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2000 रुपये के नोटों की जमाखोरी की जा रही है, इसे चलन से बाहर कर देना चाहिए: पूर्व सचिव एससी गर्ग

पीटीआई
Updated: November 8, 2019, 1:28 PM IST
2000 रुपये के नोटों की जमाखोरी की जा रही है, इसे चलन से बाहर कर देना चाहिए: पूर्व सचिव एससी गर्ग
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने 2000 रुपये के नोट के अलावा कई अहम सुझाव दिए है.

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग (Former Economic Affairs Secretary SC Garg) ने कहा है कि दो हजार (2000 रुपये का नोट) के नोट आसानी से बाजार से हटाए जा सकते हैं. उन्होंने दावा किया कि लोगों ने दो हजार के नोट जमा कर लिए हैं, जिसकी वजह से अब ये ज्यादा चलन में नहीं हैं.

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नई दिल्ली. भारत सरकार के आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव एससी गर्ग (Former Economic Affairs Secretary Subhash Chandra Garg) ने कहा है कि दो हजार (2000 रुपये का नोट) के नोट आसानी (Note Ban) से बाजार से हटाए जा सकते हैं. उन्होंने दावा किया कि लोगों ने दो हजार के नोट जमा कर लिए हैं, जिसकी वजह से अब ये ज्यादा चलन में नहीं हैं. पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने सरकारी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण खत्म करने और निजीकरण को बढ़ावा देने के अलावा 2000 रुपये के नोट को प्रचलन से बाहर करने वाले कुछ सुझाव दिए हैं. आपको बता दें कि एस सी गर्ग 31 अक्टूबर 2019 को वीआरएस ले चुके है. 1983 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस गर्ग ने 2017 में आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव के तौर पर कार्यभार संभाला था. वह दिसंबर, 2018 में वित्त सचिव बन गए थे. गर्ग ने वित्त सचिव का पद छोड़ने से पहले 100 प्रमुख नीतियों और शासन तथा अर्थव्यवस्था में सुधार संबंधी सुझावों से जुड़े नोट की एक कॉपी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को दी है.

मोदी सरकार ने आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी का फैसला करते हुए 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोट को चलन से बाहर करने का फैसला किया था. वहीं, 500 और 2000 हजार रुपये के नए नोट को जारी करने का फैसला किया था.

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग


एससी गर्ग ने दिए अहम सुझाव

(1) 2000 रुपये के नोट- पूर्व सचिव गर्ग ने अपने सुझाव में कहा है कि 2000 रुपये का एक बड़ा हिस्सा प्रचलन में नहीं है. इन्हें रोका गया है. ट्रांजेक्शन के रूप में फिलहाल 2000 रुपये के नोटों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है. बिना किसी बाधा को उत्पन्न किए, इसे तुरंत प्रचलन से बाहर किया जा सकता है.

(2) भारत के राजकोषीय घाटे पर- उन्होंने अपने सुझाव में कहा है कि भारत के राजकोषीय प्रबंधन सिस्टम (Fiscal Management) में “उन प्रथाओं का इस्तेमाल हो रहा है जो अच्छी और स्थिर नहीं है. इसीलिए घाटे का स्तर बना रहता है.

(3) क्रेडिट रेटिंग पर- गर्ग ने कहा कि ज्यादा कर्ज का स्तर भारत की क्रेडिट रेटिंग के लिए बड़ी समस्या है. देश की आमदनी का एक बड़ा हिस्सा इन कर्जों को चुकाने में खर्च होता है. इसीलिए इसमें बदलाव की जरूरत है.
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(4) गर्ग ने एक भूमि प्रबंधन निगम (Land Management Corporation) बनाने का सुझाव दिया, जो कि एक प्रकार से बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त वेल्थ फंड होगा. उन्होंने बताया कि घाटे में चल रही सार्वजनिक उपक्रमों की सभी भूमि और भवनों को इस निगम को हस्तांतरित किया जाना चाहिए.

(5) इसके अलावा गर्ग ने ऑफ बजट उधार, खाद्य एवं उर्वरक सब्सिडी के भुगतान आदि को खत्म करने की सिफारिश की है.

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First published: November 8, 2019, 1:04 PM IST
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