऐसा ही एक मामला भगवान वेंकटेश्वर के प्रसिद्ध प्रसाद तिरुपति लड्‌डुओं को लेकर सामने आया है. मंदिर के अधिकारियों के मुताबिक शातिर ठगों ने एक फर्जी वेबसाइट बनाकर तिरुपति लड्डुओं की ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी. जैसे ही इस फर्जी वेबसाइट के बारे में मंदिर प्रशासन को पता चला वैसे ही उक्त ठगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत की गई. वहीं पुलिस ने फर्जी वेबसाइट www.balaliprasadam.com को ब्लाक करा दिया है और इसके पीछे जिन शातिर लोगों का हाथ है उनकी तलाश शुरू कर दी है. आपको बता दें भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर विश्व प्रसिद्ध है. यहां देश के जाने माने फिल्मी सितारे और राजनेता दर्शनों के लिए आते हैं. 

    ऐसे बेचा जा रहा था फर्जी वेबसाइट से प्रसाद- ठगों ने www.balaliprasadam.com वेबसाइट पर दावा किया था कि वह बेहद कम कीमत पर तिरुपति के लड्‌डुओं को देश में कही भी भेज सकते हैं. ऐसे में बहुत से श्रद्धालु इन ठगों का शिकार भी हुए होंगे. मंदिर प्रशासन के अनुसार जैसे ही इस वेबसाइट के बारे में जानकारी मिली. वैसे ही एक्शन लिया गया और पुलिस में शिकायत की गई. आपको बता दें इस मामले में अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

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    मंदिर में हर साल 10 करोड़ लड्‌डू बनते हैं- भगवान वेंकटेश के इस धर्म स्थल में रोज हजारों भक्त आते है. जो भगवान के भोग का लड्डू पाते हैं. इस प्रसाद की खास बात यह कि तिरुपति प्रबंधन हर साल करीब दस करोड़ लड्डू बनवाता है और प्रत्येक लड्डू को पचास रुपये में बेचा जाता है साथ ही दुनिया के हर कोने में भगवान के भक्तों तक यह भोग पहुंचाया जाता है.

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    लॉकडाउन के बाद 11 जून को खुला मंदिर- कोरोना महामारी की वजह से पूरे देश में लगाए गए लॉकडाउन के दौरान मंदिर 20 मार्च को बंद कर दिया गया था. जिसके बाद इसे दोबारा लॉकडाउन खत्म होने के बाद 11 जून को खोला गया. जिसके बाद मंदिर में फिलहाल प्रतिदिन केवल 6 हजार श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा रहा है.

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