पहले चिप और अब इस चीज की कमी ने ग्लाेबल ऑटाे मेकर्स के माथे पर खीची चिंता की लकीर

ऑटाेमाेबाइल इंडस्ट्री पर कोरोना संकट का पिछले साल से ही सबसे ज्‍यादा असर पड़ा है. कई प्लांंट्स ने या ताे प्राेडक्शन राेक दिया है या आधा कर दिया है, जिसके चलते अरबों डॉलर्स का रेवेन्यू लॉस हाे रहा है.

ऑटाेमाेबाइल इंडस्ट्री पर कोरोना संकट का पिछले साल से ही सबसे ज्‍यादा असर पड़ा है. कई प्लांंट्स ने या ताे प्राेडक्शन राेक दिया है या आधा कर दिया है, जिसके चलते अरबों डॉलर्स का रेवेन्यू लॉस हाे रहा है.

ऑटाेमाेबाइल इंडस्ट्री पर कोरोना संकट का पिछले साल से ही सबसे ज्‍यादा असर पड़ा है. कई प्लांंट्स ने या ताे प्राेडक्शन राेक दिया है या आधा कर दिया है, जिसके चलते अरबों डॉलर्स का रेवेन्यू लॉस हाे रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2021, 9:07 PM IST
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नई दिल्ली. दुनियाभर के ऑटाे मेकर्स (Auto Makers) एक तरफ काेविड 19 के चलते शटडाउन के कारण वाहन निर्माण (vehicle manufacture) के लिए बेहद जरूरी पार्ट चिप की कमी से जूझ रहा है  ताे वहीं अब एक नई मुसीबत उनके सामने खड़ी है. अब रबड़ की सप्लाई (Supply of rubber) में आई कमी, जिसने ऑटाे मेकर्स के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है. शिपिंग सेवाएं बाधित हाेने के चलते रबड़ के आयात में दिक्‍कत हाे रही है. यह वह महत्वपूर्ण मटेरियल है जिसका इस्तेमाल हुड के अंदर और वाहनाें के टायराें में ताे हाेता ही है. सिर्फ इतना ही नहीं वाहनाें की सीट काे तैयार करने में जरूरी फाेम, प्लास्टिक यहां तक की मैटल पार्ट्स की कमी भी चल रही है. वाे भी उस दाैर में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में ऑटाेमाेबाइल सेक्टर का महत्वपूर्ण योगदान होता है. फिलहाल सप्लाई चेन में आ रही लगातार बाधा के चलते यह पड़ाव पर आता नजर आ रहा है.



ऐसे में जब काेविड 19 की दूसरी लहर चल रही है लगभग सभी उद्याेगाें पर इसका प्रभाव साफ देखा जा रहा है. ऑटाेमाेबाइल इंडस्ट्री पर ताे जबरदस्त हिट हुआ है पिछले साल से ही. कई प्लाट्स ने या ताे प्राेडक्शन राेक दिया है या फिर आधा कर दिया है जिसके चलते बिलियन्स डॉलर्स का रेवेन्यू लॉस हाे रहा है.



चायना कर रहा है स्टॉक 



ग्लाेबल सप्लाई चैन काे जहां बड़ी मार पड़ी है वहीं चायना जैसे फिर से बड़ी मात्रा में  कंपाेनेट का स्टॉक कर रही है, रबड़ की कीमतें गुब्बारे की तरह बढ़ती ही जा रही है. ताे वहीं दूसरी तरफ यूनाइटेड स्टेट जैसे ऑटाेमाेबाइल दिग्गज  भी कंपाेनेंट्स के स्टॉक काे जमा कर रहे है वाे भी बड़े स्तर पर. जाने माने कार मैन्यूफैक्चरर्स जिसमें फिऐट, फाेर्ड माेटर्स  भी शामिल है यह कह रहे है कि वाे रबड़ सप्लाई पर निगरानी रख रहे हैं और उनके उत्पादन पर महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं देखा है. सबसे बड़े टायर निर्माताओं में से एक मिशेलिन जिसका फ्रांस में मुख्यालय है वाे बंदरगाह की जगह एयर ट्रांसपाेर्ट का इस्तेमाल कर रहे है. वर्तमान समय में चल रही रबड़ की कमी वाहनाें के उत्पादन काे और बाधित करेगी क्याेंकि सप्लाई चैन काेराेना की इस नई लहर के चलते आने वाले दिनाें में भी सामान्य हाेती नजर नहीं आ रही है. जिसने कई देशाें काे अपने चपेट में ले रखा है. 


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ये भी है चिंता की बात 



इस संबंध में एक बड़ी चिंता की बात यह भी है कि ब्लूमबर्ग के अनुसार रबड़ के पेड़ाें परिपक्वता अवधि के लिए सात साल की आवश्यकता हाेती है जिसके बाद उसे रबड़ निष्कर्षण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल बाउंस बैक जल्दी हाेगा इसकी उम्मीद कम है.   


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