सरकार ने संसद को बताया- इन बैंकों का नहीं होगा प्राइवेटाइजेशन

वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने संसद को बताया है कि सरकार की रीजनल रूरल बैंकों (RRB) के निजीकरण की कोई योजना नहीं है.

News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 12:46 PM IST
सरकार ने संसद को बताया-  इन बैंकों का नहीं होगा प्राइवेटाइजेशन
वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने संसद को बताया है कि सरकार की रीजनल रूरल बैंकों (RRB) के निजीकरण की कोई योजना नहीं है.
News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 12:46 PM IST
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) का प्राइवेटाइजेशन यानी निजीकरण नहीं होगा. लेकिन इनका मर्जर जारी रहेगा. सरकार का इरादा आरआरबी की संख्या को मौजूदा 56 से घटाकर 36 करने की है. वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने संसद को बताया है कि सरकार की रीजनल रूरल बैंकों (RRB) के निजीकरण की कोई योजना नहीं है. लेकिन एक राज्य के अंदर RRB का मर्जर किया गया है और इसका मकसद RRB के खर्चों को कम करना, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाना, कैपिटल बेस और बिजनेस के एरिया में वृद्धि करना है. साथ ही उनका कहना है कि पिछले चार वित्त वर्ष में सरकारी बैंकों ने 3.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी की है. इसमें वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान लगभग 1.21 लाख करोड़ रुपये की रिकवरी शामिल है.

सरकारी बैंकों में सुधार के लिए अब तक उठाए कई बड़े कदम-वित्त वर्ष 2017-18 में 100 करोड़ रुपये या इससे अधिक के एक्सपोजर वाले 792 कर्जदारों के लोन एकाउंट को बैड लोन की कैटेगरी में रखा गया था.

वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने संसद को बताया है कि सरकार की रीजनल रूरल बैंकों (RRB) के निजीकरण की कोई योजना नहीं है.


>> अनुराग ठाकुर ने बताया, 'सरकारी बैंकों में सुधार के एजेंडा के तहत इन बैंकों ने बकाया कर्ज की रिकवरी पर जोर देने के लिए अलग वर्टिकल बनाए हैं, अधिक वैल्यू वाले लोन को सैंक्शन करने की जिम्मेदारी से निगरानी को अलग किया है और 250 करोड़ रुपये से अधिक के लोन एकाउंट्स की निगरानी की जिम्मेदारी स्पेशलाइज्ड मॉनिटरिंग एजेंसियों को दी है.

ये भी पढ़ें-देश में सभी जगह लगेंगे बिजली के स्मार्ट मीटर! जानें मामला

>> पिछले फाइनेंशियल ईयर में 100 करोड़ रुपये या इससे अधिक के बकाया कर्ज वाले सरकारी बैंकों के 738 कर्जदारों के लोन एकाउंट को बैड लोन की कैटेगरी में डाला गया.

>> अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 2018-19 के लिए प्रोविजनल डेटा उपलब्ध कराया है. इस डेटा के अनुसार, 2018-19 में सरकारी बैंकों के 10,000 करोड़ रुपये या इससे अधिक के एक्सपोजर वाले 48 बॉरोअर थे.
Loading...



आरआरबी बैंक क्या होते है-क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का गठन आरआरबी अधिनियमन 1976 के तहत किया गया है. इनके गठन के पीछे मकसद छोटे किसानों, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण क्षेत्र में कारीगरों को कर्ज और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराना था.

ये भी पढ़ें- मोदी सरकार का तोहफा, किसानों के लिए फसल बीमा होगी स्वैच्छिक

>> इस कानून में 2015 में संशोधन किया गया. इसके तहत इन बैंकों को केंद्र, राज्य सरकारों और प्रायोजक बैंक के अलावा दूसरे स्रोतों से पूंजी जुटाने की अनुमति दी गई.

मौजूदा समय में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है जबकि 35 प्रतिशत हिस्सेदारी संबंधित प्रायोजक बैंक की और 15 प्रतिशत राज्य सरकार की हिस्सेदारी है.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 16, 2019, 12:35 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...