महंगी हुई आपके घर पर रोज़ाना इस्तेमाल होने वाली ये चीज़े, देखें पूरी लिस्ट

प्रतीकात्मक
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ई कस्टम ड्यूटी लागू होने के बाद टीवी, फ्रिज, फोन समेत कई घरेलू उपयोग के सामान महंगे हो जाएंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 27, 2018, 2:05 PM IST
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केंद्र सरकार ने जेट ईंधन, एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर सहित कुल 19 वस्तुओं पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा दिया हैं. सरकार ने  गैर जरूरी वस्तुओं का निर्यात घटाने के लिए यह कदम उठाया है, जो बुधवार आधी रात लागू होगा.


वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि बीते वित्त वर्ष में इन उत्पादों का कुल आयात बिल 86,000 करोड़ रुपये रहा था. जिन अन्य वस्तुओं पर  इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाया गया है, उनमें वॉशिंग मशीन, स्पीकर, रेडियल कार टायर, जूलरी, किचन और टेबलवेयर, कुछ प्लास्टिक का सामान तथा सूटकेस शामिल हैं.





मंत्रालय ने कहा, 'केंद्र सरकार ने मूल सीमा शुल्क बढ़ाकर शुल्क उपाय किए हैं. इसके पीछे उद्देश्य कुछ आयातित वस्तुओं का आयात घटाना है. इन बदलावों से चालू खाते के घाटे (कैड) को सीमित रखने में मदद मिलेगी. कुल मिलाकर 19 वस्तुओं पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाया गया है.'



इन उप्तादों पर बढ़ा आयात शुल्क


सरकार ने एसी, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन (10 किलो से कम) पर इम्पोर्ट ड्यूटी दोगुना कर 20 प्रतिशत कर दिया गया है.  इम्पोर्ट ड्यूटी में ये बदलाव 26-27 सितंबर की आधी रात से लागू होंगे.

इसी तरह कम्प्रेसर, स्पीकर और फुटवियर पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर क्रमश: 10, 15 और 25 प्रतिशत किया गया है. रेडियल कार टायर परइम्पोर्ट ड्यूटी 10 से 15 प्रतिशत किया गया है. तराशे और पालिश किए गए, सेमी प्रोसेस्ड और प्रयोगशाला में बनाए गए और रंगीन रत्नों पर इम्पोर्ट ड्यूटी पांच से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत किया गया है.

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इसी तरह जूलरी, सुनार, चांदी बर्तन बनाने वालों के सामान पर इम्पोर्ट ड्यूटी 15 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है. वहीं बाथरूम प्रोडक्ट्स, पैकिंग सामग्री, मेज़ का सामान, रसोई के सामान, ऑफिस स्टेशनरी, सजावट वाली शीट, मनका, चूड़ियां, ट्रंक, सूटकेस और यात्रा बैग पर अब 10 के बजाय 15 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगेगा. इसके अलावा सरकार ने विमान ईंधन (एटीएफ) पर पांच प्रतिशत इम्पोर्ट ड्यूटी लगाने की घोषणा की है. अभी तक इस पर शुल्क नहीं लगता था.

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चालू खाते के घाटे पर अंकुश और पूंजी के बाहर जाने से रोकने के लिए ये उपाय किए गए हैं. विदेशी मुद्रा के अंत: प्रवाह और बाह्य प्रवाह का अंतर कैड कहलाता है. चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में कैड बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2.4 प्रतिशत पर पहुंच गया है. (भाषा इनपुट के साथ)

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