कृषि अध्यादेशों के खिलाफ हरियाणा में होगी देश की पहली किसान रैली, व्यापारियों का भी समर्थन

कृषि अध्यादेशों के खिलाफ हरियाणा में होगी देश की पहली किसान रैली, व्यापारियों का भी समर्थन
कृषि अध्यादेशों के खिलाफ किसानों-व्यापारियों का आंदोलन

कृषि अध्यादेशों के खिलाफ कुरुक्षेत्र की पीपली अनाज मंडी में होगी रैली, किसानों को मिला व्यापारियों का साथ, एमएसपी और सरकारी मंडियों का उठेगा मुद्दा

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 7, 2020, 6:34 PM IST
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नई दिल्ली. मोदी सरकार (Modi Government) द्वारा लॉकडाउन के बीच लाए गए दो नए कृषि अध्यादेशों (Agriculture Ordinance) और असेंसियल कमोडिटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ देश की पहली किसान रैली कुरुक्षेत्र, हरियाणा में होगी.  यहां की पीपली अनाज  मंडी में 10 सितंबर को होने वाली ‘किसान बचाओ मंडी बचाओ’ रैली को अखिल भारतीय व्यापार मंडल का समर्थन मिला है. संगठन के राष्ट्रीय महासचिव बजरंग गर्ग ने इन अध्यादेशों को किसानों और व्यापारियों दोनों के खिलाफ बताया है. इसे सरकारी मंडियों (APMC- Agricultural Produce Market Committee) को बर्बाद करने और प्राइवेट मंडियों को बनाने के मकसद से लाया गया है. इससे व्यापारी और किसान बर्बाद होगा. सरकार को ऐसा कोई भी फैसला नहीं लेना चाहिए जो किसानों (Farmers), व्यापारियों (Traders) व आम जनता के खिलाफ हो.

‘MSP पर खरीद का प्रावधान खत्म करना चाहती सरकार’

गर्ग ने कहा कि इससे पहले इन अध्यादेशों के खिलाफ ट्रैक्टर आंदोलन हो चुका है और काले झंडे दिखाए जा चुके हैं. फिर भी अब तक इसे वापस नहीं लिया गया है इसलिए किसान भाई इसके खिलाफ पहली बार रैली करने जा रहे हैं. केंद्र सरकार के कृषि अध्यादेश पूरी तरह से किसान, आढ़ती व मजदूर विरोधी है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जो अध्यादेश जारी किए हैं  उसमें कहीं भी नहीं लिखा कि प्राइवेट कंपनी किसान की फसल एमएसपी से कम दामों में नहीं खरीदेगी. इससे साफ साबित होता है कि केंद्र सरकार फसल एमएसपी पर खरीदने का प्रावधान खत्म करना चाहती है.



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कृषि अध्यादेशों से क्यों नाराज हैं किसान? (File Photo)

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‘बर्बाद हो जाएंगी मंडियां’

गर्ग ने कहा, नए कृषि अध्यादेश के हिसाब से बड़ी-बड़ी कंपनियां एडवांस में ही किसान की फसल खेतों में खरीद कर लेंगी. दूसरी ओर मंडियों में फसल बिकने पर मार्केट फीस लगेगी, जबकि मंडियों के बाहर फसल बिकने पर कोई फीस नहीं है. किसान को अपनी फसल के पूरे दाम नहीं मिलेंगे और मंडियों में फसल नहीं बिकेगी तो मंडिया बंद हो जाएंगी. अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पहले ही चरमराई हुई है. देश का किसान और व्यापारी इकोनॉमी का आधार हैं. इसलिए सरकार को ऐसा कोई फैसला नहीं लेना चाहिए जो किसानों, व्यापारियों व आम जनता के खिलाफ हो.

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हालांकि, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि दो नए अध्यादेशों की वजह से किसान अब अपनी उपज मनचाही कीमत पर, मनचाहे स्थान पर बेच सकते हैं. उपज बिक्री व लाभ-हानि के संबंध में किसानों का भय दूर किया गया है. खेती क्षेत्र को समग्र रूप से इन अध्यादेशों का लाभ मिलेगा. निजी निवेश गांवों-खेतों तक पहुंचेगा.
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