CAIT ने उठाए सवाल, किसानों को हर साल मिलती है 1.5 लाख करोड़ की सब्सिडी, फिर भी घाटे में क्यों है खेती

बिहार के अनाज उत्पादक किसानों का लाभ एमएसपी की अनिवार्यता से ही मुमकिन है . (सांकेतिक तस्वीर)

CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि देश में किसान अकेला ऐसा वर्ग है जिसको एक मोटे अनुमान के अनुसार लगभग 1.5 लाख करोड़ की सब्सिडी हर साल मिलती है, लेकिन उसके बाद भी किसान घाटे की खेती कर रहा है आख़िर क्यों?

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    नई दिल्ली. इसमें कोई शक नहीं है क़ी आज़ादी के 75 साल पूरे होने पर भी देश में किसान घाटे की खेती कर रहा है. इस लिहाज़ से देश के किसान क़ी घाटे की खेती को फायदे की खेती में बदलना ज़रूरी है. यह कहना है देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का. उनका यह भी कहना है कि देश में किसान अकेला ऐसा वर्ग है जिसको एक मोटे अनुमान के अनुसार लगभग 1.5 लाख करोड़ की सब्सिडी हर साल मिलती है, लेकिन उसके बाद भी किसान घाटे की खेती कर रहा है आख़िर क्यों?

    कैट ने कहा हमारी कृषि-प्रशासनिक व्यवस्था में कोई कमी है

    राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि तीनों कृषि क़ानून केवल किसान से ही सम्बंधित है, यह सोचना और समझना बिलकुल ग़लत है. कृषि क़ी फसल के लिए अनेक सामान एवं संसाधन एवं फसल बोने से लेकर कृषि पैदावार को आम उपभोक्ता तक पहुँचाने में एक बड़ी आपूर्ति शृंखला काम करती है. उस शृंखला से जुड़े करोड़ों लोग इससे अपनी रोज़ी रोटी कमाते हैं. कृषि क़ानून से वो भी सीधे तौर पर प्रभावित होंगे. क्या आंदोलन पर निर्णय लेते हुए उनके हितों का ध्यान रखा जाएगा और कौन उनके हितों का ध्यान रखेगा.

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    किसानों द्वारा बीज की बुवाई, जमीन की खेती और अंत में किसानों द्वारा उपजाई गई फसलों को उपभोक्ता तक पहुंचाने का सारा काम व्यापारियों के द्वारा ही होता है. व्यापारियों की यह आपूर्ति श्रृंखला खेती के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसलिए कृषि कानूनों की दृष्टि से व्यापारियों का महत्वपूर्ण रोल है, क्या इसकी चिंता भी की जाएगी?

    कैट ने पूछा बिल आने पर इनकी रक्षा कौन करेगा?

    राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि सदियों से मंडियों और मंडियों के बाहर काम करने वाले व्यापारी, किसानों को उनकी फसल के लिए, परिवहन, अनेक कृषि वस्तु, खाद्यान्न, कृषि उपकरण और औजार, खाद्य प्रसंस्करण,  खाद्यान बीज का व्यापार, कीटनाशक, उर्वरक, कृषि वाहन, कृषि यंत्रों के स्पेयर पार्ट्स और उपकरण, वाहनों के कलपुर्जे, मोटर, रबड़ और प्लास्टिक पाइप, परिवहन और रसद सहित अन्य अनेक सामान जो खेती की सामान्य प्रक्रिया से जुड़े हैं और किसानों को उनकी खेती एवं फसलों के एवज में रकम मुहैय्या कराते हैं. इसलिए कृषि बिलों से उपजे वर्तमान मुद्दों पर कोई भी निर्णय लेते समय इन सभी स्टेकहोल्डर्स के हितों की रक्षा कौन करेगा?

    कैट ने पीएम मोदी से की यह गुहार

    राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने पीएम नरेन्द्र मोदी से गुहार लगाते हुए कहा है कि निश्चित रूप से किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों का हल निकालना चाहिए और देश में किसान को अपनी मेहनत की पूरी कमाई मिलनी ज़रूरी है तभी देश समृद्ध होगा. लेकिन कृषि से जुड़े अन्य वर्ग भी बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए उनकी भूमिका पर भी चिंता कर समाधान करना बहुत आवश्यक है. कहीं ऐसा न हो की एक वर्ग का समाधान अन्य वर्गों में असंतोष पैदा कर दे और देश को एक और आंदोलन का सामना करना पड़े.

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