बढ़ सकती हैं माल भाड़ा की दरें, असर फल-सब्जियों से लेकर हर सामान पर पड़ेगा, जानिए क्या है वजह

ट्रांसपोर्ट की लागत में 65% हिस्सा डीजल का होता है. इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर भाड़ा दरो पर पड़ता है.

ट्रांसपोर्ट की लागत में 65% हिस्सा डीजल का होता है. इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर भाड़ा दरो पर पड़ता है.

डीजल महंगा होने से माल भाड़े की लागत में इजाफा हो गया है और इस बढ़ी लागत का हवाला देकर ट्रांसपोर्टर भाड़ा दरें बढ़ाने की तैयारी करने लगे हैं. उनके मुताबिक 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करना जरूरी है. ऐसा होने से इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2021, 6:11 PM IST
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नई दिल्ली. पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी से पहले से आम-आदमी परेशान है. कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि अब इसका असर जीवन से जुड़े हर सामान पर पड़ सकता है. डीजल के महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में इजाफा हो गया है और इस बढ़ी लागत का हवाला देकर ट्रांसपोर्टर भाड़ा दरें बढ़ाने की तैयारी करने लगे हैं. उनके मुताबिक 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करना जरूरी है. ऐसा होने से इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा.

बीते दो महीने में सिर्फ दिल्ली में ही डीजल की कीमतों में करीब 10 रुपए तक का इजाफा हो गया है. दिल्ली में शुक्रवार को डीजल प्रति लीटर 81.32 रुपए का है. जबकि भोपाल में यह 89.65 रुपए पर पहुंच गया है. तीन महीने पहले 17 नवंबर को यह 77.95 रुपए था. यानी इसमें करीब 12 रुपए या 15 प्रतिशत का उछाल आया है. ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन प्रदीप सिंघल बताते हैं कि डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ गई है. यही नहीं, यदि  बीते  साल लॉकडाउन के वक्त से डीजल की कीमतें देखी जाए तो इसमें औसत 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. सैनिटाइजेशन, टोल, इंश्योरेंस और मेंटेनेंस कॉस्ट में भी इजाफा हो गया है. कुल मिलाकर ट्रांसपोर्ट की लागत करीब 30 से 35 फीसदी बढ़ गई है. कोरोनामहामारी की वजह से डिमांड कम हुई, इसलिए भाड़े में ज्यादा बढ़ोतरी संभव नहीं है. फिर भी 15 से 20 फीसदी तक फ्रेट दरें बढ़ाना जरूरी है.

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फ्रेट दरों में 2012 के बाद से नहीं हुई बढ़ोतरी
करीब 90 लाख ट्रक ऑनर्स के संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) के प्रवक्ता नवीन कुमार गुप्ता कहना है कि बीते कुछ सालों से डीजल के रेट लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन मांग न होने से फ्रेट की दरें वर्ष 2012 जितनी ही हैं. बढ़ती लागत को देखते हुए ट्रांसपोर्टर अब भाड़ा बढ़ाने पर भी विचार करने लगे हैं. एआईएमटीसी वेस्ट जोन के अध्यक्ष विजय कालरा ने कहा कि हमने तय किया है कि भाड़े में 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी की जाए. इस पर औपचारिक फैसला जल्द हो जाएगा. यदि ट्रांसपोर्ट महंगा हुआ तो इसका असर सब्जी और किराना समेत सभी तरह के उत्पादों पर पड़ेगा.

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फल-सब्जियों पर माल भाड़े में 10 प्रतिशत का इजाफा

दिल्ली स्थित आजादपुर सब्जी मंडी के अध्यक्ष एमआर सिपलानी बताते हैं कि अभी डिमांड ज्यादा नहीं है, इसलिए माल भाड़े में बढ़ोतरी कम हुई है., लेकिन आने वाले समय में फल-सब्जियों को लाने वाले ट्रकों का माल भाड़ा बढ़ सकता है. थोक सब्जी व्यापारी पवन खटीक का कहना है कि फल-सब्जी की कुल कीमत में भाड़े का योगदान 30 प्रतिशत तक रहता है, इसलिए भाड़ा 10 से 20 प्रतिशत भी बढ़ता है तो सब्जियां भी 10 प्रतिशत तक महंगी हो जाएंगी.

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कैसे पड़ रहा है महंगे डीजल का असर

एआईएमटीसी वेस्ट जोन के अध्यक्ष विजय कालरा ने बताया कि ट्रांसपोर्ट की लागत में 65% हिस्सा डीजल का होता है. 20-25% हिस्सा मेंटनेंस, लोन किस्त आदि का होता है. इंदौर से चेन्नई तक अगर एक ट्रक (16 टन वाला) अभी 65 हजार रुपए में बुक होता है तो इसमें करीब 40 हजार रुपए डीजल का लग जाता है. ट्रांसपोर्टर के पास 25 हजार बचते हैं, जिसमें मेंटेेनेंस, ड्राइवर की सैलरी, किस्तें और कमाई आदि का खर्च निकलता है. अब डीजल का खर्च 8,000 बढ़कर 48 हजार रुपए हो जाएगा. अन्य खर्चों के लिए 17 हजार ही बचेंगे. इसकी भरपाई कहीं न कहीं भाड़े के रेट बढ़ाकर ही हो सकती है.
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