वित्त मंत्री का फॉरेन करेंसी ओवरसीज सॉवरेन बॉन्ड पर पुनर्विचार से इनकार- रिपोर्ट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फॉरेन करेंसी विदेशी सॉवरेन बॉन्ड (Overseas Sovereign Bonds) जारी करने की योजना पर पुनर्विचार करने से इनकार किया है.

News18Hindi
Updated: July 28, 2019, 3:20 PM IST
वित्त मंत्री का फॉरेन करेंसी ओवरसीज सॉवरेन बॉन्ड पर पुनर्विचार से इनकार- रिपोर्ट
वित्ती मंत्री का विदेशी सॉवरेन बॉन्ड पर पुनर्विचार से इनकार
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Updated: July 28, 2019, 3:20 PM IST
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फॉरेन करेंसी विदेशी सॉवरेन बॉन्ड (Overseas Sovereign Bonds) जारी करने की योजना पर पुनर्विचार करने से इनकार किया है. इकोनॉमी के लिए दीर्घकालिक जोखिम की चेतावनी के बावजूद, रविवार को प्रकाशित एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था. गुरुवार को रॉयटर्स ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) चाहता था कि वित्त मंत्रालय विदेशी मुद्रा सॉवरेन बॉन्ड जारी करने के विचार को फिर से जारी करे और व्यापक परामर्श ले. सीतारमण ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, मैं कोई समीक्षा नहीं कर रही हूं. मुझे किसी से भी समीक्षा करने के लिए नहीं कहा गया है.

बजट में हुआ था ऐलान
इस महीने, सीतारमण ने 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष 2019-2020 के लिए बजट पेश करते हुए कहा था कि भारत घरेलू बाजार से धन जुटाने के अलावा विदेशी मुद्रा सॉवरेन बॉन्ड जारी करेगा. इस प्रस्ताव की भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व प्रमुखों, अर्थशास्त्रियों और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सहयोगियों द्वारा आलोचना की गई है. उनका तर्क है कि ये बॉन्ड विदेशी करेंसियों में ही होता है और अगर रुपया किसी भी वजह से गिरा तो सरकार की देनदारी बड़ी होती जाएगी.

सीतारमण ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया सरकार अपने सकल उधार कार्यक्रम का एक हिस्सा बाहरी बाजारों में एक्सटर्नल करेंसी में बढ़ाना शुरू करेगी. इससे घरेलू बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की मांग की स्थिति पर भी लाभकारी प्रभाव पड़ेगा. सरकार की योजना फॉरेन ओवरसीज मार्केट से करीब 10 अरब डॉलर उधार लेने की है. 2019/20 में कुल 103 अरब डॉलर उधार लेने की योजना की योजना है. सीतारमण ने अखबार को बताया कि इसे जारी करने का समय और इसके आकार जैसे विवरणों पर काम नहीं किया गया है.

क्या होता है सॉवरेन बॉन्ड
बॉन्ड निश्चित रिटर्न देने वाला एक ऐसा साधन होता है जिसके द्वारा कंपनियां या सरकार कर्ज जुटाती हैं. जो बॉन्ड खरीदता है वह एक तरह से सरकार या कंपनी को कर्ज दे रहा होता है और उसे इसके बदले एक निश्चित समय में मूलधन के साथ एक निश्चित रिटर्न देने का वायदा किया जाता है. इस तरह विदेश में सॉवरेन बॉन्ड जारी कर सरकार का धन जुटाने और उस पैसे को विकास में लगाने का प्लान है. बाद में मैच्योरिटी पर यह पैसा सूद के साथ वापस किया जाएगा.

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First published: July 28, 2019, 3:20 PM IST
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