कोरोना काल में टेक्सटाइल कर्मचारियों के वेतन में हुई भारी कटौती, अरबों डॉलर का हुआ नुकसान

कोरोना काल में टेक्सटाइल कर्मचारियों के वेतन में हुई भारी कटौती, अरबों डॉलर का हुआ नुकसान
कपड़ा उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन

कपड़ा उद्योगों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों की आजीविका खतरे में आ गई. कोरोना काल में कर्मचारियों को वेतन के रूप में 6 अरब डॉलर तक का संभावित नुकसान उठाना पड़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 12, 2020, 12:13 PM IST
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दुनिया में फैले कोरोना संक्रमण ने कपड़ा कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित किया है. लॉकडाउन की वजह से कई रिटेल स्टोर बंद हो गए, कंपनियों ने अपने ऑर्डर रद्द कर दिए जिस वजह से कर्मचारियों को वेतन तक नहीं मिला. ग्लोबल ब्रांड्स के लिए कपड़ा उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों को कोरोना संकट के दौरान या तो कम वेतन मिला या फिर मिला ही नहीं. शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना संकट के दौरान वेतन के रूप में कर्मचारियों को छह अरब डॉलर तक का संभावित नुकसान उठाना पड़ा है. वहीं अगर देश की बात की जाए तो विभिन्न क्षेत्रों में किए गए एक सर्वे के अनुसार पिछले कुछ महीनों में छोटे एवं मझोले कपड़ा कारोबारियों को करीब 15.5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.

अंग्रेजी समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट अनुसार, इस क्षेत्र में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों की आजीविका खतरे में आ गई. दबाव समूह 'क्लीन क्लोथ कैंपेन' का कहना है कि दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में कपड़ा उद्योग कर्मचारी जो कि पहले से ही कम वेतन पर गुजारा कर रहे थे, उन्हें मार्च से लेकर मई तक नियमित वेतन का औसतन 60 फीसदी से भी कम मिला.

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कोरोना ने किया श्रमिकों का बुरा हाल-
समूह ने अपनी रिपोर्ट "अंडर पेड इन पैनडेमेकि" में कहा है कि भारत के कुछ क्षेत्रों में कपड़ा कर्मचारियों को उनके वेतन से आधा पैसा मिला है. पाकिस्तान में श्रमिक शिक्षा फाउंडेशन के निदेशक खालिद महमूद ने एक बयान में कहा, "कोरोना संकट के कारण वेतन में कटौती का मतलब है कि श्रमिक अपने परिवार को ठीक से पालने में सक्षम नहीं हैं. वे स्कूल की फीस तक देने में असमर्थ हैं, यहां तक कि चिकित्सा पर होने वाले खर्च का भुगतान तक नहीं कर पा रहे.

सात देशों पर किया रिसर्च, करोड़ों डॉलर का हुआ नुकसान-
क्लीन क्लोथ कैंपेन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि डाटा के अभाव में उनका रिसर्च केवल सात देशों -बांग्लादेश, कंबोडिया, भारत, इंडोनेशिया, म्यांमार, पाकिस्तान और श्रीलंका तक सीमित रहा लेकिन अन्य कम वेतन वाले क्षेत्रों में भी स्थिति शायद बेहतर नहीं है. इन आंकड़ों के अनुसार शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि दुनिया भर में परिधान श्रमिकों को महामारी के दौरान पहले तीन महीनों में करीब 3.19 बिलियन डॉलर से 5.79 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था. उनके अनुमान के मुताबिक बांग्लादेश में 50 करोड़ डॉलर और इंडोनेशिया में 40 करोड़ डॉलर वेतन के रूप में रोक लिया गया.

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बांग्लादेश में कपड़ा कर्मचारी 25 वर्षीय शरीफा बेगम ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया कि उन्हें मई के महीने में मैसेज कर नौकरी से निकाल दिया गया, जब उनके साथी कर्मचारियों ने बकाया वेतन को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. बेगम का पति इतना बीमार है कि वह काम नहीं कर पाता है. वह कहती हैं उसके पूर्व मालिक पर 60,000 टका बकाया है. यह रकम ज्यादातर ओवर टाइम के रूप में बकाया है.
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