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इसलिए कैंसिल हुआ 44 जोड़ी वंदे भारत ट्रेनों का टेंडर, अब कंपनियों को पूरी करनी होगी नई शर्त

वंदे भारत ट्रेन (फाइल फोटो)

वंदे भारत ट्रेन (फाइल फोटो)

Tender for Vande Bharat Trains: रविवार को रेलवे ने बताया कि आखिर क्यों 44 जोड़ी वंदे भारत ट्रेनों का टेंडर कैंसिल किया गया. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने कहा कि इन ट्रेनों के लिए 50 फीसदी से ज्यादा कंपोनेन्ट लोकल होने चाहिए.

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    नई दिल्ली. रेलवे बोर्ड चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने रविवार को 44 जोड़ी सेमी हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनों (Vande Bharat Trains) को कैंसिल करने का कारण बताया. उन्होंने कहा कि कुछ बिडर्स ने टेक्निकल बिड सबमिट करते समय फाइनेंशियल ऑफर्स के बारे में भी जानकारी दी थी. नया टेंडर करीब एक सप्ताह में जारी कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि नये टेंडर में एक शर्त होगी कि 50 फीसदी से ज्यादा कंपोनेन्ट लोकल होने चाहिए. केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत योजना को ध्यान में रखते हुए यह शर्त रखा गया है.

    पारदर्शिता को लेकर लिया गया यह फैसला
    यादव ने कहा, 'ट्रेन सेट टेडर्स के टेक्निकल बिड्स का मूल्यांकन करने वाली कमेटी ने ध्यान दिया कि फाइनेंशियल ऑफर्स के बारे में भी कुछ जानकारी दी गई है. पूरी तरह से पारदर्शिता को बरकरार रखने के लिए टेंडर कमेटी ने इस कैंसिल करने का फैसला लिया है और फ्रेश टेंडर जारी करने की सिफारिश की है.' उन्होंने बताया कि टेंडर स्वीकार करने वाली अथॉरिटी ने इस सिफारिश स्वीकार को करते हुए इस कैंसिल कर दिया है. बता दें कि जनरल मैनेजर इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री इसके लिए अधिकृत अथॉरिटी है.

    जब एक बार टेंडर फ्लोट कर दिया जाएगा तब टेक्निकल बिड खोल दिया जाएगा और इवैलुएट होगा. इसके बाद फाइनेंशियल बिड केवल उन्हीं कैंडिडेट के लिए मांगा जाएगा, जिन्होंने टेक्निकल बिड को क्वॉलिफाई कर लिया है. मूल्यांकन में पारदर्शिता को लेकर यादव ने कहा कि टेक्निकल बिड के मूल्यांकन में टेंडर इवैलुएशन कमेटी के पास फाइनेंशियल बिड्स उपलब्ध नहीं होंगे. उन्होंने कहा, 'उच्च कोटि की पारदर्शिता को मेंटेन करने के लिए इस टेंडर को कैंसिल किया गया'

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    शुक्रवार को कैंसिल हुआ था टेंडर
    बीते शुक्रवार को रेल मंत्रालय ने देर रात ट्वीट कर जानकारी दी थी कि 44 जोड़ी सेमी हाई स्पीड ट्रेनों के मैन्युफैक्चरिंग के लिए मंगाए गए टेंडर को कैंसिल कर दिया गया है. एक सप्ताह के अंदर एक फ्रेश टेंडर फ्लोट किया जाएगा. इसमें कहा गया था कि फ्रेश टेंडर मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत फ्लोट किया जाएगा.

    इन तीन यूनिट्स पर होगी मैन्युफैक्चरिंग
    फ्रेश टेंडर में तीन प्रोक्योरमेंट यूनिट्स पर मैन्युफैक्चरिंग की व्यवस्था होगी. ये तीन प्रोडक्शन यूनिट चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री और रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री होगी. वंदे भारत स्वदेशी इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट्स हैं, जिसे चेन्नई के इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार किया जाता है. इस टेंडर को पहली बार दिसंबर 2019 में फ्लोट किया गया था और इसे जुलाई में खोला गया था. इन ट्रेनों के लिए यह तीसरा ऐसा टेंडर है.

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    क्या चीनी कंपनियां ले सकती हैं टेंडर में भाग?
    इस टेंडर को तब कैंसिल किया गया है, जब 6 कंपनियों ने ​अपनी बिड सबमिट की थी. इसमें एक चीनी कंपनी की ज्वाइंट वेंचर सीआरआरसी पायनियर इलेक्ट्रिक भी शामिल थी. CRRC इलेक्ट्रिक इंडिया प्रा. लि. इकलौती ऐसी कंपनी थी, जिसका संबंध किसी विदेशी कंपनी से था. दरअसल यह कंपनी चीन की सीआरआरसी योन्गजी इलेक्ट्रिक कॉरपोरेशन और गुरुग्राम की पायनियर फिल-मेड प्रा. लि. की ज्वाइंट वेंचर है. यादव से यह पूछे जाने पर कि क्या चीनी ओरिजिन की कंपनियां भी इसमें भाग ले सकती है तो उन्होंने जवाब दिया कि सरकार रिवाइज्ड प्रोक्योरमेंट पॉलिसी को ही फॉलो करेगी.

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