JNU मामले पर दीपिका पादुकोण को लेकर पूर्व RBI गवर्नर ने कही बड़ी बात

दीपिका पादुकोण और रघुराम राजन

दीपिका पादुकोण और रघुराम राजन

पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने लिंक्डइन पर अपने एक पोस्ट में JNU हिंसा मामले को लेकर चिंता जाहिर की है. इस लेख में उन्होंने दीपिका पादुकोण, अशोक लवासा से लेकर नौकरशाह और पत्रकारों का जिक्र किया है.

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नई दिल्ली. हाल ही में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में हो रहे विरोध प्रदर्शन में बॉलीवुड अदाकारा दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) ने मौन प्रदर्शन किया था. इसके बाद ट्वीटर से लेकर अन्य सोशल मीडिया पर दीपिका काफी चर्चा में रहीं. कुछ लोगों ने उनकी फिल्म 'छपाक' को बॉयकॉट करने की बात कही तो वहीं कुछ लोगों ने उनके इस प्रदर्शन की सराहना की. इस सिलसिले में भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के पूर्व गवर्नर ने भी शुक्रवार को दीपिका की सराहना करते हुए कहा कि JNU में उनके द्वारा किया गया शांतिपूर्वक विरोध यह दर्शाता है कि कुछ लोगों के लिए सच्चाई, आजादी और न्याय केवल बुलंद शब्द ही नहीं है, बल्कि इसके ​लिए वो त्याग भी कर सकते हैं.

अशोक लवासा को लेकर भी कही ये बात

रघुराम राजन ने लिंक्डइन पर अपने एक पोस्ट में लिखा कि उदाहरण के तौर पर देखें तो चुनाव आयुक्त अशोक लवासा (Election Commissioner Ashok Lavasa) भी अपने परिवार पर हुए प्रताड़ना को झेलते हुए अपने दायित्व का निर्वहन निष्पक्षता से किया. राजन ने अपने इस लेख में लिखा कि जेएनयू में नकाबपोश गैंग द्वारा इस तरह का हमला करना​ चिंताजनक है. दीपिका पादुकोण का नाम लिए बिना ही उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपनी फिल्म को लेकर जोखिम उठाया. यह हम सब के लिए प्रेरणास्त्रोत है.

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प्रदशर्न करने वाले युवाओं की तारीफ की

इस प्रदर्शन में हमें यह देखने को मिला कि कैसे युवा हिंदु-मुस्लिम की परवाह किए बिना ही एक दूसरे के कंधे से कंधे मिलाकर तिरंगे के पीछे चल रहे हैं. इन युवाओं ने मौजूदा राजनीतिक लाभ के लिए बनाए गए कृत्रिम बंटवारे को नकार दिया है. इन युवाओं ने दर्शाया है कि हमारे संविधान का उत्साह अभी भी उज्ज्वल है.

लवासा को लेकर उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयुक्त अपने परिवार पर होने वाले प्रताड़ना की परवाह किए बिना ही अपना काम करता है तो यह प्रतीत होता है कि ईमानदारी अभी भी बची हुई है. बता दें कि जब बीजेपी दोबारा सत्ता में आई थी, तब लवासा के परिवार के 5 सदस्यों के खिलाफ जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी.



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नौकरशाहों और पत्रकारों की भी सराहना की

अपने इस लेख में राजन ने कुछ नौकरशाहों द्वारा दिए गए इस्तीफे और कुछ पत्रकारों द्वारा सच्चाई निकालने के लिए लगातार किए जा रहे मेहनत की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में काम कर रहे अधिकारियों को अपनी ड्रीम जॉब इसलिए छोड़नी पड़ रही है, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे अपने काम के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं. वहीं, कुछ पत्रकार भी सरकार के दबाव में होने के बाद भी सच्चाई खोद निकालने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.

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