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FD या RD में किस में करें निवेश! कौन सा है बेस्ट ऑप्शन, समझें यहां

एफडी में इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने के लिए पांच साल की टैक्स सेविंग एफडी का विकल्प होता है. (Image-Reuters)

एफडी में इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने के लिए पांच साल की टैक्स सेविंग एफडी का विकल्प होता है. (Image-Reuters)

एफडी और आरडी को लेकर कंफ्यूजन हो रहा है तो दोनों ही विकल्पों की अच्छी तरह से स्टडी कर लेनी चाहिए. इन पर मिलने वाले रिटर ...अधिक पढ़ें

Investment Tips: वित्त वर्ष बदल गया है, नए साल के लिए इन्वेस्टमेंट प्लानिंग करनी है. या फिर आपने हाल ही में अपने प्रोफेशनल जीवन की शुरूआत की है और निवेश करने के लिए सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं तो आपको लोग सलाह देंगे कि बैंक में आरडी या एफडी खोल लो. निश्चित ही आरडी यानी रिकरिंग डिपॉजिट और एफडी यानी फिक्स्ड डिपॉजिट, दोनों ही सुरक्षित निवेश के अच्छे प्लान हैं. इन्हें आप इमरजेंसी के दौरान भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

अब समस्या यह आती है कि एफडी या आरडी, दोनों में से किसे चुना जाए. एफडी और आरडी को लेकर कंफ्यूजन हो रहा है तो दोनों ही विकल्पों की अच्छी तरह से स्टडी कर लेनी चाहिए. इन पर मिलने वाले रिटर्न की गणना करनी चाहिए और फिर अपनी सुविधा के अनुसार कोई ऑप्शन चुनना चाहिए.

अगर आपके पास एकमुश्त राशि है और कम रिस्क के साथ रिटर्न हासिल करना चाहते हैं तो फिक्स्ड डिपॉजिट अच्छा विकल्प है.

फिक्स्ड डिपॉजिट

सावधि जमा यानी फिक्स्ड डिपोजिट- एफडी बचत का आसान और सुरक्षित तरीका है. इसमें बैंक या किसी फाइनेंस कंपनी में एक निश्चित समय के लिए पैसा लगाया जाता है. बैंक या फाइनेंशियल संस्था इसके बदले हमें एक तय ब्याज देते हैं. जब एफडी की अवधि पूरी हो जाती है, तो हमारी जमा रकम मैच्योर हो जाता है. एफडी में भी दो ऑप्शन होते हैं- संचयी ब्याज (Cumulative) और गैर-संचयी ब्याज (Non-Cumulative). संचयी ब्याज वाली एफडी में आपको मैच्योरिटी पर प्रिंसिपल और कंपाउंडेड ब्याज मिलता है. गैर-संचयी ब्याज वाली एफडी में नियमित अंतराल जैसे मासिक या तिमाही आधार पर ब्याज को निकालते रहने का ऑप्शन होता है. फिक्स्ड डिपोजिट में आप 7 दिन से लेकर 10 साल तक निवेश कर सकते हैं.

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एफडी में इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने के लिए पांच साल की टैक्स सेविंग एफडी का विकल्प होता है.

आरडी के फायदे

रिकरिंग डिपॉजिट एक तय समय के लिए तय ब्याज दर पर मासिक सेविंग प्लान होता है. इसमें भी आरडी की ही तरह मैच्योरिटी पर ब्याज मिलता है. ब्याज की दर पूरे टेन्योर में वही होती है जो आरडी के शुरूआत में होती है. आरडी में आपके बैंक खाते से हर महीने एक निश्चित रकम निकाल ली जाती है. एफडी की तरह इसमें टैक्स सेविंग का कोई ऑप्शन नहीं होता है.

आरडी छोटी-छोटी बचत का सबसे अच्छा ऑप्शन होता है. जिन लोगों के पास निवेश के लिए एकमुश्त रकम नहीं होती, उनके लिए आरडी अच्छा जरिया है. लेकिन एफडी की तुलना में आरडी में कम ब्याज मिलता है.

क्या चुनें

एफडी या आरडी में से जब किसी एक को चुनना हो तो यह देखें कि आपके पास निवेश के लिए कितना पैसा है. अगर आपके पास एक तय समय के लिए बड़ा फंड है, तो आप एफडी को चुन सकते हैं. इसमें आपको अधिक मुनाफा मिल सकता है. अगर आप हर महीने एक निश्चित रकम निवेश करना चाहते हैं, तो आपके लिए आरडी बेहतर विकल्प है.

Tags: Bank interest rate, Fixed deposits, Investment tips, Personal finance

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