मोदी सरकार के इस फैसले से 8 करोड़ PF खाताधारकों को लग सकता है झटका!

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Updated: June 28, 2019, 11:07 AM IST
मोदी सरकार के इस फैसले से 8 करोड़ PF खाताधारकों को लग सकता है झटका!
8 करोड़ PF खाताधारकों को लग सकता है झटका!

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने इम्प्लॉई प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) को पीएफ की ब्याज दर को सालाना 8.65 फीसदी से कम करने के लिए कहा है.

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  • Last Updated: June 28, 2019, 11:07 AM IST
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केंद्र की मोदी सरकार प्रॉविडेंट फंड (PF) के ब्याज को कम करने की तैयारी कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने इम्प्लॉई प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) को पीएफ की ब्याज दर को सालाना 8.65 फीसदी से कम करने के लिए कहा है. न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक वित्त मंत्रालय को इस बात की चिंता है कि पीएफ पर अधिक रिटर्न देने पर बैंकों के लिए आकर्षक ब्याज दरें देना संभव नहीं होगा, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. इससे पहले वित्त मंत्रालय ने EPFO से पूछा था कि इतना ब्याज देने के लिए क्या उनके के पास पर्याप्त फंड है. आपको बता दें कि फाइनेंस कंपनी IL&FS और उसी तरह के अन्य जोखिम भरे निवेशों में कई बड़े निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा है. ऐसे में क्या EPFO नुकसान से बच पाया है. साथ ही, उसके पास क्या अब पर्याप्त रकम है.

नौकरी करने वालों की सैलरी में कुछ हिस्सा PF में जाता है- नौकरी करने वालों की सैलरी से एक हिस्सा पीएफ के तौर पर कटता है. यह रकम आपके PF (Provident Fund) खाते में जमा होती है. यह एक प्रकार का निवेश कहलाता है.

आपको बता दें कि एम्प्लॉई प्रॉविडेंट फंड (Employee Provident Fund) यानी EPF यह सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक फायदा देने वाली स्कीम है, जो एम्प्लॉईज़ प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (Employees' Provident Fund Organisation) यानी EPFO द्वारा चलाई जाती है. इसकी ब्याज दरें सरकार तय करती है. मौजूदा समय में खाताधारकों को 8.65 फीसदी का ब्याज मिल रहा है. (ये भी पढ़ें-नौकरी करने वालों के लिए PF से पैसा निकालना हुआ आसान! जानें पूरा प्रोसेस)

EPFO पर भारी पड़ेगा ज्यादा रिटर्न देना 

>> देश की कुल 20 फीसदी वर्कफोर्स ईपीएफओ की सदस्य है, जो हर महीने अपनी सैलरी का कुछ हिस्सा प्रॉविडेंट फंड में निवेश करते हैं. ईपीएफओ अपने फंड का 85 फीसदी से भी ज्यादा भाग केंद्र और राज्यों की सिक्योरिटीज और ऊंची रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड्स में निवेश करता है. 190 अरब डॉलर की एसेट संभालने वाले ईपीएफओ ने तकरीबन 8.31 करोड़ डॉलर (5.75 अरब रुपए) मुश्किलों से जूझ रही IL&FS के बॉन्ड्स में निवेश किए थे.

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>> श्रम मंत्रालय के अधीन आने वाले ईपीएफओ ने लोकसभा चुनाव से पहले मार्च, 2019 में समाप्त वित्त वर्ष के लिए 8.65 फीसदी ब्याज दर का ऐलान किया था. हालांकि, फंड्स के खराब प्रदर्शन को देखते हुए यह ब्याज दर सही नहीं लग रही है. अधिकारियों के मुताबिक, महंगाई में 3 फीसदी इजाफे को देखते हुए बढ़ी हुई ब्याज दर उन लोगों को आकर्षित करेगी जो सेविंग करना चाहते हैं.
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>> हालांकि महंगाई के ही चलते बैंक अपने सेविंग्स डिपॉजिट रेट को बराबर स्तर पर रखने के लिए मजबूर हाे रहे हैं. बैंकों को यह डर भी है कि वे फंड्स के चलते अपने डिपॉजिट गंवा बैठेंगे, जाे कि कर्ज लेने वालों के लिए संकट की बात है.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अप्रूवल के बाद श्रम मंत्रालय को सौंपे गए मेमोरेंडम में लिखा, ‘IL&FS में निवेश के चलते फंड को नुकसान हुआ होगा. ऐसे में श्रम व रोजगार मंत्रालय को वित्त वर्ष 2018-19 के लिए ब्याज दर पर फिर से विचार करने की सलाह दी जाती है.’ India Rating & Research के चीफ इकोनॉमिस्ट देवेंद्र पंत के मुताबिक, ईपीएफओ पर ब्याज दर सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश से होने वाली कमाई के अनुरूप होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारी सिक्योरिटीज पर मुनाफा घटता जा रहा है. ऐसे में मेंबर्स को ज्यादा रिटर्न देना सही नहीं है.

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First published: June 28, 2019, 10:24 AM IST
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