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विदेशी निवेशक झोला भर-भर के बेच रहें हैं शेयर, FY22 में 2.22 लाख करोड़ के शेयर की बिकवाली

विदेशी निवेशक झोला भर-भर के बेच रहें हैं शेयर, FY22 में 2.22 लाख करोड़ के शेयर की बिकवाली

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मार्च 2022 को खत्म हुए साल में अब तक FIIs ने 29 अरब डॉलर (2.22 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा के शेयर बेचे हैं. इनमें से 80 प्रतिशत सिर्फ पिछले पांच महीनों में बेचे हैं. जनवरी 2021 से 32 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ अक्टूबर 2021 में निफ्टी का 18,604 के रिकॉर्ड उच्च स्तर की जाने बाद हाई वैल्यूएशन एक कारण रहा.

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मुंबई . विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors (FII) ने पिछले लगभग 5 महीने से झोला झोला भर भर के शेयर बेच रहे हैं. मार्च 2022 को खत्म हुए साल में अब तक FIIs ने 29 अरब डॉलर (2.22 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा के शेयर बेचे हैं. इनमें से 80 प्रतिशत सिर्फ पिछले पांच महीनों में बेचे हैं. हालांकि रिटेल निवेशकों सहित घरेलू संस्थागत निवेशकों (Domestic Institutional Investors) ने हर गिरावट में खरीदारी की है. लेकिन उनकी खरीदारी इतनी ज्यादा है कि वे FII flow को मैच नहीं कर सके हैं.

सवाल ये है कि विदेशी निवेशक इतना क्यों बेच रहे हैं. जनवरी 2021 से 32 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ अक्टूबर 2021 में निफ्टी का 18,604 के रिकॉर्ड उच्च स्तर की जाने बाद हाई वैल्यूएशन एक कारण रहा. इसके अलावा बढ़ी हुई मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) द्वारा दरों में अधिक बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदें FII द्वारा पैसे निकालने के प्रमुख कारण हैं. विश्व स्तर पर विश्लेषकों को 2022 में फेड द्वारा 5-7 नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद है.

युद्ध के संकट ने बिकवाली को और बढ़ाया 
अब यूक्रेन और रूस के बीच भू-राजनीतिक तनाव ने भारत से एफआईआई के पैसे निकालने को और गति दी है. रूस ने गुरुवार सुबह से यूक्रेन पर आक्रमण शुरू कर दिया, मास्को सेना और वाहनों ने क्रीमिया होते हुए यूक्रेन में प्रवेश किया. बाद में पश्चिमी देशों ने रूस पर अपनी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए गंभीर प्रतिबंध लगाए.

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इस वजह से इक्विटी बाजार में रिकॉर्ड ऊंचाई से लगभग 13 प्रतिशत करेक्शन हुआ और कई शेयरों ने अपने ऑलटाइम हाई लेवल से काफी नीचे कारोबार किया.

बिकवाली के दबाव से राहत कब तक 
Fisdom Stock Broking के सीईओ राकेश सिंह कहते हैं, “फॉरेन कैपिटल में प्रतिकूल मैक्रोइकॉनॉमिक और भू-राजनीतिक घटनाओं में पैसा लगाने की बजाय तेजी से निकालने की प्रवृत्ति होती है. रूस-यूक्रेन गतिरोध से विदेशी पूंजी के के और तेजी से बाहर निकलने की उम्मीद की जा सकती है.”

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राकेश सिंह के अनुसार, जैसे-जैसे स्थितियों का खराब होना कम होगा, विदेशी पूंजी के अच्छे माहौल में भारतीय बाजारों में वापस आने की उम्मीद की जा सकती है. Macquarie Securities India के आदित्य सुरेश ने गुरुवार को CNBC-TV18 को बताया कि एफआईआई से चल रहे बिकवाली के दबाव से राहत जल्द ही नहीं मिल सकती है क्योंकि देश वैल्यूएशन ढलान पर है.

वैल्यूएशन बहुत अधिक
सुरेश ने आगे कहा, “भारत में अब कोई बड़ी खरीदारी नहीं हो रही है क्योंकि कमाई का जोखिम बहुत अधिक है और वैल्यूएशन बहुत अधिक है.” ज्यादातर विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले साल निफ्टी की कमाई करीब 20 प्रतिशत और चालू वित्त वर्ष में 25-30 प्रतिशत बढ़ेगी.

Tags: Foreign investment, FPI, Mutual fund investors, Share market, Stock Markets, Stock return

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