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Air India को उड़ाना टाटा के लिए आसान नहीं, बड़े निवेश के साथ मुश्किल चुनौतियों का करना पड़ेगा सामना

Air India को उड़ाना टाटा के लिए आसान नहीं, बड़े निवेश के साथ मुश्किल चुनौतियों का करना पड़ेगा सामना

एयर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप ने करीब 18 हजार करोड़ रुपये की बोली लगाई थी.

एयर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप ने करीब 18 हजार करोड़ रुपये की बोली लगाई थी.

Tata Group ने एयर इंडिया को खरीद लिया है. हालांकि टाटा के लिए इस सरकारी एयरलाइन कंपनी को उड़ाना आसान नहीं होगा. टाटा संस को बड़े निवेश के साथ ही कई सारी मुश्किल चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.

    नई दिल्ली . टाटा संस ने 2.4 billion डॉलर यानी 18,000 करोड़ रुपए की बोली लगाकर कर्ज में डूबी सरकारी स्वामित्व वाली एयर इंडिया (Air India) को खरीद लिया है. टाटा ने एयर इंडिया को उड़ाने की योजना भी तैयार कर ली है लेकिन टाटा के लिए फिर से ये उड़ान उतनी आसान नहीं होगी. एक तरफ टाटा को एयर इंडिया के कीमती flying rights और landing slots मिलेंगे, जो उसे विदेशी मार्केट शेयर हासिल करने में काफी मददगार होंगे. वहीं दूसरी तरफ एयर इंडिया के साथ ढ़ेर सारी समस्याएं और चुनौतियां भी मुफ्त में मिलेंगी.

    विमानन इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि एयर इंडिया की फिर से सफल हवाई यात्रा एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी. एयरलाइन्स को बेहतर के लिए एक अरब डॉलर यानी 7000 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करना होगा. साथ ही, इसके खराब हो चुके बेड़े, खराब सेवा और एक करिश्माई नेता की कमी सहित असंख्य समस्याओं को ठीक करने की चुनौती होगी.

    बड़ा निवेश, बड़ी चुनौती
    एक रिपोर्ट के मुताबिक दीपम के सचिव तुहिनकांता पांडे ने कहा कि उन्हें एयरलाइन को स्थिर करने के लिए सैकड़ों काम करने होंगे. बहुत सारा पैसा लगाना होगा. अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए कंसल्टेंसी फर्म पीडब्ल्यूसी और लीगल फर्म एजेडबी पार्टनर्स को नियुक्त किया गया है. संचालन के एकीकरण पर कोई निर्णय तुरंत नहीं होने वाला है.

    बिना रुके उड़ान भरने की क्षमता 
    एयर इंडिया को सबसे ज्यादा फायदा अमेरिका और यूरोप जैसी जगहों पर बिना रुके उड़ान भरने की इसकी क्षमता से मिलता है. इन जगहों पर इसे आकर्षक लैंडिंग अधिकार प्राप्त हैं. विदेशी मार्केट में सिर्फ अमीरात और एतिहाद एयरवेज ( Emirates and Etihad Airways) जैसे दिग्गज ही वन-स्टॉप विकल्पों के साथ एयर इंडिया के साथ साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं.

    पुर्जों व इंजन की बड़ी समस्या
    एयर इंडिया के पास 141 विमानों का बेड़ा है, जो संकीर्ण और चौड़े शरीर वाले एयरबस और बोइंग विमानों का मिश्रण है. एयरलाइन ने उनमें से केवल 118 को उड़ान योग्य स्थिति में टाटा को सौंपने पर सहमति व्यक्त की है. एयर इंडिया को भी 787 बेड़े के लिए पुर्जों और इंजनों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. इंजन की अनुपलब्धता के कारण कम से कम पांच 787 बेकार पड़े थे. 2019 में जब एयर इंडिया सभी बोइंग 787 ड्रीमलाइनर्स को तैनात करना चाहती थी, उसने जीई या जेनरल इलेक्ट्रिक से लगभग छह विमान इंजन पट्टे पर लिए थे.

    चौड़े विमान पर ज्यादा निवेश करना होगा 
    टाटा को इसमें चौड़े विमान पर ज्यादा निवेश करना होगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय उड़ान इसी पर निर्भर करेगी. हालांकि समूह ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वह एयर इंडिया को अपनी मौजूदा एयरलाइंस एयर एशिया इंडिया और विस्तारा के साथ कैसे एकीकृत करना चाहता है.

    कोरोना महामारी ने हालत की खराब
    जैसे ही महामारी ने एयरलाइन को अपने बेड़े को बंद करने के लिए मजबूर किया, पट्टे पर दिए गए इंजन वापस कर दिए गए. इंजनों के रखरखाव अनुबंध कठिन होते हैं. टाटा समूह को उन समझौतों को फिर से करना होगा. ऑन-प्वाइंट समाधान प्रत्येक एयरलाइन की परिचालन और वित्तीय आवश्यकता के अनुरूप  सेवा समझौते होते हैं. इसमें ऑन-विंग समर्थन, नए और उपयोग किए जाने योग्य पुर्जे, मरम्मत और टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करना शामिल होता हैं.

    Tata Sons के पास तीन एयरलाइंस
    एअर इंडिया की मालिक बनने के बाद अब Tata Sons के पास 3 एयरलाइंस होंगी. समूह के पास पहले से Vistara और AirAisa में हिस्सेदारी है. इसी के साथ टाटा संस की एविएशन सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी होगी. Air India के साथ Tata Sons को उसकी सब्सिडियरी Air India Express का भी मालिकाना हक मिलेगा. Air India Express सस्ती हवाई सेवाएं देती हैं.

    Tata से जुड़ा है Air India का इतिहास
    Air India की शुरुआत 1932 में टाटा ग्रुप ने ही की थी. जे. आर. डी. टाटा (JRD Tata) जो खुद एक कुशल पायलट थे, उन्होंने Tata Airlines के रूप में इसे शुरू किया था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत से सामान्य हवाई सेवा की शुरुआत हुई और तब Air India को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बना दिया गया. वर्ष 1947 में देश की आज़ादी के बाद एक राष्ट्रीय एयरलाइंस की जरूरत महसूस हुई और भारत सरकार ने Air India में 49% हिस्सेदारी अधिग्रहण कर ली.

    इसके बाद 1953 में भारत सरकार ने एयर कॉरपोरेशन एक्ट पास किया और सरकार ने Tata Group से इस कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी खरीद ली. इस तरह Air India पूरी तरह से एक सरकारी कंपनी बन गई.

    Tags: Air india, Air India employees, Air India Express, Air India Flights, Air India Sale, Ratan tata, Tata

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