समय पर फाइल करें ITR, नहीं तो जुर्माना भरने के साथ ही कई तरह की छूट का नहीं मिलेगा फायदा

समय पर फाइल करें ITR, नहीं तो जुर्माना भरने के साथ ही कई तरह की छूट का नहीं मिलेगा फायदा
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में देरी होने पर कई तरह के नुकसान होते हैं. इसलिए समय पर आईटीआर फाइल करें.

आयकर कानून (Income Tax Act) की धारा-234A के तहत इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल (ITR File) करने में देरी होती है तो टैक्‍सपेयर को 1 फीसदी प्रतिमाह की साधारण दर से ब्‍याज (Simple Interest) चुकाना होता है. वहीं, धारा-234F के तहत 10,000 रुपये तक का जुर्माना (Late Fee) भी वसूला जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 7, 2020, 2:38 PM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना संकट (Coronavirus Crisis) के बीच केंद्र सरकार ने कई बार इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल (ITR Filing) करने की अंतिम तारीख (Last Date) आगे बढ़ाई है ताकि करदाताओं (Taxpayers) को किसी तरह की परेशानी नहीं हो. ऐसे में टैक्‍सपेयर्स को सही समय पर आईटीआर फाइल कर देना चाहिए. ये किसी भी टैक्‍सपेयर के लिए ये सबसे अहम काम है क्‍योंकि रिटर्न दाखिल करने में देरी करने पर उन्‍हें कई तरह के फायदे नहीं मिल पाएंगे. देरी से आईटीआर फाइल करने पर एक तरफ इनकम टैक्‍स में छूट (Income Tax Exemptions) का कम लाभ मिल पाता है तो दूसरी तरफ टैक्‍सपेयर पर जुर्माना (Fine) भी लगाया जाता है.

हर महीने भरना होगा 1 फीसदी प्रतिमाह की साधारण दर से ब्‍याज
अगर टैक्‍सपेयर्स को देरी से आईटीआर फाइल करने की आदत है तो छोड़ देनी चाहिए क्‍योंकि इससे उन्‍हें सिर्फ नुकसान ही होगा. आइए समझते हैं कि देरी से आईटीआर फाइल करने पर कौन-कौन से नुकसान उठाने होंगे. सबसे पहले देरी से रिटर्न फाइल करने पर करदाता आवासीय संपत्ति (House Property) को हुए नुकसान के अलावा किसी भी तरह की क्षति को कैरी फार्वर्ड (Carry Forward) नहीं कर सकते हैं. वहीं, आयकर कानून (Income Tax Act) की धारा-234A के तहत करदाता को 1 फीसदी की साधारण दर से हर महीने ब्‍याज (Simple Interest) चुकाना होगा.

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टैक्‍सपेयर्स से वसूला जा सकता है 10,000 रुपये तक का जुर्माना


केंद्र सरकार ने देरी से आईटीआर फाइल करने पर बिलंब शुल्‍क (Late Filing Fees) वसूलने की व्‍यवस्‍था भी कर दी है. वित्‍त वर्ष 2018-19 से ये व्‍यवस्‍था की गई है. इसके अगर कोई करदाता आकलन वर्ष (Assessment Year) तय तारीख के बाद, लेकिन 31 दिसंबर से पहले आईटीआर फाइल करता है तो उससे 5,000 रुपये लेट फाइलिंग फी वसूली जाएगी. वहीं, अगर रिटर्न 31 दिसंबर के बाद फाइल किया जाता है तो करदाता को 10,000 रुपये बिलंब शुल्‍क का भुगतान करना होगा. हालांकि, अगर करदाता की सालाना इनकम 5 लाख रुपये से ज्‍यादा नहीं है तो लेट फीस के तौर पर 1,000 रुपये ज्‍यादा नहीं वसूला जा सकता है.

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करदाता को नहीं मिलेगा इनकम टैक्‍स छूट और डिडक्‍शन का लाभ
आईटीआर फाइल करने में देरी के कारण करदाता को जुर्माना भरने के साथ ही कई तरह की इनकम टैक्‍स छूट से भी हाथ धोना पड़ेगा. इनमें आयकर कानून की धारा-10A और धारा-10B के तहत मिलने वाली छूट नहीं मिल पाएगी. वहीं, धारा-80IA, 80IAB, 80IC, 80ID और 80IE के तहत मिलने वाली छूट से भी हाथ धोना पड़ेगा. इसके अलावा देरी से इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने के कारण करदाता को आयकर कानून की धारा-80IAC, 80IBA, 80JJA, 80JJAA, 80LA, 80P, 80PA, 80QQB और 80RRB के तहत मिलने वाले डिडक्‍शन का लाभ भी नहीं मिलेगा.
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