कुपवाड़ा-पुलवामा से भी लड़ी जा रही है कोरोना के खिलाफ जंग, जानिए कैसे

जम्मू-कश्मीर में KVIC के 84 संस्थान हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

जम्मू-कश्मीर में KVIC के 84 संस्थान हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

KVIC जम्मू-कश्मीर में 84 खादी संस्थान संचालित कर रहा है. इन संस्थानों से 10 हजार 800 कारीगर जुड़े हुए हैं. KVIC की योजना के तहत सभी कारीगर को आर्थिक सहायता दी गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 1:01 PM IST
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नई दिल्ली. कुपवाड़ा-पुलवामा (Pulwama) और अनंतनाग का नाम आते ही AK-47 की गोलियों का शोर और हैंड ग्रेनेड के धमाके ज़ेहन में घूमने लगते हैं. जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में कुछ दूसरे इलाकों की तरह से ही यह तीन इलाके भी आतंकवाद से बुरी तरह ग्रस्त बताए जाते हैं. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि कश्मीर के इन तीन इलाकों से भी देशभर में कोरोना के खिलाफ जंग लड़ी जा रही है.

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के साथ मिलकर तीनों इलाकों के युवा इस जंग को लड़ रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में इन युवाओं की संख्या 10 हज़ार से ज़्यादा है. यह सभी आयोग के साथ मिलकर खादी के फेस मास्क (Face Mask) बना रहे हैं. वहीं सर्दी से बचाने वाली और फैशन सिंबल पश्मीना शॉल का सबसे ज़्यादा उत्पादन भी आयोग की मदद से कुपवाड़ा-पुलवामा और अनंतनाग में ही हो रहा है.

केवीआईसी जम्मू-कश्मीर में 84 खादी संस्थान संचालित कर रहा है. इन संस्थानों से 10 हज़ार 800 कारीगर जुड़े हुए हैं. केवीआईसी की योजना के तहत सभी कारीगर को आर्थिक सहायता दी गई है. कोरोना और लॉकडाउन के दौरान ही आयोग ने करीब 30 करोड़ रुपये की मदद सीधे इन कारीगरों के बैंक खातों में भेजी थी. वहीं 2016-17 से लेकर 2018-19 तक के 951 विवादित मामले निपटाकर एक बार फिर से खादी संस्थानों और कारीगरों को जोड़ा गया है.

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कोरोना के दौरान सप्लाई हुए 7 लाख फेस मॉस्क

केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना का कहना है कि एक विशेष अभियान के माध्यम से केवीआईसी ने जम्मू, उधमपुर, पुलवामा, कुपवाड़ा तथा अनंतनाग के स्व-सहायता समूहों में काम करने वाली हजारों महिला कारीगरों को खादी फेस मास्क की सिलाई का कार्य उपलब्ध कराया है. लगभग 7 लाख खादी फेस मास्क इन महिला कारीगरों द्वारा तैयार किये गए थे और इनकी आपूर्ति जम्मू-कश्मीर सरकार को की गई थी.

60 फीसद पश्मीना शॉल बनते हैं कुपवाड़ा-पुलवामा और अनंतनाग में



केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना का कहना है कि खासतौर पर जम्मू-कश्मीर के 12 खादी संस्थान इंटरनेशनल लेवल पर पसंद की जाने वाली पश्मीना शॉल को बनाने का काम कर रहे हैं. इन शॉल का 60 फीसदी से ज़्यादा का उत्पादन दक्षिण कश्मीर क्षेत्र यानी अनंतनाग, बांदीपोरा, पुलवामा और कुलगाम में किया जाता है. जम्मू-कश्मीर में बने उत्पादों के खरीदार बड़ी संख्या में दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में मिल जाते हैं. ये उत्पाद विभिन्न खादी इंडिया सेल आउटलेट्स और केवीआईसी ई-पोर्टल के माध्यम से बेचे जा रहे हैं.
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