अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बैठक में खुद शामिल हुए PM मोदी, जल्द हो सकते हैं बड़े ऐलान!

देश की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को पटरी पर लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) के साथ हाई लेवल मीटिंग की है.

News18Hindi
Updated: August 16, 2019, 12:29 PM IST
अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बैठक में खुद शामिल हुए PM मोदी, जल्द हो सकते हैं बड़े ऐलान!
अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बैठक में खुद शामिल हुए PM मोदी, दिया बड़े कदम उठाने का आदेश
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Updated: August 16, 2019, 12:29 PM IST
देश की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को पटरी पर लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने इसे लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) के साथ हाई लेवल मीटिंग की. CNBC TV18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त मंत्रालय के बड़े अधिकारियों के साथ बैठक में देश की आर्थिक स्थिति का जायजा लिया गया और इसे सुधारने के लिए बड़े कदम उठाने को कहा गया. प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री से शेयर बाजार में आई गिरावट, आर्थिक धीमेपन और ऑटो सेक्टर्स में फिर से जान फूंकने के लिए इनकी समीक्षा कर ठोस कदम उठाने को कहा है.

बड़े कदम उठाने की तैयारी- देश के विभिन्न सेक्टर्स में आर्थिक धीमापन है, इससे देश का आर्थिक विकास दर घट गया है. देश की अर्थव्यवस्था को फिर से गति देने के लिए सरकार की तरफ से जल्द बड़े फैसले लिए जा सकते हैं.

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>> इस बैठक में वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री को सभी सेक्टर्स से जुड़ी परेशानियों के बारे में बताया गया. वित्त मंत्री ने बताया कि ऑटो और रियल्टी सेकटर्स में बिक्री गिरने और इनवेंट्री बढ़ने से दिक्कते बढ़ी है.

>> इसके साथ ही उन्होंने शेयर बाजार की गिरावट पर एफपीआई (विदेशी निवेशक) की चिंताओं के बारे में बताया. विदेशी निवेशक सरचार्ज की वजह से भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे हैं.

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने वित्त मंत्रालय में हो रही हाई लेवल मीटिंग्स (फाइल फोटो)


>> सूत्रों की मानें तो वित्त मंत्रालय देश की इंडस्ट्रीज के लिए एक प्रोत्साहन पैकेज पर काम कर रहा है, जिसमें कर कटौती, सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन समेत कई वित्तीय कदम उठाए जाएंगे.
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>> सूत्रों ने बताया कि इस पैकेज का लक्ष्य उद्योगों की लागत घटाने के साथ-साथ ऐसे उपाय भी करना है, जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिले.

ऑटो सेक्टर्स के हालात बेहद खराब- ऑटो इंडस्ट्री में लगातार 9वें महीने गिरावट दर्ज की गई है. ब्रिकी के लिहाज़ से जुलाई का महीना बीते 18 साल में सबसे ख़राब रहा. इस दौरान बिक्री में 31% की गिरावट दर्ज की गई.

देश के ऑटो सेक्टर की हालात बेहद नाजुक हुई (फाइल फोटो)


सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबिल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के मुताबिक़ जुलाई में बीते 9 महीनों के दौरान सबसे कम 2,00,790 वाहनों की ही बिक्री हुई. इसके मुताबिक़ स्पोर्ट्स यूटिलिटी वीकल की बिक्री में 15% तो सवारी कार में 36% की गिरावट दर्ज की गई है.

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सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर कहते हैं कि इस इंडस्ट्री को तुरंत एक राहत पैकेज की ज़रूरत है. उनका कहना है कि जीएसटी की दरों में अस्थायी कटौती से भी इंडस्ट्री को कुछ राहत मिल सकती है. माथुर कहते हैं, ऑटो इंडस्ट्री की स्थिति और बिगड़ने से रोकने के लिए उद्योग प्रतिनिधियों की सरकार के साथ हाल ही में बातचीत हुई है. हमने राहत पैकेज की मांग की.

गाड़ियों पर जीएसटी की दर घटाने, स्क्रैपेज पॉलिसी लाने और वित्तीय क्षेत्र- ख़ासकर ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों- को मज़बूत करने की मांग की है.दूसरी ओर फेडरेशन ऑफ़ ऑटोमोबिल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के मुताबिक़, इस मंदी की वजह से बीते तीन महीने में दो लाख लोगों का रोज़गार छिन गया है.

बीते एक वर्ष के दौरान एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में गाड़ियों की ख़रीद में भारी कमी आई है, इसकी वजह ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में क्रेडिट की कमी का होना बताया गया है.
First published: August 16, 2019, 11:42 AM IST
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