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मोदी सरकार ने खेती के लिए खोला खजाना, 3 साल में 'किसानों' को दिए 34.85 लाख करोड़ रुपये

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: February 4, 2020, 1:34 PM IST
मोदी सरकार ने खेती के लिए खोला खजाना, 3 साल में 'किसानों' को दिए 34.85 लाख करोड़ रुपये
मोदी सरकार का फोकस किसानों पर है

आखिर सरकार किन किसानों को देती है इतनी बड़ी रकम का लोन? क्या इस पैसे का फायदा कृषि कारोबार करने वाली कंपनियों को ही मिलता है. क्या सिर्फ किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए मिलती है किसानों को वित्तीय सहायता.

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  • Last Updated: February 4, 2020, 1:34 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने खेती-किसानी को आगे बढ़ाने के लिए दिल खोलकर पैसा दिया है. दावा है कि पिछले तीन साल में 34.85 लाख करोड़ रुपये कृषि कर्ज के रूप में बांटे गए हैं. तीन साल में 30 लाख करोड़ रुपये बांटने का लक्ष्य था लेकिन उससे अधिक पैसा दिया गया. यह रकम देश के विभिन्न बैंकों के जरिए कृषि योजनाओं के तहत किसानों को कर्ज के रूप में दी गई. यह आंकड़ा नाबार्ड (National Bank for Agriculture and Rural Development) के हवाले से केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा में रखा है. इसमें से आठ फीसदी रकम लघु एवं सीमांत किसानों (दो हेक्टेयर यानी पांच एकड़ या उससे कम जमीन वाले कृषक) को देने का लक्ष्य बनाया गया था.

चूंकि लगातार तीन साल से टारगेट से अधिक पैसा कर्ज के रूप में बांटा गया है इसलिए 2020-2021 के बजट में सरकार ने इसे बढ़ाकर 15 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. सरकार चाहती है कि किसान साहूकारों से मोटी रकम पर कर्ज लेने के लिए मजबूर न हों. वो सरकारी संस्थाओं से लोन लें.

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देश में करीब सात करोड़ किसानोंं के पास है केसीसी


खेती के लिए कहां से कर्ज लेते हैं किसान

कृषि मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के हर किसान पर है औसतन 47 हजार रुपये का सरकारी कर्ज. जबकि हर किसान पर 12130 रुपये का औसत कर्ज साहूकारों से लिए गए लोन का है. 2013 में किए गए एनएसएसओ के एक सर्वे में पता चला है कि किसान परिवारों की ओर से लिए कुल कर्ज का करीब 40 फीसदी जमींदारों, पेशेवर साहूकारों और व्यापारियों आदि से लिया जाता है.

सबसे कम ब्याज दर पर तीन लाख का लोन

अनुराग ठाकुर के मुताबिक, “भारत सरकार एक ब्याज सहायता योजना कार्यान्वित करती है. जिसके तहत किसानों को 7 फीसदी प्रति वर्ष की ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का कर्ज देती है. जो समय पर भुगतान करता है उन्हें ब्याज पर 3 फीसदी की और छूट मिलती है. ऐसे में अंतिम ब्याज दर 4 फीसदी ही आती है. यह पैसा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए दिया जाता है.”प्रोसेसिंग सहित कई फीस माफ

केंद्र सरकार ने कहा है कि लघु एवं सीमांत किसानों की समस्याओं एवं उनके वित्तीय संकट को ध्यान में रखते हुए किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने का नियम आसान कर दिया गया है. सभी बैंकों को इसके लिए प्रोसेसिंग, डॉक्यूमेंटेशन, इंस्पेक्शन, लेजर फोलियो और अन्य सेवा शुल्कों में छूट देने को कहा गया है. इस समय करीब सात करोड़ किसानों के पास ही केसीसी है. 

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इस साल 15 लाख करोड़ रुपये का कृषि कर्ज देने का बजट रखा गया है


आखिर किसानों के नाम किसे जाती है इतनी बड़ी रकम

>>कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा का कहना है कि 41 फीसदी लघु एवं सीमांत किसानों को सरकारी लोन नहीं मिल पाता. मतलब वे क्रेडिट प्रणाली से बाहर हैं. जहां तक इतनी बड़ी रकम कृषि कर्ज के रूप में देने की बात है तो इसका ज्यादातर हिस्सा किसानों के नाम पर कारोबार करने वाली कंपनियों को जाता है. उसमें वेयर हाउसिंग कंपनियां, फर्टिलाइजर, कीटनाशक बनाने वाली कंपनियां और एग्रीकल्चर मशीन बनाने वाले लोग शामिल हैं.

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First published: February 4, 2020, 12:21 PM IST
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