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झटका : विदेशी निवेशकों का टूटा भरोसा, भारतीय बाजार से की रिकॉर्ड 79,000 करोड़ की निकासी

खास बात है कि एफपीआई ने महज 10 कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार से 20000 करोड़ रुपये की निकासी की है.

खास बात है कि एफपीआई ने महज 10 कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार से 20000 करोड़ रुपये की निकासी की है.

FPI Pull Out Rs. 79000 Crore : डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने चालू वित्त वर्ष में भारतीय शेयर बाजार में रिकॉर्ड बिकवाली (Historic Pull Out) की है. बैंकिंग सेक्टर से 49718 करोड़ और अन्य फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर से 29310 रुपये की निकासी की है.

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नई दिल्ली. रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दुनियाभर के वित्तीय बाजारों में जारी अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) से भरोसा टूटने लगा है. इस कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) घरेलू बाजार (Domestic Market) से लगातार निकासी कर रहे हैं. इसका खामियाजा बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है.

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने चालू वित्त वर्ष में भारतीय शेयर बाजार में रिकॉर्ड बिकवाली (Historic Pull Out) की है. एफपीआई ने फाइनेंशियल सेक्टर के इक्विटी (Financial Sector Equity) से 79000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी की है. निकासी का यह आंकड़ा एक अप्रैल 2021 से लेकर 15 मार्च 2022 तक का है. इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कुल 79028 करोड़ रुपये की बिकवाली की है.

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बैंकिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली
डिपॉजिटरी के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सबसे अधिक बैंकिंग सेक्टर से 49718 करोड़ रुपये की निकासी है. इसके अलावा, अन्य फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में 29310 करोड़ रुपये की बिकवाली की है. खास बात है कि एफपीआई ने महज 10 कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार से 20000 करोड़ रुपये की निकासी की है.

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उच्च मूल्यांकन ने खराब किया खेल
वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में इक्विटी स्ट्रैटजिस्ट क्रांति बथिनी का कहना है कि बैंकिंग और फाइनेंशियल सेवा क्षेत्र से बड़े पैमाने पर निकासी की मुख्य वजह भारत में एफपीआई एसेट्स का पोर्टफोलियो निर्माण और क्षेत्र में शेयरों का उच्च मूल्यांकन है.

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प्राइवेट बैंकों पर सबसे ज्यादा असर
एफपीआई ने ऐतिहासिक रूप से बैंकिंग सेक्टर से निकासी की है. इसमें भी प्राइवेट सेक्टर के एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा से सबसे ज्यादा निकासी हुई है. ऐसा सिर्फ भारत में नहीं बल्कि सभी उभरते बाजारों से एफपीआई ने निकासी की है. 15 मार्च 2022 तक फाइनेंशियल सेक्टर इक्विटी के 35 क्षेत्रों में एफपीआई की हिस्सेदारी 29.25 फीसदी यानी 13.02 लाख करोड़ रुपये थी.

इन वजहों से हो रही बिकवाली
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजित मिश्रा का कहना है कि वैश्विक बाजारों में बढ़ती ब्याज दरें, भारतीय शेयरों का उच्च मूल्यांकन, पिछले दो साल की तेजी के बाद मुनाफावसूली और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे हाल के भू-राजनीतिक कारणों से एफपीआई भारतीय बाजार से निकासी कर रहे हैं. हालांकि, विदेशी निवेशकों ने शुरुआती छह महीने में 8531 करोड़ रुपये का निवेश किया था. अक्टूबर 2021 के बाद से वे शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं और 15 मार्च 2022 तक घरेलू बाजार से 1.49 लाख करोड़ की निकासी कर चुके हैं.

Tags: FPI, Russia ukraine war, Stock market

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