दिवाली से पहले किसानों को मिला तोहफा! इतने रुपये तक सस्ती हुई खाद

किसानों को मिला बड़ा तोहफा
किसानों को मिला बड़ा तोहफा

सरकार (Government of India) ने किसानों को बड़ा तोहफा देते हुए एनपी खाद (NP) के दाम घटाने का ऐलान किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 2:28 PM IST
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नई दिल्ली. दिवाली से पहले इफको (IFFCO) ने देश के किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने घोषणा की है कि 20:20:0:13 NP खाद के दाम में 50 रुपये की कटौती की घोषणा की है. इससे पहले अमोनियम फॉस्फेट सल्फेट उर्वरक की कीमत 975 रुपये थी जिसे कंपनी अब 925 रुपये में ही बेच रही है. एनपी खाद में कटौती से किसानों की लागत कम होने के साथ उनकी आमदनी भी बढ़ेगी. कीमतों में कटौती तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है.

इफको ने किया बड़ा ऐलान- इफको ने हाल में घोषणा की थी कि किसी भी खाद में  फिलहाल दाम नहीं बढ़ाए जायेंगे. वहीं, किसानों की मदद के लिए इफको ने सल्फर पर प्रति टन 1,000 रुपये की कटौती की गई थी. कंपनी ने कुछ माह पहले ही NPK और DAP खाद में कटौती की थी. इफको मुख्य तौर पर यूरिया,डीएपी,एपीके,एनपी,वॉटर सोल्यूबल,सागरिका और जैव उवर्रक तैयार करता है.





क्या होता है NP खाद -NP खाद में सल्फर होता है,जिसका इस्तेमाल किसान तिलहन के फसलों के लिए करते है. तिलहन फसलों के पोषण के लिए के अमोनियम फॉस्फेट सल्फेट खाद बहुत जरूरी होता है. वनस्पति तेल के उत्पादन के लिए ही तिलहन फसल मसलन तिल,सरसों,मूंगफली,सोया और सूरजमुखी का उत्पादन किया जाता है. उम्मीद की जा रही है कि चालू वर्ष में 1.25 करोड़ टन सरसों का उत्पादन होगा. बावजूद इसके खाद्य तेलों के मामले में आयात पर देश की निर्भरता बढ़कर करीब 70 फीसदी हो गई है. घरेलू मांग को पूरा करने के लिए सलाना करीब 1.4 से 1.5 करोड़ टन खाद्य तेलों का आयात किया जाता है.
चलिए आपको बताते हैं, नीम कोटेड यूरिया क्या है और इसके क्या फायदे हैं, जिसके चलते पीएम अपने लगभग हर भाषण में इसका जिक्र करते हैं. शाहजहांपुर के रोजा रेलवे मैदान में कई जिलों के किसानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "अब पूरे देश में 100 फीसदी यूरिया नीम कोटेड है. इससे यूरिया की कालाबाजारी रुक गई है और किसानों को कभी इसकी किल्लत नहीं होती है.

नीम कोटेड यूरिया की 7 खास बातें 1. कृषि लागत में कमी 2. किसानों की आय में वृद्धि 3. 5 से 10 प्रतिशत तक यूरिया की बचत 4. 10-15 प्रतिशत तक उपज में वृद्धि यूरिया का आयात कम होगा 5. नाइट्रोजन के धीरे धीरे निकलने के कारण मृदा उर्वरा को मदद मिलती है. 6. यूरिया की सब्सिडी की बचत होगी. 7. नीम लेपित यूरिया का संतुलित इस्तेमाल यूरिया के औद्योगिक इस्तेमाल पर अंकुश लगेगा पर्यावरण अनुकूल होगा.
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