Indian Economy के लिए खराब संकेत! नई चुनौती से 9.5 फीसदी तक सिमट सकती है आर्थिक वृद्धि दर

फिच रेटिंग्स ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की वृद्धि दर के अनुमान को घटा दिया है.

फिच रेटिंग्स ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की वृद्धि दर के अनुमान को घटा दिया है.

ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी फिच सॉल्‍यूशंस (Fitch Solutions) का कहना है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर (2nd Wave of Covid-19) को काबू करने के लिए लगाए जा रहे लॉकडाउन (Lockdown) और दूसरी पाबंदियों से भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) के सुधार पर जोखिम बढ़ रहा है. साथ ही कहा कि इस दौरान भारत की मेडिकल सुविधाओं की खामियां भी उजागर हुई हैं.

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नई दिल्ली. ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी फिच सॉल्यूशंस (Fitch Solutions) ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर अच्‍छे संकेत नहीं दिए हैं. रेटिंग एजेंसी का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर ने भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. इसका असर आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) दर पर पड़ेगा और वित्‍त वर्ष 2021-22 (FY22) के दौरान भारत का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (Actual GDP) 9.5 फीसदी तक सिमट सकता है. एजेंसी का कहना है कि कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान भारत के हेल्‍थ सेक्‍टर की बड़ी कमियां सामने आई हैं.

अप्रैल-जून 2020 के मुकाबले इस साल कम पड़ेगा अर्थव्‍यवस्‍था पर असर

फिच सॉल्‍यूशंस का कहना है कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कई राज्यों में लॉकडाउन और पाबंदियां लगा दी गई हैं. इससे कारोबारी गतिविधियों पर बुरा असर पड़ेगा. ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार पर जोखिम बना हुआ है. हालांकि, मौजूदा पाबंदियों से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला वास्तविक असर अप्रैल-जून 2020 के मुकाबले कम ही रहेगा. एजेंसी ने कहा कि कोविड-19 के बढ़ते संकट के बीच बीजेपी के प्रति जनसमर्थन को कुछ धक्का लगा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी को मतदाताओं का समर्थन आने वाली तिमाहियों व इस मानव संकट के दौरान मजबूत बना रहेगा.

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कंटेनमेंट जोन जैसे उपायों से सुधरती अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ेगा बुरा असर

कोरोना वायरस संक्रमण की लहर ने देश की स्वास्थ्य सुविधाओं को डुबो दिया है. देश में रोजना कोरोना वायरस के 4 लाख से ज्‍यादा मामले सामने आ रहे हैं. फिच का मानना है कि कंटेनमेंट जोन जैसे उपायों से भारत की आर्थिक क्षेत्र में सुधरती स्थिति पर बुरा असर होगा. एजेंसी का कहना है कि भारत में दूसरी लहर के लिये व्यापक तौर पर ब्रिटेन में सबसे पहले पहचान किए गए बी.1.1.7 वेरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा है. इसकी वजह से पंजाब में मामले तेजी से बढ़े. वहीं, दूसरी बड़ी वजह घरेलू स्तर पर बढ़ने वाले वेरिएंट बी.1.617 की रही है, जो महाराष्ट्र में पैदा हुए. इसीलिए महाराष्ट्र पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा.

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