क्या गैर-जरूरी वस्तुओं पर बढ़ेंगी जीएसटी दरें? जानिये क्या है वित्त मंत्रालय का कहना

क्या गैर-जरूरी वस्तुओं पर बढ़ेंगी जीएसटी दरें? जानिये क्या है वित्त मंत्रालय का कहना
वस्तु एवं सेवा कर

देशभर में लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां (Economic Activities) पूरी तरह से ठप हैं. हालां​कि, लॉकडाउन में चौथे चरण में इसमें आंशिक छूट मिली है. लेकिन, जीएसटी कलेक्शन पर इसका असर देखने को मिल रहा है.

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नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) गैर-जरूरी वस्तुओं पर वस्तु एंव सेवा कर (GST) दरें बढ़ाने के पक्ष में नहीं है, खासकर एक ऐसे समय में जब कोविड-19 की वजह से रेवेन्यू कलेक्शन (Revenue Collection)  में भारी गिरावट दर्ज की गई है. देशभर में 25 मार्च से लागू लॉकडाउन की वजह से लगभग हर तरह के बिजनेस प्रभावित हुए हैं. लिहाजा, जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) पर भी इसका असर पड़ा है.

जीएसटी काउंसिल लेगी अंतिम फैसला
जून में ही जीएसटी काउंसिल (GST Council) की अगली बैठक होने वाली है. लाइवमिंट ने अपनी एक रिपोर्ट में वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से लिखा है कि लॉकडाउन के बाद सभी मोर्चे पर मांग में इजाफा होगा और आर्थिक गतिविधियां जोर पकड़ेंगी. ऐसा नहीं है कि इसमें केवल जरूरी वस्तुएं ही शामिल होंगी. गैर-जरूरी वस्तुओं को लेकर हम कोई फैसला नहीं कर सकते हैं. इस मामले पर अंतिम निर्णय जीएसटी काउंसिल को ही लेना होगा.

हालां​कि, 31 मई को खत्म हो रहे लॉकडाउन के चौथे चरण में सरकार ने आंशिक छूट दी है. करीब दो महीने से अधिक समय के लिए लॉकडाउन और शहरी व औद्योगिक क्षेत्रों से प्रवासी मजूदरों के पलायन की वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है.



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क्या है गोल्डमैन सैक्स का कहना?
इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने कहा है कि भारत में कड़े लॉकडाउन और जरूरत से कम वित्तीय सपोर्ट की वजह से जून तिमाही में जीडीपी में 45 फीसदी तक सिकुड़ सकता है. गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि दुनियाभर की उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत में वित्तीय सपोर्ट बेहद कम है.

कई अन्य जानकारों का कहना है कि भारत में बीते 40 साल में सबसे बुरी मंदी का दौर आ सकता है. चालू वित्त वर्ष में यह कम से कम 5 फीसदी तक सिकुड़ सकती है.

चालू वित्त वर्ष में 5 फीसदी सिकुड़ेगी ​अर्थव्यवस्था
बीते गुरुवार को S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा कि वित्त वर्ष 2020—21 में भारतीय अर्थव्यवस्थ 5 फीसदी तक सिकुड़ सकती है. एसएंडपी ने माना है कि भारत में मौजूदा आउटब्रेक सितंबर महीने में चरम पर होगा.

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