बड़ी राहत! विदेशी निवेशकों ने भारत में किया 25 हजार करोड़ का निवेश! जानिए कहां लगा रहे हैं पैसा

News18Hindi
Updated: September 6, 2019, 12:52 PM IST
बड़ी राहत! विदेशी निवेशकों ने भारत में किया 25 हजार करोड़ का निवेश! जानिए कहां लगा रहे हैं पैसा
देश की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को लेकर राहत की खबर आई है.

देश की अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर आई है. मौजूदा वित्त वर्ष (Financial Year) की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून (April June Quarter) के दौरान देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment) 28 प्रतिशत बढ़कर 16.33 अरब डॉलर पर पहुंच गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 6, 2019, 12:52 PM IST
  • Share this:
देश की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को लेकर राहत की खबर आई है. मौजूदा वित्त वर्ष (Financial Year) की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून (April June Quarter) के दौरान  देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment) 28 प्रतिशत बढ़कर 16.33 अरब डॉलर पर पहुंच गया. सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की इसी तिमाही में देश में 2.75 अरब डॉलर का FDI आया था. आपको बता दें कि पहली तिमाही में करीब 25,418 करोड़ रुपये का निवेश भारत में हुआ है.

किस सेक्टर में हुआ सबसे ज्यादा निवेश- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सेवा क्षेत्र में 2.80 अरब डॉलर, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2.24 अरब डॉलर,टेलीकॉम  में 4.22 अरब डॉलर और कारोबार में 1.13 अरब डॉलर का एफडीआई आया.



कौन से देश के लोग लगा रहे है भारत में पैसा- इस दौरान सिंगापुर से सबसे ज्यादा 5.33 अरब डॉलर एफडीआई आया. इसके बाद 4.67 अरब डॉलर के साथ मॉरीशस, 1.45 अरब डॉलर के साथ नीदरलैंड और 47.20 करोड़ डॉलर के साथ जापान का स्थान रहा. सरकार ने हाल ही में कुछ क्षेत्रों में एफडीआई नियमों में ढील दी है.

ये भी पढ़ें-मोदी सरकार फिर ला रही है सस्ते AC की स्कीम, जानिए खरीदने का तरीका

 FDI बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने उठाए कई अहम कदम- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सिंगल ब्रैंड रिटेल सहित कई सेक्टर्स में FDI के नियमों में ढील को मंजूरी दी.

>> केंद्र सरकार ने कोयला खनन गतिविधियों तथा कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग (किसी कंपनी द्वारा किसी अन्य कंपनी के लिए उसके ब्रैंड या लेवल के तहत माल का उत्पादन करना) में 100% एफडीआई को भी मंजूरी प्रदान की.
Loading...



>> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया कैंपेन को बढ़ावा देने के प्रयास के तहत कैबिनेट ने डिजिटल मीडिया प्लैटफॉर्म में 26% एफडीआई को मंजूरी दी. यह देश में पहले केवल प्रिंट मीडिया के लिए था.

आइए जानें FDI से जुड़ी सभी जरूरी बातें...

एफडीआई क्या होता है- भारत से बाहर रहने वाला कोई व्यक्ति या कंपनी जब एक किसी भारतीय कंपनी में पैसा लगाती है तो उसे विदेशी निवेश कहते हैं. विदेशी निवेशक उस कंपनी के शेयर खरीद सकता है, बांड खरीद सकता है या खुद नया कारखाना लगा सकता है. लेकिन यह पूंजी निवेश 'रिपार्टिएबल बेसिस' पर होता है. इसका मतलब यह है कि विदेशी निवेशक ने यहां जो भी पूंजी निवेश किया है, उसे वह निकालकर स्वदेश वापस ले जा सकता है.

>> विदेशी निवेशक हमारे देश में दो प्रकार से निवेश कर सकते हैं- विदेशी प्रत्यक्ष निवेश ((Foreign Direct Investment) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI). FDI के तहत किसी भी दूसरे देश की परियोजना या कंपनी में किया जाने वाला निवेश FDI है.



>> दरअसल यह सीधा निवेश होता है और आम तौर पर लॉन्ग टर्म के लिए होता है. विदेशी कंपनी इसके जरिए मेजबान देश की कंपनी के प्रबंधन में अहम हिस्सेदारी खरीदकर अपनी उपस्थिति दर्ज करती है. भारतीय कंपनी में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी होती है.

FDI दो तरीके का होता है- ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दो तरीके का FDI होता है. जब एक विदेशी कंपनी भारत में निवेश कर अपना नया कारखाना स्थापित करती है, कोई डिस्ट्रीब्यूशन फैसेलिटी बनाती है, नया स्टोर शुरु करती है तो उसे 'ग्रीनफील्ड' FDI कहते हैं.

लेकिन जब विदेशी कंपनी भारत में नया कारखाना लगाने के बजाय पहले से ही चल रहे कारखाने या ब्रांड में हिस्सेदारी खरीदकर या अधिग्रहण कर उसके प्रबंधन पर अपना नियंत्रण हासिल कर लेती है तो उसे 'ब्राउनफील्ड' एफडीआइ कहते हैं.

दो तरीके से कर सकते हैं भारत में निवेश- ऑटोमेटिक रूट और गर्वंमेंट रूट. ऑटोमेटिक रूट के तहत विदेशी निवेशकों को निवेश करने के लिए भारत सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति नहीं होती है.

ये भी पढ़ें: IRCTC से ऑनलाइन टिकट बुक करना हुआ महंगा, ऐसे मिलेगी 50% बुकिंग चार्ज से मुक्ति

>> ऑटोमेटिक रूट से सिर्फ उन्हीं क्षेत्रों और गतिविधियों में विदेशी निवेश किया जा सकता है जिनका स्पष्ट उल्लेख विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) के नियमों के तहत किया गया है.

>> दूसरी ओर जो क्षेत्र ऑटोमेटिक रूट के दायरे में नहीं आते, उनमें निवेश के लिए सरकार की अनुमति आवश्यक होती है, इसलिए इस व्यवस्था को गर्वंमेंट रूट के तौर पर जाना जाता है.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मनी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 6, 2019, 12:45 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...