Loan Moratorium: लोन पर ब्याज छूट को लेकर सरकार ने जारी की गाइडलाइंस, आपके अकाउंट में वापस आएगा पैसा

ब्याज पर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच अंतर के बराबर राशि का भुगतान सरकार करेगी.
ब्याज पर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच अंतर के बराबर राशि का भुगतान सरकार करेगी.

Loan Moratorium की अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज की छूट को लेकर वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने गाइडलाइंस जारी कर दी हैं. 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज लेने वालों को इसका लाभ मिलेगा. लोन अकाउंट में संचयी ब्याज यानी ब्याज पर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच अंतर की राशि डाली जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2020, 2:05 PM IST
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नई दिल्ली. वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने लोन मोरेटोरियम से जुड़े ब्याज से छूट देने को लेकर दिशानिर्देश जारी कर दिया है. कोविड-19 संकट के कारण भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की तरफ से कर्ज चुकाने को लेकर मोहलत देने का ऐलान किया गया था. इसके तहत 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर छह महीने के लिये दी गई मोहलत के दौरान संचयी ब्याज यानी ब्याज पर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच अंतर के बराबर राशि का भुगतान सरकार करेगी.

उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) ने केंद्र को RBI की तरफ से कर्ज लौटाने को लेकर दी गयी मोहलत के तहत 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज छूट योजना को जल्द- से -जल्द लागू करने का निर्देश दिया था. उसके बाद यह दिशानिर्देश आया है.

क्या होगी इस लाभ की अवधि?
वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुसार कर्जदार संबंधित ऋण खाते पर योजना का लाभ ले सकते हैं. यह लाभ एक मार्च, 2020 से 31 अगस्त, 2020 की अवधि के लिये है. इसके अनुसार जिन कर्जदारों के ऊपर 29 फरवरी तक कुल ऋण 2 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है, वे योजना का लाभ उठाने के लिये पात्र होंगे.
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इन कर्जों पर मिलेगा लाभ
इस योजना के तहत आवास ऋण, शिक्षा ऋण, क्रेडिट कार्ड बकाया, वाहन कर्ज, MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम), टिकाऊ उपभोक्ता सामन के लिये लिया गया कर्ज और खपत के लिये लिया ऋण आएगा.

लोन अकाउंट में वापस आएग पैसा
दिशानिर्देश के अनुसार बैंक और वित्तीय संस्थान पात्र कर्जदारों के लोन खाते (Loan Account) में मोहलत अवधि के दौरान ब्याज के ऊपर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच अंतर की राशि डालेंगे. यह उन सभी पात्र कर्जदाताओं के लिये है, जिन्होंने आरबीआई द्वारा 27 मार्च, 2020 को घोषित योजना के तहत पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से कर्ज लैटाने को लेकर दी गयी छूट का लाभ उठाया.

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वित्तीय संस्थान संबंधित कर्जदार के खाते में रकम डालकर उसके भुगतान के लिये केंद्र सरकार से दावा करेंगे. सूत्रों के अनुसार सरकारी खजाने पर इस योजना के क्रियान्वयन में 6,500 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.
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