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SBI द्वारा चुनावी बॉन्ड जारी किये जाने को लेकर वित्त मंत्री ने संसद ने दिया ये बयान!

भाषा
Updated: December 10, 2019, 7:40 PM IST
SBI द्वारा चुनावी बॉन्ड जारी किये जाने को लेकर वित्त मंत्री ने संसद ने दिया ये बयान!
एसबीआई के मार्फत चुनावी बॉन्ड जारी करने पर आरबीआई को नहीं थी आपत्ति

वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा चुनावी बॉन्ड जारी किये जाने के लिये परोक्ष सहमति दी थी.

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नई दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि चुनावी बॉन्ड (Electoral Bonds) के जरिये राजनीतिक दलों को चंदा देने की प्रक्रिया लागू करने से पहले इस बाबत सभी संबद्ध पक्षकारों के बीच हुये विस्तृत विचार विमर्श के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा चुनावी बॉन्ड जारी किये जाने के लिये परोक्ष सहमति दी थी.

वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा, चुनावी बॉन्ड को लेकर विचार-विमर्श के दौरान इस मामले के हितधारक होने के नाते आरबीआई की केन्द्रीय बोर्ड समिति (सीसीबी), 11 अक्टूबर 2017 को अपनी बैठक में चुनावी बॉन्ड एसबीआई द्वारा जारी किये जाने के लिये परोक्ष रूप से सहमत हो गयी थी.

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RBI द्वारा चुनावी बॉन्ड पर गंभीर चिंता जताये जाने संबंधी प्रश्न के लिखित उत्तर में सीतारमण ने कहा, इस मामले में 27 सितंबर 2017 को हुई सीसीबी की बैठक में समिति ने पत्रक रूप में चुनावी बॉन्ड को जारी नहीं करने के आरबीआई के निर्णय का समर्थन करते हुये टिप्पणी की थी कि यदि सरकार SBI के माध्यम से पत्रक रूप में चुनावी बॉन्ड को जारी करने का निर्णय लेती है तो बैंक को चाहिये कि सरकार को ऐसा करने दे.

उन्होंने कहा, हालांकि आरबीआई के गवर्नर ने 14 और 27 सितंबर 2017 के अपने पत्र में चुनावी बॉन्ड जारी करने के विरुद्ध कुछ चिंताएं व्यक्त की थीं. इन चिंताओं का कारण धारक बॉन्ड जारी करने हेतु प्लेटफार्म और संभावित जोखिमों के पहलुओं पर केन्द्रित था और ये आरबीआई की रूढ़िवादी स्थिति को प्रतिबिंबित करते थे.

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उल्लेखनीय है कि सरकार का दावा है कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने में चुनावी बॉन्ड मददगार साबित होंगे. वित्त मंत्री ने दलील दी कि इसका मकसद चंदा देने वाले की पहचान सुरक्षित रखना है.ये भी पढ़ें: 
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First published: December 10, 2019, 7:40 PM IST
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