विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को नहीं देना होगा 2 फीसदी डिजिटल टैक्‍स, जानें क्‍या है इसके लिए बड़ी शर्त

केंद्र सरकार ने विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों से सशर्त डिजिटल टैक्‍स नहीं लेने का फैसला किया है.

केंद्र सरकार ने विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों से सशर्त डिजिटल टैक्‍स नहीं लेने का फैसला किया है.

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने कहा कि डिजिटल टैक्‍स (Digital Tax) भारत में टैक्‍स का भुगतान करने वाले भारतीय व्यवसायों के बीच बराबरी के मुकाबले के लिए लगाया गया है. यह उन विदेशी कंपनियों (Foreign Companies) के लिए है, जो भारत में व्यापार करती हैं, लेकिन यहां किसी तरह का इनकम टैक्‍स नहीं देती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 9:50 PM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार ने विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों (Foreign E-Commerce Firms) की भारतीय शाखा के जरिये बेची गईं वस्तुओं और सेवाओं पर डिजिटल टैक्‍स (Digital Tax) छोड़ने का फैसला किया है. केंद्र सरकार का मानना है कि ऐसा करने से विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को भी भारतीय बाजार में बराबरी का मौका मिल सकेगा. केंद्र ने वित्त विधेयक 2021 में संशोधन करके यह स्पष्ट किया है कि विदेशी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को 2 फीसदी डिजिटल टैक्‍स का भुगतान नहीं करना पड़ेगा. हालांकि, इसके लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी शर्त भी रखी है.

केंद्र सरकार ने विदेशी कंपनियों से डिजिटल छोड़ने की रखीं हैं ये  शर्त

केंद्र सरकार ने डिजिटल टैक्‍स माफ करने के लिए शर्त रखी है कि विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को स्थायी तौर पर यहां कारोबार करना होगा या वे भारत सरकार को आयकर दें. साथ ही स्‍पष्‍ट किया है कि जो विदेशी कंपनी किसी तरह का टैक्‍स नहीं देती हैं, उन्हें 2 फीसदी डिजिटल टैक्‍स का भुगतान करना ही होगा. बता दें कि डिजिटल टैक्‍स की शुरुआत अप्रैल 2020 में की गई थी. यह केवल ऐसी विदेशी कंपनियों पर लागू है, जिनकी वार्षिक आय 2 करोड़ रुपये से ज्‍यादा है और भारतीय उपभोक्ताओं को वस्तुओं व सेवाओं की ऑनलाइन बिक्री करती हैं.

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'डिजिटल लेनदेन को कमजोर करने के लिए कुछ नहीं किया जाएगा'

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में वित्त विधेयक 2021 पर बहस का जवाब देते हुए कहा कि यह उपकर उन वस्तुओं पर लागू नहीं होता है, जो भारतीयों के पास हैं. उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल लेनदेन के पक्ष में है और इसे कमजोर करने के लिए कभी कुछ भी नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह उपकर भारत में टैक्‍स का भुगतान करने वाले भारतीय व्यवसायों के बीच बराबरी के मुकाबले के लिए लगाया गया है. यह उन विदेशी कंपनियों के लिए है, जो भारत में व्यापार करती हैं, लेकिन यहां किसी तरह का इनकम टैक्‍स नहीं देती हैं.
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