कोरोना के चलते NCBF के सामने आगे भी बनी रहेगी नकदी की किल्लत- फिच

कोरोना के चलते NCBF के सामने आगे भी बनी रहेगी नकदी की किल्लत- फिच
एसेट क्वालिटी के जोखिम भी का करना पड़ेगा सामना

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि ये जोखिम कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के कारण उधार लेने वालों की पुनर्भुगतान क्षमताओं के प्रभावित होने के साथ ही लोन अदायगी के स्थगन के प्रभाव को दर्शाते हैं.

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नई दिल्ली. फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने गुरुवार को कहा कि लॉकडाउन की पाबंदियों में राहत से आर्थिक गतिविधियों के जोर पकड़ने के बावजूद गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFC) को निकट अवधि में नकदी और परिसंपत्तियों की गुणवत्ता के जोखिम का सामना करना पड़ेगा. रेटिंग एजेंसी ने कहा कि ये जोखिम कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के कारण उधार लेने वालों की पुनर्भुगतान क्षमताओं के प्रभावित होने के साथ ही लोन अदायगी के स्थगन के प्रभाव को दर्शाते हैं.

फिच ने कहा कि लोन अदायगी के स्थगन, जिसे आरबीआई ने अगस्त तक बढ़ा दिया है. नकदी प्रवाह पर असर उद्योग में एक जैसा नहीं है. यह कुछ एनबीएफआई की नकदी प्रोफाइल को अधिक प्रभावित करता है और आगामी देनदारियों को चुकाने या पुनर्वित्त करने की उनकी क्षमता पर दबाव डालता है. फिच ने अनुमान जताया कि निकट भविष्य में नकदी प्रवाह महामारी से पूर्व के स्तर के मुकाबले कम रहेगी और आर्थिक गतिविधियों के गति पकड़ने के साथ ही इसमें धीमे-धीमे सुधार होगा.

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बैंक समाधान रूपरेखा में संशोधन जमाकर्ताओं का भरोसा बनाये रखने में करेगा मदद
वहीं, मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने कहा कि भारत के बैंक समाधान की रूपरेखा में किया गया संशोधन क्रेडिट के लिहाज से सकारात्मक है, क्योंकि इससे जमाकर्ताओं के विश्वास को बनाये रखने में मदद मिलेगी. सरकार ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1948 में 26 जून को संशोधन किया. इससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को किसी कमजोर बैंक के समाधान के लिये उसके जमाकर्ताओं व ऋणदाताओं पर कोई रोक लगाये बिना, उसकी पूंजी पुनर्गठित कर या किसी अन्य बैंक में उसका विलय कर समाधान निकालने की सहूलियत मिल गयी है.

मूडीज ने एक बयान में कहा, संशोधित समाधान प्रक्रिया क्रेडिट के लिहाज से सकारात्मक है, क्योंकि यह जमाकर्ताओं के विश्वास को बनाये रखने और कमजोर बैंक से जमा राशि को डूबने से बचाने में मदद करेगी.
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