बहुत जल्द एक्सचेंज पर हो सकती है पेट्रोल-डीज़ल की ट्रेडिंग, जानिए आम लोगों पर क्या असर होगा

बहुत जल्द एक्सचेंज पर हो सकती है पेट्रोल-डीज़ल की ट्रेडिंग, जानिए आम लोगों पर क्या असर होगा
पेट्रोल-डीज़ल की फ्यूचर ट्रेडिंग शुरू हो सकती है.

बाजार नियामक सेबी पेट्रोल-डीज़ल की फ्यूचर ट्रेडिंग (Petrol-Diesel Future Trading) को मंजूरी दे सकता है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन उत्पादों की फ्यूचर ट्रेडिंग को लेकर एक प्लान को मंजूरी दे दी है. वर्तमान में फ्यूचर ट्रेडिंग केवल क्रुड ऑयल के लिए की जाती है.

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नई दिल्ली. बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) बहुत जल्द ही देश में
पेट्रोल-डीज़ल की फ्यूचर ट्रेडिंग (Future Trading) को मंजूरी दे सकता है. SEBI की इस अनुमति के बाद कंज्यूमर्स को बाजार में अचानक आने वाले तेज उतार-चढ़ाव से निपटने में आसानी हो सकेगी. सूत्रों ने बताया है कि पेट्रोलियम मंत्रालय (Petroleum Ministry) ने पेट्रोलियम उत्पादों की फ्यूचर ट्रेडिंग को लेकर एक प्लान को मंजूरी दे दी है. ऐसे में अगर सेबी अंतिम मंजूरी दे देता है तो डेरिवेटिव मार्केट (Derivative Market) और कमोडिटी एक्सचेंज पर पेट्रोल और डीज़ल का वायदा कारोबार हो सकेगा.

फ्यूचर ट्रेडिंग एक तरह का फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट होता है, जिसमें खरीदार व विक्रेता भविष्य की किसी एक तारीख पर पहले से तय किए गए भाव पर ट्रेडिंग करते हैं. पेट्रोल-डीज़ल के मामले में, डेरिवेटिव प्रोडक्ट को भविष्य के किसी एक तय तारीख पर डिलीवरी के लिए खरीदा जा सकेगा.

कैसे मिलेगा फायदा?
मौजूदा समय में, जब ईंधन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, फ्यूचर प्रोडक्ट की मदद से खरीदार या विक्रेता को नुकसान नहीं होगा क्योंकि इन फाइनेंशियल प्रोडक्ट से जोखिम कम होगा. साथ ही, कमोडिटी की यूनिफॉर्म प्राइसिंग भी सुनिश्चित हो सकेगी.



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ऑयल सेक्टर के एक ​एनलिस्ट का कहना है कि यह एक सही दिशा में उठाया गया कदम साबित हो सकता है, क्योंकि इंडस्ट्रियल और बल्क कंज्यूमर्स के लिए जोखिम कम होगा. लेकिन बाजार की मौजूदा परिस्थिति में, पिक अप के नदारद होने की वजह से तेल की कीमतों में या तो कम हैं या फिर गिर रही हैं. ऐसे में हेजिंग पार्टिसिपेंट्स की रुचि के विपरित काम करेगा. इससे उनके हेजिंग का कॉस्ट बढ़ जाएगा.

क्या है वर्तमान में व्यवस्था?
वर्तमान में फ्यूचर ट्रेडिंग केवल क्रुड ऑयल के लिए की जाती है, जिसमें रिफाइनर्स के पास मौका होता है कि वो तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से खुद को होने वाले नुकसान को कम कर सकें. ऐसे में, अब पेट्रोल-डीज़ल में भी फ्यूचर ट्रेडिंग शुरू होने पर उनके पास अपनी रिफाइनिंग मार्जिन को हेज करने का एक और तरीका मिल सकेगा.

सूत्रों ने यह भी कहा कि पेट्रोलिमय उत्पादों के लिए बाजार की मौजूदा स्थिति उचित नहीं है. ऐसे में इन नये प्रोडक्ट्स को देर से भी लाया जा सकता है.

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आम लोगों पर इससे क्या असर पड़ेगा?
खुदरा ग्राहकों के नजरिए से देखें तो पेट्रोल-डीज़ल की फ्यूचर ट्रेडिंग से उन्हें कोई फायदा नहीं मिलेगा. खुदरा ग्राहक बेहद कम मात्रा में ईंधन खरीदते हैं. संभव है सेबी पेट्रोल-डीज़ल के डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स की फ्लोर 100 लीटर तय कर सकती है. खुदरा ग्राहकों के लिए फ्यूचर मार्केट में हिस्सा करने के लिए यह अमाउंट बहुत ज्यादा होगा. पेट्रोल-डीज़ल का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट से रिफानर्स, ट्रांसपोर्ट कंपनियों, पेट्रोल पंप मालिकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. इसके अलावा, रेलवे, एविएशन, फ्लीट मालिकों और इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स के लिए भी फायदेमंद होगा. दरअसल, अपनी जरूरत के लिए बड़े मात्रा में ईंधन की जरूरत होती है.
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