फिच ने दिया झटका, भारत का GDP ग्रोथ अनुमान 6.8% से घटाकर 6.6% किया

दुनिया की बड़ी रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष भारत की आर्थिक विकास दर अनुमान 6.8 फीसदी से घटाकर 6.60 फीसदी कर दिया है.

News18Hindi
Updated: June 17, 2019, 8:35 PM IST
फिच ने दिया झटका, भारत का GDP ग्रोथ अनुमान 6.8% से घटाकर 6.6% किया
फिच ने भारत का GDP ग्रोथ अनुमान 6.8% से घटाकर 6.6% किया
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Updated: June 17, 2019, 8:35 PM IST
दुनिया की बड़ी रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष भारत की आर्थिक विकास दर अनुमान 6.8 फीसदी से घटाकर 6.60 फीसदी कर दिया है.मैन्युफैक्चरिंग और कृषि क्षेत्र में सुस्ती का जीडीपी ग्रोथ पर असर दिख सकता है. वहीं, वित्तवर्ष 2020-21 में 7.1 फीसदी की दर का अनुमान लगाया है.

2020-21 के लिए 7.1 फीसदी ग्रोथ अनुमान बरकरार
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक में अगले वित्त वर्ष यानी 2020-21 के लिए 7.1 फीसदी और 2021-22 के लिए 7 फीसदी के ग्रोथ अनुमान को बरकरार रखा है. पिछले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 6.8 फीसदी के साथ 5 साल के निचले स्तर पर आ गई थी. फिच ने कहा, हम वित्त वर्ष 2019-20 में 6.6 फीसदी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं. इसके अलावा 2020-21 में 7.1 फीसदी और 2021-22 में यह 7 फीसदी रहने का अनुमान है.

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लगातार चौथी तिमाही जीडीपी ग्रोथ घटी
जनवरी-मार्च तिमाही में 5.8 फीसदी की ग्रोथ के साथ भारत की जीडीपी ग्रोथ में लगातार चौथी तिमाही में गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि एक साल पहले समान अवधि में यह आंकड़ा 8.1 फीसदी रहा था.
फिच ने कहा, यह 5 साल में सबसे ग्रोथ रही है. बीते साल के दौरान रही सुस्ती की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और कृषि में नरमी रही. कमजोर ग्रोथ की मुख्य वजह घरेलू रहीं. वहीं निर्यात वृद्धि भी हाल में कमजोर पड़ी है.
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RBI रेपो रेट में फिर कर सकता है 0.25% की कटौती
फिच ने कहा कि RBI ने जून के पॉलिसी रिव्यू में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कमी की, जो इस साल तीसरी कटौती थी. फिच ने कहा, हमें 2019 में एक बार फिर रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की उम्मीद है, जिससे पॉलिसी रेपो रेट घटकर 5.50 फीसदी पर आ जाएंगी. आरबीआई द्वारा मॉनिट्री और रेग्युलेटरी नरमी से प्राइवेट सेक्टर को क्रेडिट में रिकवरी आनी चाहिए.

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जीडीपी आप पर कैसे डालती है असर
भारत में कृषि, उद्योग और सर्विसेज़ यानी सेवा तीन प्रमुख घटक हैं जिनमें उत्पादन बढ़ने या घटने के औसत के आधार पर जीडीपी दर होती है. ऐसे में अगर देश में तीनों में से किसी भी सेक्टर में ग्रोथ घटती है तो इसका मतलब साफ है कि उससे जुड़े उद्योग संकट में है. लिहाजा नौकरी करने वाले से लेकर सभी पर इसका असर होता है. वहीं, जीडीपी में तेज ग्रोथ आती है तो मतलब साफ है कि नौकरियां बढ़ रही है. लिहाजा लोगों की आमदनी भी तेजी से बढ़ेगी.

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First published: June 17, 2019, 8:35 PM IST
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