कंज्‍यूमर कमिशन में शिकायत करें तो गांठ बांध लें ये पांच बातें, बता रही हैं रिटायर्ड जज

शिकायतें भेजते वक्त अगर कुछ बेहद जरूरी बातें ध्या न में रखी जाएं तो न्यामय पाने की यह लड़ाई आसानी से जीती जा सकती है. यह कहना है कि कंज्यूरमर फॉरम की रिटायर्ड जज डॉ. प्रेमलता का.

डॉ. प्रेमलता बताती हैं कि कंज्‍यूमर प्रोटेक्‍शन एक्‍ट पूरी तरह‍ उपभोक्‍ताओं के लिए है. अगर आपको वस्‍तुओं या सेवाओं में कमी मिली है तो आप शिकायत कर सकते हैं. इसके लिए बहुत भारी-भरकम सबूतों की भी जरूरत नहीं होती, आप अपनी बातों को जस्टिफाई करते हुए और उपलब्‍ध सबूत या कागजों के आधार पर शिकायत डाल दें.

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नई दिल्‍ली. नया उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम 2019 आने के बाद से उपभोक्‍ता अपने अधिकारों के लिए जागरुक हुए हैं. इतना ही नहीं उत्‍पादकों और कंपनियों की ओर से दी जाने वाली वस्‍तुओं और सेवाओं में कमी होने के बाद कंज्‍यूमर कमिशन में अपनी शिकायतें भेजने की कोशिशें भी लगातार कर रहे हैं. हालांकि शिकायतें भेजते वक्‍त अगर कुछ बेहद जरूरी बातें ध्‍यान में रखी जाएं तो न्‍याय पाने की यह लड़ाई आसानी से जीती जा सकती है. यह कहना है कि कंज्‍यूमर फॉरम की रिटायर्ड जज डॉ. प्रेमलता का.

न्‍यूज18 हिन्‍दी से बातचीत में डॉ. प्रेमलता बताती हैं कि कंज्‍यूमर प्रोटेक्‍शन एक्‍ट पूरी तरह‍ उपभोक्‍ताओं के लिए है. अगर आपको वस्‍तुओं या सेवाओं में कमी मिली है तो आप शिकायत कर सकते हैं. इसके लिए बहुत भारी-भरकम सबूतों की भी जरूरत नहीं होती, आप अपनी बातों को जस्टिफाई करते हुए और उपलब्‍ध सबूत या कागजों के आधार पर शिकायत डाल दें, डॉ. प्रेमलता कहती हैं कि कभी भी शिकायत करते वक्‍त उपभोक्‍ता अगर इन पांच बातों का ध्‍यान रखेंगे तो उनको न्‍याय जरूर मिलेगा.

ये हैं पांच महत्‍वपूर्ण बातें

उपभोक्‍ता अपनी शिकायत में चीटिंग या धोखा शब्‍द का इस्‍तेमाल न करें

डॉ. प्रेमलता कहती हैं कि जब कभी कोई कहता है कि हमारे साथ चीटिंग हो गई या धोखा हो गया तो उपभोक्‍ता आयोग में शिकायत करते वक्‍त इनका इस्‍तेमाल न करें. ये सभी शब्‍द क्रिमिनोलॉजी के हैं जबकि कंज्‍यूमर प्रोटेक्‍शन एक्‍ट सिविल उपचार देता है. इसलिए उन शब्‍दों को शिकायत में रखें जो एक्‍ट में मान्‍य हैं. इसके लिए वस्‍तुओं या सेवाओं में कमी शब्‍द इस्‍तेमाल कर सकते हैं.

अगर नहीं है रसीद तो ऐसे डालें केस...

अगर आपके पास रसीद नहीं है तो आप सोचते हैं कि शिकायत कैसे करें. डॉ. प्रेमलता कहती हैं कि अभी तक देश में रसीद देना अनिवार्य नहीं है लेकिन रसीद लेना आपका हक बनता है. इसलिए आप रसीद जरूर लें लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. बिना रसीद के भी आप शिकायत कर सकते हैं. आप अपने सभी तथ्‍यों के साथ केस डाल दीजिए. अगर आपके पास कोई दूसरा सबूत (Secondery Evidence) है तो वह आप लगा सकते हैं. उदाहरण के लिए आपके पास कोई विजिटिंग कार्ड या स्लिप है जिसपर उन्‍होंने लिखा है कि इतने पैसे ले लिए इतने बाकी हैं. या किसी भी कागज पर उन्‍होंने हिसाब लिखा है, उसे आप लगा सकते हैं. वह कोर्ट में मान्‍य होता है.

अगर दस्‍तावेज नहीं हैं पूरे....

रिटायर्ड जज कहती हैं कि अगर आपके पास शिकायत के लिए पूरे दस्‍तावेज नहीं हैं तब भी शिकायत डाली जा सकती है. मान लीजिए आपने किसी अस्‍पताल से इलाज करवाया लेकिन आपके पास उसके डॉक्‍यूमेंट नहीं हैं. किसी ऑफिस से कोई काम कराया लेकिन उसका कोई लैटर नहीं है लेकिन लैटर जारी किया गया हो. ऐसे में शिकायतकर्ता अपनी पूरी बात सिलसिलेवार लिखकर दे दे. ऐसे में केस शुरू होने पर जब कोर्ट दूसरी पार्टी को बुलाता है तो उससे भी डॉक्‍यूमेंट्स या रिकॉर्ड मांग सकता है. कई केसेज में ऐसा हुआ है.

अगर नहीं मिला है एक्‍सपर्ट ओपिनियन..

किसी किसी मामले में एक्‍सपर्ट ओपिनियन की जरूरत होती है लेकिन आप किसी भी तरह से एक्‍सपर्ट ओपिनियन हासिल नहीं कर पाए हैं तब भी अपनी शिकायत कंज्‍यूमर कोर्ट में दे सकते हैं. मान लीजिए आपकी बाइक खराब हुई और कई दिनों तक सर्विस सेंटर में पड़ी रही लेकिन आप एक्‍सपर्ट ओपिनियन नहीं ले पाए हैं. तो आपके पास जो जॉब कार्ड्स हैं वे आपकी बात की पुष्टि करने के लिए पर्याप्‍त हैं कि आपकी बाइक खराब हुई थी. ऐसी स्थिति में कोर्ट आपके लिए एक्‍सपर्ट ओपिनियन मंगवा सकता है और आपका काम हो सकता है.

अगर दो साल के अंदर नहीं की कोर्ट में शिकायत.

डॉ. प्रेमलता कहती हैं कि कंज्‍यूमर कोर्ट में किसी भी मामले की शिकायत दो साल के अंदर करनी होती है. लेकिन इस समयावधि में शिकायत न करने के बावजूद भी कई मामलों में आप अपनी शिकायत कंज्‍यूमर कोर्ट में दे सकते हैं. मान लीजिए आपने किसी बिल्‍डर से मकान लिया है, जिसे दो साल के अंदर पजेशन देना है लेकिन आपको पजेशन नहीं मिला है तो ऐसी स्थिति में कॉज ऑफ एक्‍शन दो साल के बजाय आगे भी जारी रह सकता है. ऐसे में आपको देखना होगा कि आपकी समस्‍या किस तरह की है.

कभी कभी ऐसा होता है कि दो साल गुजर गए लेकिन आप किन्‍हीं कारणों से शिकायत नहीं दे पाए तो इसके लिए कोर्ट में एक एप्‍लीकेशन देनी होती है कंडोनेशन ऑफ डिले. जिसे कोर्ट कंडोन कर देता है और आपकी शिकायत स्‍वीकार हो जाती है.

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