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भारत की अर्थव्यवस्था ‘ICU’ में, मौजूदा आर्थिक सुस्ती साधारण नहीं: अरविंद सुब्रमण्यन

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Updated: December 18, 2019, 7:45 PM IST
भारत की अर्थव्यवस्था ‘ICU’ में, मौजूदा आर्थिक सुस्ती साधारण नहीं: अरविंद सुब्रमण्यन
आपको बता दें कि अरविंद सुब्रमण्यन, नरेंद्र मोदी सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) रहे हैं.

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं हाजिर की है. उन्होंने कहा कि भारत ‘गहरी आर्थिक सुस्ती’ में है. बैंकों और कंपनियों की टूइन बैलेंसशीट क्राइसिस के कारण अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है.

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  • Last Updated: December 18, 2019, 7:45 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं हाजिर की है. उन्होंने कहा कि भारत ‘गहरी आर्थिक सुस्ती’ में है. बैंकों और कंपनियों की टूइन बैलेंसशीट क्राइसिस के कारण अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है. आपको बता दें कि अरविंद सुब्रमण्यन,  नरेंद्र मोदी सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) रहे हैं. उन्होंने पिछले साल अगस्त में इस्तीफा दिया था.

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर जताई चिंता- सुब्रमण्यन ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) के भारत कार्यालय के पूर्व प्रमुख जोश फेलमैन के साथ लिखे गए नए रिसर्च पेपर में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय बैंक, इंफ्रास्ट्रक्चर, एनबीएफसी और रियल एस्टेट जैसे 4 क्षेत्रों की कंपनियों के लेखा-जोखा के संकट का सामना कर रहा है.

>> हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय विकास केंद्र के लिए तैयार तकनीकी पेपर के ड्राफ्ट में सुब्रमणियन ने लिखा कि निश्चित रूप से यह साधारण सुस्ती नहीं है. भारत में गहरी आर्थिक सुस्ती है और अर्थव्यवस्था ऐसा लगता है कि आईसीयू में जा रही है.

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>> सुब्रमण्यन ने दिसंबर, 2014 में टूइन बैलेंस शीट समस्या के प्रति आगाह किया था. उस समय वह नरेंद्र मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार थे. उन्होंने तब कहा था कि निजी कंपनियों पर बढ़ता कर्ज बैंकों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है.

अपने रिसर्च पेपर में सुब्रमण्यन ने दो भागों टीबीएस और टीबीएस-2 में बांटा है. टीबीएस-1 इस्पात, बिजली और बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कंपनियों को दिए गए बैंक कर्ज के बारे में है.

यह कर्ज निवेश में जोरदार तेजी के दौरान 2004-11 के दौरान दिया गया, जो बाद में एनपीए बन गया. टीबीएस-2 नोटंबदी के बाद की स्थिति के बारे में है. इसमें गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और रियल एस्टेट कंपनियों के बारे में है.

सुब्रमण्यन के अनुसार वैश्विक वित्तीय संकट से भारत की आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार सुस्त पड़ी है. अर्थव्यवस्था की वृद्धि में योगदान देने वाले दो इंजन निवेश और निर्यात प्रभावित हुए.

एक और इंजन कंजम्पशन भी बंद हो गया है. इस वजह से पिछली कुछ तिमाहियों से वृद्धि दर नीचे आ गई है. चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर छह साल के निचले स्तर 4.5 फीसदी पर आ गई है. यह लगातार छठीं छमाही है जबकि वृद्धि दर में गिरावट आई.

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First published: December 18, 2019, 7:37 PM IST
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