जानिए Lockdown के चलते FPIs ने अप्रैल में किन 10 सेक्टरों से निकाले पैसे, अब कहां कर रहे हैं निवेश

विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से 1.29 अरब डॉलर की निकासी की थी

विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से 1.29 अरब डॉलर की निकासी की थी

जानकार कहते हैं कि अगर कोरोना वायरस से बिगड़ी स्थिति में सुधार नहीं आता है तो भारतीय बाजार से FIIs का पैसा निकलना जारी रहेगा और वे बाजार के बॉटम आउट होनें की इंतजार करेंगे.

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नई दिल्ली. दुनियाभर में कोरोना वायरस (Corona virus) और लॉकडाउन (Lockdown) का इम्पैक्ट उनके शेयर बाजार (Share market) में देखा गया. भारत (India) भी इससे अछूता नहीं है. बाजार की स्थिति और अनिश्चितता के माहौल को देखते हुए अप्रैल महीने में बैंकिंग और फाइनेशिंयल शेयरों से सबसे ज्यादा पैसा निकलता दिखा. उसके बाद विदेशी पैसे की सबसे ज्यादा निकासी oil and gas और मेटल और माइनिंग में देखने को मिली. वहीं जानकारों का कहना है कि ऐसे अधिकतम सेक्टर जिनमें FIIs ने पिछले 12 महीनों में भारी निवेश किया है वो इकोनॉमी से लिंक्ड हैं.


कारोबारी गतिविधियों में आने वाली किसी भी बाधा के चलते हमें इनमें मुनाफा वसूली देखने को मिलने लगती है. जानकार यह भी कहते है कि अगर कोरोना वायरस से बिगड़ी स्थिति में सुधार नहीं आता है तो भारतीय बाजार से FIIs का पैसा निकलना जारी रहेगा और वे बाजार के बॉटम आउट होनें की इंतजार करेंगे. अप्रैल महीनें में निफ्टी सपाट बंद हुआ था. लेकिन इस अवधि में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से 1.29 अरब डॉलर की निकासी की थी, जो मार्च 2020 के बाद हुई अब तक की सबसे बड़ी निकासी थी.


Edelweiss Securities के आकंड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर 2020 से मार्च 2021 के बीच एफआईआई ने भारतीय बाजार में 26.8 अरब डॉलर का निवेश किया. इसमें साल 2021 के पहले तीन महीनों के 7.6 अरब डॉलर भी शामिल हैं. अप्रैल महीने में बैंकिंग और फाइनेशिंयल शेयरों से सबसे ज्यादा पैसा निकलता दिखा. उसके बाद विदेशी पैसे की सबसे ज्यादा निकासी oil and gas और मेटल और माइनिंग में देखने को मिली. 


बैंकिंग और फाइनेशिंयल में सेक्टोरियल वेटेज महीने के निचले स्तर पर
बैंकिंग और फाइनेशिंयल में सेक्टोरियल वेटेज इस समय 32.7 फीसदी के 6 महीने के निचले स्तर पर है जबकि  oil and gas सेक्टोरियल वेटेज 11.3 फीसदी और मेटल और माइनिंग का सेक्टोरिएल वेटेज 2.4 फीसदी पर है. जानकारों का कहना है कि जिन सेक्टरों से विदेशी पैसा निकलता दिखा है इनमें कोरोना के चलते विभिन्न राज्यों में लागू लॉकडाउन का असर दिखने की संभावना है.


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ट्रैफिक एक्टिविटी में मंदी नेगेटिव सेटिमेंट की औऱ संकेत कर रही है



Green Portfolio Services के दिवम शर्मा का कहना है कि COVID 2.0  की वजह से जीडीपी ग्रोथ पर असर पड़ने की संभावना है और लॉकडाउन ने बाजार से जुड़ी आशंकाओं  को और बढ़ा दिया है. एनपीए बढ़ने का डर औऱ ग्लोबल इंडेक्स के मुताबिक ट्रैफिक एक्टिविटी में मंदी नेगेटिव सेटिमेंट की औऱ संकेत कर रही है. उन्होंने आगे कहा कि इस स्थिति को देखते हुए विदेशी संस्थागत निवेशक अपना पैसा डिफेंसिव और वैल्यू स्टॉक में डाल रहे हैं. वित्त वर्ष 2021 में बैंकिंग, ऑयल एंड गैस सेक्टर में जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली। अब इनमें मुनाफावसूली देखने को मिल रही है. 12 महीने के आधार पर देखें तो एफआईआई ने बैंक औऱ फाइनेशियल सेक्टर में 900 करोड़ ड़ॉलर से ज्यादा डाले हैं वहीं इस अवधि में एफएमसीजी में 5394 करोड़,ऑयल एंड गैस में 299 करोड़ और कैपिटल गुड्स में 225 करोड़ डॉलर से ज्यादा डाले हैं.


तमाम राज्यों में लॉकडाउन के चलते आई इकोनॉमी मंदी

SSJ Finance & Securities के Atish Matlawala का कहना है कि अप्रैल महीने में भारत में कोविड-19 के मामले में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है जिससे तमाम राज्यों में लॉकडाउन लगाना पड़ा और जिसके चलते इकोनॉमी में मंदी आई है. उन्होने आगे कहा कि बैंक, ऑय़ल एंड गैस और ऑटो सीधे तौर पर इकोनॉमी से जुड़े सेक्टर है. इन पर कोरोना की दूसरी लहर का भारी असर देखे को मिला है जिसके चलते विदेशी संस्थागत निवेश इस शेयर में बिकवाली करते नजर रहे हैं. 


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लॉकडाउन आगे बढ़ता है तो निवेशकों का रुझान इस सेक्टर की तरफ होगा

S&P Global Ratings ने पिछले हफ्ते अपने एक नोट में कहा था कोरोना की दूसरी लहर भारत की इकोनॉमिक रिकवरी  को पटरी से उतार सकती है औऱ क्रेडिट स्थिति को भी बिगाड़ सकती है. जानकारों का कहना है कि अगर लॉकडाउन आगे बढ़ता है तो निवेशकों का रुझान डिफेंसिव सेक्टर की तरफ बढ़ सकता है. उत्तर प्रदेश और दिल्ली ने 17 मई तक लॉकडाउन बढ़ा भी दिया है. अगर स्थिति में सुधार नहीं आता है और कोरोना के स्थिति में सुधार के कोई साफ संकेत नहीं दिखते हैं तो संस्थागत निवेशक बाजार से अपना पैसा निकालते दिखेंगे और वे बाजार के बॉटम आउट होने और फिर उसके बाद वैल्यू पिक्स में अपने पैसे लगाने की रणनीति अपनाएंगे.

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