Economic Survey 2021 : कंप्‍यूटर, इलेक्ट्रानिक जैसे नेटवर्क प्रोडक्ट का हब बनेगा भारत, 10 साल में मिलेंगे 17 करोड़ जॉब्‍स

 भारत वर्ष 2025 तक दुनिया में एनपी हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत तक बढ़ा ले तो 3.85 करोड़ अतिरिक्त जॉब्स क्रिएट किए जा सकते हैं.

भारत वर्ष 2025 तक दुनिया में एनपी हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत तक बढ़ा ले तो 3.85 करोड़ अतिरिक्त जॉब्स क्रिएट किए जा सकते हैं.

आर्थिक सर्वेक्षण में तेजी से निर्यात बढ़ाने के लिए भारत को नेटवर्क उत्पादों (एनपी) का हब बनाने की स्ट्रेटजी बताई है. एनपी से वर्ष 2025 तक 9.73 करोड़ नौकरियां और 586 बिलियन डॉलर का उत्पादन होने की उम्मीद है.

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  • Last Updated: January 29, 2021, 9:08 PM IST
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नई दिल्ली. संसद में शुक्रवार को बजट से पहले पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निर्यात आधारित उद्योगों की तस्वीर बताई. सर्वे में नेटवर्क प्रोडक्ट जैसे कम्प्यूटर, इलेक्ट्रॉनक, इलेक्ट्रिक उपकरण और टेलीकम्यूनिकेशन उपकरणों के निर्यात से अगले दस साल में देश में 17.35 करोड़ नौकरियां सृजित होने का अनुमान जताया गया है. आर्थिक सर्वेक्षण में तेजी से निर्यात बढ़ाने के लिए भारत को नेटवर्क उत्पादों (एनपी) का हब बनाने की स्ट्रेटजी बताई है. सर्वे के मुताबिक, एनपी से वर्ष 2020 तक 3.01 करोड़ नौकरियां सृजित हुई और 168 बिलियन डॉलर का जीडीपी उत्पादन हुआ.

वहीं, वर्ष 2020 में नाैकरियों में मिलने वाला वेतन 24.3 बिलियन डॉलर है. यह 2030 तक 174.5 बिलियन डॉलर हो जाएगा. सर्वे में सुझाव दिया गया है कि यदि भारत वर्ष 2025 तक दुनिया में एनपी हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत तक बढ़ा ले तो 3.85 करोड़ अतिरिक्त जॉब्स क्रिएट किए जा सकते हैं. सर्वे के मुताबिक, वर्ष 2025 तक 9.73 करोड़ नौकरियां और 586 बिलियन डॉलर का उत्पादन होने की उम्मीद है, जबकि 2030 तक नौकरियों की संख्या 17.35 करोड़ और उत्पादन 1134 बिलियन डॉलर पहुंच जाएगा.

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1.46 लाख करोड़ की पीआईएल योजना से होगा रोजगार सृजन
संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 1.46 लाख करोड़ रुपए की पीएलआई योजना से भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अहम रोल मिलने की उम्मीद है. इससे रोजगार के बड़े अवसर पैदा होने की आशा है. गौरतलब है कि मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में मिली कामयाबी के बाद उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को हाल ही में 10 क्षेत्रों में विस्तार किया गया था. सर्वेक्षण में सरकार ने कहा कि यह योजना वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में भारतीय निर्माताओं को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश के लिए आकर्षित करेगी. इसमें कहा गया है कि यह योजना देश में MSME क्षेत्र को गति देगी. देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने और इसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजना शुरू की गई थी.
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