कम ब्याज दर के दौर में भी एफडी पर मिलेगा ज्यादा मुनाफा! बस अपनाएं ये खास तरीका

कम ब्याज दर के दौर में भी एफडी पर मिलेगा ज्यादा मुनाफा! बस अपनाएं ये खास तरीका
स्मार्ट तरीके से एफडी में निवेश करना फायदेमंद हो सकता है.

आम लोगों में बचत के लिए सबसे बेहतरीन टूल फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) ही माना जाता है. लेकिन, कम ब्याज दर (FD Rates) के इस दौर में एफडी पर सुरक्षा तो मिलती है लेकिन रिटर्न बेहद कम होता है. ऐसे में एक खास स्ट्रैटेजी से एफडी को अधिक फायदेमंद भी बनाया जा सकता है.

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नई दिल्ली. आमतौर पर भविष्य की बचत के लिए सबसे पॉपुलर टूल फिक्स्ड डिपॉजिट (FD - Fixed Deposit) माना जाता है. फिक्स्ड डिपॉजिट को टर्म डिपॉजिट (Term Deposit) भी कहा जाता है, जिसमें मैच्योरिटी तक एक तय समय के लिए फिक्स्ड दर पर ब्याज मिलता है. एफडी पर लोगों को सबसे ज्यादा भरोसा इसलिए भी है, क्योंकि इसमें जोखिम नहीं होता है. लेकिन, बीते कुछ समय में नीतिगत ब्याज दरों (Policy Rates) में कटौती के बाद एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरें भी कम हो गई है. हाल ही में कई प्रमुख बैंकों ने एफडी दरों को रिवाइज कर घटा दिया है. RBI द्वारा रेपो रेट में कटौती के बाद बैंकों ने एफडी दरें घटाने का फैसला लिया है.

एफडी पर कम ब्याज दर के इस दौर में अब आम लोगों के मन में कुछ संशय भी आ रहा है. जानकारों का कहना है कि छोटे निवेशक अभी भी एफडी में निवेश कर सकते हैं. उनका कहना है कि एफडी पर ब्याज दरें ही नहीं, बल्कि इसमें जोखिम न होना भी इसे खास बनाता है.

इमरजेंसी फंड के तौर पर काम आता है एफडी
उनका कहना है कि छोटे निवेशकों के पास एक इमरजेंसी फंड जरूर होना चाहिए जो उन्हें मौजूदा संकट जैसी परिस्थितियों से उबारने में वित्तीय तौर पर मदद कर सके. ऐसे में उन्हें इमरजेंसी फंड के तौर पर कम से 3 से 6 महीने के खर्च के लिए एक फंड बनाना चाहिए.
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एक एक्सपर्ट का कहना है, 'इमरजेंसी फंड के तौर पर केवल उसी निवेश विकल्प को चुनना चाहिए, जिसमें जोखिम न हो और लिक्विडिटी की सुविधा देता हो.' चूंकि, एफडी एक सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है, इसलिए भविष्य के लिए एफडी में निवेश करना चाहिए. किसी भी अप्रिय स्थिति में एफडी को नकदी में कन्वर्ट किया जा सकता है. हालांकि, एफडी में निवेश करने के कुछ दूसरे पहलू भी हैं.

प्री-मैच्योर विड्रॉल पर पेनाल्टी का डर
मैच्योरिटी से पहले एफडी तुड़वाने पर न केवल पेनाल्टी देनी पड़ती है, बल्कि एफडी पर मिलने वाला रिटर्न भी कम हो जाता है. इस प्रकार एफडी को समय से पहले तोड़ने पर दोहरा झटका लग सकता है. कुछ बैंकों में यह पेनाल्टी 0.50 फीसदी तक हो सकती है, ऐसी स्थिति में बड़ा नुकसान होने का खतरा रहता है. इससे बचने के लिए निवेशकों को एक खास तरीका अपनाना चाहिए . आइए जानते हैं इसके बारे में...

कैसे टलेगा मोटी पेनाल्टी देने का खतरा?
इस तरीके में निवेशक अपनी एफडी की रकम को कुछ हिस्सों में बांट देता है. इससे छोटे काम के लिए भी बड़ी एफडी तोड़ने की जरूरत नहीं होती है और इस प्रकार निवेशक को ज्यादा नुकसान नहीं उठाना पड़ता है. अगर निवेशक को कभी इमरजेंसी की स्थि​ति में नकदी की जरूरत होती है तो वो कम रकम वाली एफडी का प्री-मैच्योर विड्राल करा सकता है.

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उदाहरण के तौर पर देखें तो आपको 5 साल की अवधि के लिए एफडी में 10 लाख रुपये निवेश करना है. इस 10 लाख में से 1 से 5 साल के लिए 2-2 लाख की दो एफडी ​में निवेश किया जा सकता है. जरूरत के हिसाब से कम रकम को इससे भी कम ​अवधि में और ज्यादा रकम को लंबी अवधि की एफडी में निवेश किया जा सकता है.

इस प्रकार निवेशक की एफडी लगभग हर साल मैच्योर होगी, जिससे उन्हें एक लिक्विडिटी बफर का लाभ मिल सकेगा. अगर इमरजेंसी की स्थिति में नकदी की जरूरत पड़ती है तो वो कम रकम वाली एफडी का प्री-मैच्योर विड्रॉल कर सकते हैं. इससे उन्हें बड़ी एफडी पर पेनाल्टी के रूप में होने वाले नुकसान का डर नहीं रहेगा.

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ज्यादा ब्याज कमाने का मौका भी मिलेगा
इसकी एक खास बात है कि लंबी अवधि में इस तरीके से सभी एफडी पर मिलने वाला ब्याज औसत स्तर पर पहुंच जाता है. साथ ही यह भी सुविधा मिलती है कि ब्याज दरें बढ़ने के बाद ज्यादा दर पर एफडी कराने का मौका भी मिल जाता है.
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