1 अक्टूबर से ई-कॉमर्स कंपनियों पर लगेंगे ये दो टैक्स

1 अक्टूबर से ई-कॉमर्स कंपनियों को भी जीएसटी के तहत सप्लायर्स को किए गए भुगतान पर 1 प्रतिशत TCS लेना होगा. राज्य भी एसजीएसटी कानून के तहत एक प्रतिशत टीसीएस लगा सकते हैं

News18Hindi
Updated: September 14, 2018, 2:58 PM IST
1 अक्टूबर से ई-कॉमर्स कंपनियों पर लगेंगे ये दो टैक्स
1 अक्टूबर से ई-कॉमर्स कंपनियों पर लगेंगे ये दो टैक्स
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Updated: September 14, 2018, 2:58 PM IST
1 अक्टूबर से ई-कॉमर्स कंपनियों को भी जीएसटी के तहत सप्लायर्स को किए गए भुगतान पर 1 प्रतिशत TCS लेना होगा. राज्य भी एसजीएसटी कानून के तहत एक प्रतिशत टीसीएस लगा सकते हैं.केंद्र सरकार ने इसके लिए नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि CGST के तहत अधिसूचित इकाइयों को 1 अक्टूबर से 2.5 लाख रुपये से ज्यादा के गुड्स एंड सर्विसेस की सप्लाई पर 1 फीसदी TDS लेना होगा. इसके अलावा राज्य, SGST के तहत 1 फीसदी TDS लगाएंगे. माना जा रहा है इस फैसले से अर्थव्यवस्था में टैक्स अधिकारियों की पहुंच बढ़ेगी और इससे टैक्स की चोरी में भी कमी आएगी. (ये भी पढ़ें-अगस्त में गिरा जीएसटी कलेक्शन, मिला 93,960 करोड़ रुपये का राजस्व)

अब आगे क्या- ईएंडवाई में टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन का कहना है कि ई-कॉमर्स कंपनियों को TCS के लिये और PSU/सरकारी कंपनियों को TDS के लिए अपनी प्रणाली जल्द तैयार करनी होगी ताकि वे एक अक्टूबर से इन प्रावधानों के हिसाब से काम कर सकें, क्योंकि वक्त कम है. (ये भी पढ़ें-GST के नाम पर दुकानदार ने अगर मांगे ज्यादा दाम, तो इस नंबर पर करें शिकायत)

एएमआरडी एंड एसोसिएट्स पार्टनर रजत मोहन ने कहा, इन दोनों प्रावधानों से अर्थव्यवस्था में टैक्स अधिकारियों की पहुंच बढ़ेगी और इससे टैक्स की चोरी में भी कमी आएगी’

क्या होता है टीडीएस-टीडीएस शुरू करने का मकसद था स्रोत पर ही टैक्स काट लेना. अगर किसी व्यक्ति को कोई आय होती है तो उस आय से टैक्स काटकर अगर व्यक्ति को बाकी रकम दी जाये तो टैक्स के रूप में काटी गई रकम को टीडीएस कहते हैं. सरकार टीडीएस के जरिये टैक्स जुटाती है. टीडीएस विभिन्न तरह के आय़ स्रोतों पर काटा जाता है मसलन सैलरी, किसी निवेश पर मिले ब्याज या कमीशन आदि पर. टीडीएस हर आय पर और हर किसी लेन-देन पर लागू नहीं होता है. आयकर विभाग की ओर से कई तरह के अलग-अलग पेमेंट्स पर अलग-अलग रेट्स सुझाव गए हैं. (ये भी पढ़ें-इन लोगों की सैलरी पर लगेगा 18% GST! जानिए पूरा मामला)

ऐसे समझें- अगर आप भारतीय हैं और आपने डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया तो इस पर जो आय प्राप्त हुई उस पर कोई टीडीएस नहीं चुकाना होगा लेकिन अगर आप एनआरआई (अप्रवासी भारतीय) हैं तो इस फंड से हुई आय पर आपको टीडीएस देना होगा.

टीसीएस क्या होता है-टीडीएस यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स. टीडीएस में पेमेंट करने वाला टैक्स काटकर पेमेंट देता है. और टीसीएस यानी टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स. जिसमें विक्रेता खरीदार से टैक्स वसूलता है. सरकार हर तरह के ट्रांजेक्शन पर नजर रखना चाहती है. बड़े खर्च और कम टैक्स भुगतान के मामले पकड़े जाएगें. अगर 10 लाख रुपये से ज्यादा की मोटर कार की आप खरीदारी करते है तो उसपर 1 फीसदी टीसीएस कांटा जाएगा. साथ ही, चेक से भुगतान करने पर भी टीसीएस लगाया जायेगा. ज्यादा खरीदारी करने पर टीसीएस तभी जब नकद भुगतान 2 लाख से ज्यादा होगा. इसके जरिये 2 लाख नगद खरीदारी पर 1 फीसदी टीसीएस कांटा जाएंगा. टीडीएस की तरह टीसीएस का भी क्रेडिट मिलेगा. फॉर्म 26 एएस में टीसीएस का रिकॉर्ड देख सकते है.
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