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Farmers Income: सरसों की खेती से होगी किसानों को जबरदस्त कमाई, अपनाएं वैज्ञानिक टिप्स

Farmers Income: सरसों की खेती से होगी किसानों को जबरदस्त कमाई, अपनाएं वैज्ञानिक टिप्स

सरसों के MSP में बढ़ोतरी और सरसों के तेल के बढ़ते दाम के चलते किसान सरसों की फसल की तरफ आकर्षित हो रहे हैं.

सरसों के MSP में बढ़ोतरी और सरसों के तेल के बढ़ते दाम के चलते किसान सरसों की फसल की तरफ आकर्षित हो रहे हैं.

सरकार ने इस बार की सरसों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 400 रुपये बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है.

Farmers Income Tips: उत्तर भारत में खाद्य तेलों में सरसों के तेल (Mustard Oil) का इस्तेमाल ज्यादातर घरों में किया जाता है. पिछले दो सालों से सरसों के तेल के दाम (Mustard Oil Price) लगातार आसमान छू रहे हैं.

इस समय बाजार में सरसों के तेल की कीमतें 180 रुपये से लेकर 220 रुपये प्रति लीटर तक चल रही हैं. जानकारों का कहना है कि सरसों में यह तेजी बरकार रहेगी.

सरकार ने पिछले साल सरसों के तेल (Sarson Oil) में किसी भी प्रकार का अन्य खाद्य तेल मिलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी. इससे तेल मिलों में सरसों की मांग और कीमत, दोनों में ही इजाफा देखने को मिला था.

सरसों के एमएसपी में इजाफा (Mustard MSP)
पिछले दिनों सरकार ने वर्ष 2020-21 के लिए रबी फसलों के नए समर्थन मूल्य जारी किए थे. सरकार ने इस बार की सरसों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 400 रुपये बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. पिछले साल सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य-एमएसपी (Mustrad MSP) 4650 रुपए प्रति क्विंटल था.

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सरसों के एमएसपी में बढ़ोतरी और सरसों के तेल के बढ़ते दाम के चलते किसान सरसों की फसल की तरफ आकर्षित हो रहे हैं.

बरसात से खरीफ में नुकसान (Kharif Crops)
इस बार बरसात अधिक होने और बेमौसम की बारिश से किसानों को खरीफ फसलों में नुकसान उठाना पड़ा है. धान की फसल पककर तैयार हो गई लेकिन खेतों में पानी खड़ा होने से उनकी फसल खराब हो गई.

किसान इन सभी बातों से सबक लेकर सरसों की तरफ रुख कर रहे हैं. सरसों की बुआई अक्टूबर महीने में होती है. सरसों के साथ आलू की बुआई भी होती है, लेकिन किसान आलू छोड़कर सरसों को तरजीह दे रहे हैं.

मुनाफे वाली साबित होगी सरसों (Sarson ki Kheti)
कृषि वैज्ञानिकों और बाजार के जानकारों का कहना है कि इस बार सरसों की फसल (Mustard Crop) किसानों के लिए बंपर कमाई (Farmers Income) वाली फसल साबित होगी.

सरसों की बुआई का समय (mustard crop cultivation)
सरसों की बुआई का समय आ गया है. कृषि विज्ञान केंद्र, गौतमबुद्ध नगर (Krishi Vigyan Kendra, Gautambudh nagar) के अध्यक्ष प्रोफेसर मंयक कुमार राय (Mayank Kumar Rai) के सहायक निदेशक डॉक्टर संदीप चौधरी किसानों को सरसों की वैज्ञानिक तकनीक के बारे में बता रहे हैं.

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प्रोफेसर मंयक कुमार राय कहना है कि अगर किसान खेती में वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करें तो पैदावार तो ज्यादा होगी ही, साथ ही फसल को कीट और बीमारियों से नुकसान कम होगा. फसल की लगात कम आएगी और इस तरह किसानों को सरसों की फसल से ज्यादा फायदा होगा.

प्रोफेसर मंयक कुमार राय (Mayank Kumar Rai) का कहना है कि कृषि वैज्ञानिक इलाके के अनुसार सरसों के बीज की किस्म इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं. इसलिए अपने इलाके के कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर ही बीज का इस्तेमाल करें.

सरसों की खेती का वैज्ञानिक तरीका (mustard crop information)
– 5 से 25 अक्टूबर तक खेत में सरसों की बुआई करें.
– एक एकड़ खेत में 1 किलोग्राम बीज का इस्तेमाल करें.
– बुआई के समय खेत में 100 किग्रा सिंगल सुपरफॉस्फेट, 35 किग्रा यूरिया और 25 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश का छिड़काव करना चाहिए.
– सरसों की बुआई के बाद एक हफ्ते के भीतर खरपतवार की रोकथाम के उपाय करें.
– खरपतवार को रोकने के लिए पैंडीमेथालीन (30 EC) केमिकल की एक लीटर मात्रा 400 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.
– सरसों की बुआई के 20-25 दिन बाद खेत की निराई-गुड़ाई करें.
– निराई गुड़ाई करते समय घने पौधों को निकाल दें.
– खेत में पौधों के बीच लाइन से लाइन की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर रखें.
– फसल में पहला पानी 35-40 दिन के बाद दें. जरूरत होने पर दूसरी सिंचाई दाना बनते समय करें.
– सरसों में फूल आने के समय सिंचाई नहीं करनी चाहिए.
– पहली सिंचाई के बाद 35 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें.
– फसल पर माहूं या चेंपा कीट का हमला होने पर नीम तेल की 5 एमएल मात्रा एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.
– इसके लिए इमीडाक्लोप्रिड (17.8 एमएल) की 100 एमएल मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं.
– फसल पर केमिकल का छिड़काव शाम के समय करना चाहिए.
– जरूरत होने पर दूसरा छिड़काव 10-12 दिन बाद करें.
– फसल में फलियां बनते समय सरसों के पौधों की 20-25 सेमी नीचे की पुरानी पत्तियों की तुड़ाई कर दें.
– बुआई के 65-70 दिन बाद कार्बेन्डाजिम (12 फीसदी) और मैन्कोजेब (63 फीसदी) की 250 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.
– फूल और फली बनने के समय थायोयूरिया की 250 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर खेत में छिड़काव करें. इससे फसल को पाले से भी बचाव होता है.
– सरसों की अच्छी पैदावार के लिए 75 फीसदी फलियां पीली हो जाएं तब ही फसल की कटाई करें.

सरसों की फसल के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर मंयक कुमार राय से उनके फोन नंबर 99685-56926 पर संपर्क किया जा सकता है.

Tags: Agriculture, Farmers

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