Fitch Ratings की रिपोर्ट में अनुमान, वित्‍त वर्ष 2021-22 में बढ़ सकता है भारतीय बैंकों पर बैड लोन का दबाव

Fitch Ratings का अनुमान है कि आने वाले समय में भारतीय बैंकों पर दबाव बढ़ेगा.

Fitch Ratings का अनुमान है कि आने वाले समय में भारतीय बैंकों पर दबाव बढ़ेगा.

ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्‍स (Fitch Ratings) का अनुमान है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर (Indian Banking Sector) को दबाव से उबारने के लिए 58 अरब डॉलर तक की पूंजी डालने (Capital Infusion) की जरूरत पड़ेगी. हालांकि, हाल में आए तिमाही नतीजों से पता चलता है कि फाइनेंशियल सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के मुनाफे और एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है.

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नई दिल्‍ली. ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्‍स (Fitch Ratings) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वित्‍त वर्ष 2021-22 के दौरान भारतीय बैंकिंग सिस्टम में बैड लोन (Bad loans) और कर्ज लागत (Credit Cost) से जुड़ी मुश्किलें बढ़ती दिख सकती हैं. कोरोना महामारी से जूझ रही भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई ईजी मनी पॉलिसी (Easy Mony Policy) पर धीरे-धीरे दबाव बढ़ना शुरू हो सकता है. साथ ही कहा गया है कि पहले से मुश्किल दौर से गुजर रहे फाइनेंशियल सेक्टर को कोरोना वायरस के फैलने की रफ्तार को थामने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण पिछले साल बड़ा धक्का लगा है.

बैंकों की बैलेंसशीट पर जल्‍द दिखने लगेगा दबाव
फिच रेटिंग्‍स की रिपोर्ट में आगे कहा गया है, 'हाल में आए तिमाही नतीजों से पता चलता है कि फाइनेंशियल सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के मुनाफे और एसेट क्वालिटी में कुछ सुधार हुआ है.' हाल में आया सुधार कोरोना महामारी की वजह से फाइनेंशियल सेक्टर (Financial Sector) पर पड़े दबाव की शुरुआत भर है. बैंकों पर आगे चलकर कोरोना महामारी के कारण छोटे कारोबारियों पर पड़े बुरे असर और देश में बढ़ी बेरोजगारी (Unemployment) का प्रभाव देखने को मिल सकता है. असंगठित अर्थव्‍यवस्‍था (Informal Economy) और छोटे कारोबार पर पड़े कोरोना महामारी के असर, उच्च बेरोजगारी दर और घटते निजी उपभोग का बैंकों की बैलेंसशीट पर असली प्रभाव अभी पूरी तरह देखने को नहीं मिला है. जल्‍द इसका पूरा असर देखने को मिलेगा.

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कई सेक्‍टर कर रहे क्षमता से कम स्‍तर पर काम


रेटिंग एजेंसी का कहना है कि तीसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार देखने को मिला है, लेकिन अब भी कई सेक्टर क्षमता से कम स्तर पर काम कर रहे हैं. इकोनॉमी के कुछ इंडीकेटर रिटेल कस्टमर पर दबाव का संकेत दे रहे हैं. रिटेल सेक्‍टर के साथ ही मुश्किल से गुजर रहे छोटे-मझोले उद्योगों (SMEs) को कर्ज देने के दबाव के कारण बैंकों की एसेट क्वालिटी पर दबाव बढ़ सकता है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी जनवरी 2021 में चेतावनी दी थी कि सबसे ज्यादा दबाव वाली स्थिति में भारतीय बैंकिंग सिस्टम का बैड लोन दोगुना यानी 14.8 फीसदी के आसपास तक जा सकता है.

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प्राइवेट बैंकों से ज्‍यादा खतरे में हैं सरकारी बैंक
फिच ने कहा है कि सीमित बफर की वजह से सरकारी बैंक (PSBs) कोरोना से जुड़े दबाव का ज्यादा आसान शिकार हो सकते हैं. वहीं, प्राइवेट बैंक (Private Banks) को उतना खतरा नहीं है. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021-22 में सरकारी बैंकों में 5.5 अरब डॉलर डालने का सरकार का फैसला पर्याप्त नहीं है. फिच का अनुमान है कि बैंकिंग सेक्टर को दबाव से उबारने के लिए 15 से 58 अरब डॉलर की पूंजी डालने की जरूरत होगी. साथ ही कहा कि वित्त वर्ष 2021 में सरकारी बैंकों की तुलना में निजी बैंकों में ज्यादा बेहतर ग्रोथ देखने को मिलेगी.
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