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मलविंदर-शिविंदर की फैमिली से करोड़ों की ठगी, आप भी रहें सावधान!

मलविंदर और शिविंदर सिंह को जेल से निकालने की कोशिश में फैमिली को लगी करोड़ों की चपत.

मलविंदर और शिविंदर सिंह को जेल से निकालने की कोशिश में फैमिली को लगी करोड़ों की चपत.

मलविंदर (Malvinder) और शिविंदर (Shivinder) सिंह को जेल से निकालने की कोशिश में उनकी पत्नियों अदिति और जापना सिंह के साथ ...अधिक पढ़ें

    नई दिल्ली. ठगी सिर्फ ऑनलाइन ही नहीं होती, बल्कि ऑफलाइन भी मौका मिलते ही ठग लोगों की जेब साफ करने में देर नहीं लगाते. ताजा मामला जुड़ा है रेलिगेयर के पूर्व प्रमोटर मलविंदर और शिविंदर सिंह से. खबर है कि इन दोनों की पत्नियों को ठगों ने करोड़ों रुपए की चपत लगाई है. अब आप सोच सकते हैं जब करोड़पतियों को भी ठग लिया जाता है तो आप और हम हैं ही क्या! ऐसे में सबसे जरूरी है सावधान रहना. तमाम तरह की धोखाधड़ी और जालसाजी से आपको सावधान करने के लिए News18Hindi ने एक सीरीज चलाई है, जिसमें फ्रॉड के हर केस के बारे में विस्तार से बताया जाता है.

    दिया था जेल से छुड़वाने के लालच

    रेलिगेयर के पूर्व प्रमोटर मलविंदर और शिविंदर सिंह फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन दोनों की पत्नियां अदिति और जापना सिंह को जून 2020 में फोन के जरिए ठगों ने संपर्क किया. फोन करने वाले ने खुद को कानून मंत्रालय (लॉ मिनिस्टरी) का बड़ा अधिकारी बताया. और साथ ही कहा कि वह मलविंदर और शिविंदर को जेल से बाहर निकालने में उनकी मदद कर सकता है.

    इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक खबर के मुताबित, फिलहाल अदिती और जापना सिंह ने आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दर्ज करवाई है. अदिती सिंह की शिकायत के बाद पुलिस तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तार किए गए लोगों में कनॉट प्लेस दिल्ली स्थित RBL Bank की मैनेजर कोमल पोद्दार और उसके दो सहयोगी अविनाश कुमार और जितेंद्र नरूला शामिल हैं.

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    मीडिया में आईं रिपोर्टस के आधार पर जापना सिंह के आरोप काफी गंभीर हैं. उनका कहना है कि वे इस काम के लिए सरकारी अधिकारियों को करोड़ों रुपये दे चुकी हैं. जापना 28, 29, 30 जुलाई और 6 अगस्त को हॉन्गकॉन्ग के एक बैंक अकाउंट में 3.5 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर चुकी हैं. जापना ने इस ट्रांजेक्शन के सबूत भी दिखाए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सुकेश चंद्रशेखर इस केस का मास्टरमांइड है और उसने दोनों (अदिति और जापना) से 200 रुपये रुपये ऐंठ लिए हैं.

    यूं चुना जाता है ‘सॉफ्ट टारगेट’

    इन दिनों ठगी के नए से नए तरीके इजाद किए जा रहे हैं. ऑनलाइन से लेकर ऑफलाइन तक. ऑनलाइन ठगी हजारों या फिर कुछ लाख रुपये तक सीमित है, मगर करोड़ों की ठगी के लिए ऐसे लोगों को चुना जाता है, जिनके हालात ऐसे होते हैं कि वे आसानी से टारगेट बन जाएं.

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    यदि हम इसी केस पर नज़र डालें तो समझ में आता है कि अदिति और जापना को जानबूझकर टारगेट किया गया. ठगों ने दोनों को कानून के दायरे से हटकर मदद की पेशकश की, जोकि संभव नहीं है. अदिति और जापना को हर तरीके से भरोसे में लिया गया होगा कि उनके पति 100% जेल से बाहर आ जाएंगे, तभी तो 200 करोड़ रुपये लिए-दिए गए होंगे.

    आपको रहना चाहिए सावधान

    ऐसी ही किसी स्थिति में यदि आप या आपका कोई करीबी है तो आपको ठगों से विशेष तौर पर सावधान रहना चाहिए. कोई भी व्यक्ति खुद को सरकारी ओहदेदार बताकर आपको कानून के दायरे से बाहर जाकर मदद करने की पेशकश करे तो समझ लें कि वह आपको चूना लगाने की कोशिश कर रहा है.

    अदिति और जापना का मामला हाईप्रोफाइल है, जोकि मीडिया में आ गया और संभवत: अपराधियों को पकड़ भी लिया जाएगा. लेकिन आम लोगों के साथ रोजाना ऐसी ठग्गियां होती हैं और आरोपी कभी पकड़ में नहीं आते.

    Tags: Fraud case, Fraud FIR

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