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विदेशी निवेशकों ने जुलाई की शुरुआत भी बेचने से की, भारतीय बाजार से 811 करोड़ रु. निकाले

विदेशी निवेशकों ने जुलाई की शुरुआत भी बेचने से की, भारतीय बाजार से 811 करोड़ रु. निकाले

अक्टूबर 2021 से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से अपना पैसा निकाल रहे हैं.

अक्टूबर 2021 से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से अपना पैसा निकाल रहे हैं.

जियो पॉलिटिकल टेंशन, कच्चे तेल की ऊंची कीमत, महंगाई, महामारी और आक्रामक मौद्रिक नीति के सख्त होने के बीच वैश्विक स्तर पर बाजार में भारी गिरावट रही. इस वजह से संभावित मंदी की आशंका के रूप में निवेशकों की भावनाओं में कमी आई है. आर्थिक विकास में मंदी के दौर की आशंकाओं के बीच विदेशी निवेशकों ने खूब बिकवाली की है.

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मुंबई. आठ महीने पहले विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली का शुरू सिलसिला आज तक जारी है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जुलाई की शुरुआत भी बेचने से की है. महीने के पहले दिन एफपीआई ने भारतीय बाजार से कुल मिलाकर 811 करोड़ रुपए निकाले. एफपीआई ने इस पूरे वर्ष में अब तक भारतीय पूंजी बाजारों पर बिकवाली का ही रुझान रखा है.

एनएसडीएल (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने 1 जुलाई, 2022 को इक्विटी और डेट-वीआरआर बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली के साथ 811 करोड़ रुपये निकाले.

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हाइब्रिड बाजार में निवेश किया
कुल मिलाकर, एफपीआई की निकासी इक्विटी बाजार में ₹ 261 करोड़ थी, जबकि ऋण-वीआरआर बाजार में बिकवाली ₹ 372 करोड़ थी. इस बीच, ऋण बाजार ने भी ₹186 करोड़ की निकासी दर्ज की. हालांकि, हाइब्रिड बाजार में ऐसा नहीं था क्योंकि एफपीआई ने शुक्रवार को इस बास्केट में 8 करोड़ रुपये का निवेश किया था.

मंदी की आशंका ने डराया
जियो पॉलिटिकल टेंशन, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, महंगाई, महामारी और आक्रामक मौद्रिक नीति के सख्त होने के बीच वैश्विक स्तर पर बाजार में भारी गिरावट रही. इस वजह से संभावित मंदी की आशंका के रूप में निवेशकों की भावनाओं में कमी आई है. आर्थिक विकास में मंदी के दौर की आशंकाओं के बीच विदेशी निवेशकों ने खूब बिकवाली की है.

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जून में सबसे ज्यादा बिकवाली
घरेलू मोर्चे पर जून में विदेशी निवेशकों की निकासी के मामले में सबसे ज्यादा पैसा बाजार से बाहर गया. जून में एफपीआई ने भारतीय बाजारों से 51,422 करोड़ रुपए निकाले, ये अब तक की सबसे ज्यादा बिकवाली रही. अप्रैल और मई में निकासी लगभग ₹36,518 करोड़ और ₹22,688 करोड़ थी.

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ वीके विजयकुमार ने कहा, “एफपीआई भारत जैसे बढ़ते चालू खाता घाटे (सीएडी) वाले देशों में अधिक बेच रहे हैं क्योंकि ऐसे देशों की मुद्राएं अधिक गिरावट की चपेट में हैं. हालांकि यहां अब बिकवाली का फ्लो कम होता दिख सकता है.

गिरावट कब रूकेगी
विजयकुमार ने कहा कि अगर जुलाई में बाजार में पहली तिमाही के अच्छे नतीजों की उम्मीद या प्रतिक्रिया होती है, तो एफपीआई फिर से बेच सकते हैं. यह बिकवाली तभी रुकेगी जब डॉलर स्थिर होगा और यूएस बॉन्ड यील्ड में गिरावट आएगी.

Tags: FPI, Market, Share market, Stock Markets

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