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अगले साल 5.6% रहेगी भारत की GDP ग्रोथ, सरकार पर कुल GDP का 70% कर्ज-फिच

पीटीआई
Updated: February 3, 2020, 5:43 PM IST
अगले साल 5.6% रहेगी भारत की GDP ग्रोथ, सरकार पर कुल GDP का 70% कर्ज-फिच
फिच रेटिंग्स

रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने अगले वित्त वर्ष के लिए भारतीय जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 5.6 फीसदी रखा है. आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार के अनुमान के मुकाबले यह कम है.

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नई दिल्ली. रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने अगले वित्त वर्ष के लिए भारतीय जीडीपी ग्रोथ (India's GDP Growth) का अनुमान 5.6 फीसदी कर दिया है. हाल ही में बजट से ठीक एक दिन पहले पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey 2020) में केंद्र सरकार ने जो अनुमान लगाया था, उसके मुकाबले यह कम है. फिच का मानना है कि केंद्र सरकार ने बजट में कुछ ऐसान ऐलान नहीं किया है, जिससे भारतीय अ​र्थव्यवस्था (Indian Economy) में बड़ी तेजी देखने को मिले. आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार ने अगले वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6-6.5 फीसदी लगाया है, जो कि चालू वित्त वर्ष में 5 फीसदी के अनुमान से अधिक है.

सरकार पर कुल GDP का 70 फीसदी कर्ज
फिच रेटिंग्स के थॉमस रूकमाकर ने कहा, 'बजट में वित्त वर्ष 2021 के लिए ऐलान के मुताबिक फिस्कल स्लिपेज पहले के लक्ष्य के मुकाबले बहुत मामूली है. पिछले साल दिसंबर में जो हमने BBB- की रेटिंग दी थी, ये उसी को सही ठहराता है.' वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने लगातार तीसरे साल भी वित्तीय घाटे (Fiscal Deficit) के लक्ष्य को पूरा करने में असफल रही हैं. पहले तय किए गए 3.3 फीसदी की तुलना में इसे बढ़ाकर 3.8 फीसदी कर दिया गया है. 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष के लिए यह 3.5 फीसदी तक किया गया है. फिच ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2022 में भी सरकारी कर्ज कुल जीडीपी का 70 फीसदी ही रहेगा.



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मिल सकता है आर्थिक ग्रोथ को मोमेंटम
उन्होंने कहा कि बजट में ऐसा कुछ भी नहीं रहा कि हम भारत के आर्थिक ग्रोथ आउटलुक (Economic Growth Outlook) में बदलाव करें. हमने वित्त वर्ष 2020 के लिए आर्थिक विकास दर 4.6 फीसदी और वित्त वर्ष 2021 के लिए 5.6 फीसदी ही तय किया है. रिपोर्ट में कहा गया कि बजट में कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जिसकी वजह से जीडीपी ग्रोथ को मोमेंटम पकड़ने में मदद मिल सकती है. इसमें इनकम टैक्स रेट्स में कटौती, विदेशी निवेश पर जोर, इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश और कुछ स्कीम्स की वजह से ग्रोथ में मोमेंटम आ सकती है. भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है. 

टैक्स कटौती से रेवेन्यू पर असर
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि बजट में 10 फीसदी का नॉमिनल ग्रोथ रेट और रेवेन्यू में 9.2 फीसदी का इजाफा मोटे तौर पर क्रेडिबल है. हालांकि, इसके उलट इसमें ​जोखिम भी है. कहा गया है कि​ पिछले साल कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का ऐलान और इस बार बजट में इनकम टैक्स दर में कटौती के फैसले से कुल रेवेन्यू को छोटी अवधि में प्रभावित कर सकता है. विनिवेश का लक्ष्य पूरा हो सकता है. बता दें कि पिछले साल जुलाई-सितंबर तिमाही में भारतीय आथिक ग्रोथ ​बीते 11 साल के न्यूनतम स्तर पर फिसल कर 4.5 फीसदी पर पहुंच गया है.

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First published: February 3, 2020, 5:24 PM IST
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