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इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड संशोधन बिल लोकसभा में पेश, अब प्रमोटर्स पर नहीं चलेगा आपराधिक मुकदमा

निर्मला सीतारमण
निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (सेकंड एमेंडमेंट) बिल, 2019 लोकसभा में पेश किया है. इस संशोधन के तहत कंपनी के पूर्व प्रमोटर्स के अपराधों के लिए उसके नए खरीदारों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं चलाया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 12, 2019, 1:42 PM IST
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नई दिल्ली.इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (सेकंड एमेंडमेंट) बिल, 2019 के माध्यम से इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 (कोड) में अनेक संशोधन करने से जुड़ा बिल लोकसभा में पेश हो गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे पेश किया है. इस संशोधन के तहत कंपनी के पूर्व प्रमोटर्स के अपराधों के लिए उसके नए खरीदारों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं चलाया जाएगा. संशोधन का लक्ष्य कोड के उद्देश्यों की पूर्ति करना और कारोबार में और अधिक सुगमता सुनिश्चित करने के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया में आ रही विशेष कठिनाइयों को दूर करना है.

इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (सेकंड एमेंडमेंट) बिल, 2019 लोकसभा में पेश
(1) संशोधन के तहत पूर्ववर्ती प्रबंधन/प्रवर्तकों की ओर से किए गए अपराधों के लिए नए खरीदार पर कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी.

(2) अधिनियम में संशोधन यह भी सुनिश्चित करेगा कि कॉरपोरेट लेनदार के कारोबार का आधार कमजोर न पड़े और उसका व्यवसाय निरंतर जारी रहे.
(3) इसके लिए यह स्पष्ट किया जाएगा कि कर्ज वसूली स्थगन की अवधि के दौरान उद्यम का लाइसेंस, परमिट, रियायत, मंजूरी इत्यादि को समाप्त या निलंबित नहीं किया जाएगा और न ही उनका नवीकरण रोका जाएगा. इससे कंपनी चलता हाल उद्यम मानी जाएगी.



(4) कोड में संशोधन से बाधाएं दूर होंगी, सीआईआरपी सुव्यवस्थित होगी और अंतिम विकल्‍प वाले फंडिंग के संरक्षण से वित्तीय संकट का सामना कर रहे सेक्टरों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा.

(5)  कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने में होने वाली गड़बड़ियों की रोकथाम के लिए व्‍यापक वित्तीय कर्जदाताओं के लिए अतिरिक्त आरंभिक सीमा शुरू की गई है जिनका प्रतिनिधित्व एक अधिकृत प्रतिनिधि करेगा.



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(6) यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कॉरपोरेट कर्जदार के कारोबार का आधार कमजोर न पड़े और उसका व्यवसाय निरंतर जारी रहे. इसके लिए यह स्पष्ट किया जाएगा कि कर्ज स्थगन अवधि के दौरान लाइसेंस, परमिट, रियायतों, मंजूरी इत्यादि को न तो समाप्त अथवा निलंबित या नवीकरण नहीं किया जा सकता है.

(7) आईबीसी के तहत कॉरपोरेट कर्जदार को संरक्षण प्रदान किया जाएगा. इसके तहत पूर्व मैनेजमेंट/प्रमोटरों द्वारा किए गए अपराधों के लिए सफल दिवाला समाधान आवेदक पर कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी.

प्रस्ताव का विवरण
संशोधन विधेयक का उदेश्य धारा 5 (12), 5 (15), 7, 11, 14, 16 (1), 21 (2), 23 (1), 29 ए, 227, 239, 240 में संशोधन करने के साथ-साथ दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, 2016 (संहिता) में एक नई धारा 32ए को शामिल करना है.

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