अप्रैल-जून तिमाही GDP के आंकड़े आज, 40 साल में पहली बार अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने की आशंका

अप्रैल-जून तिमाही GDP के आंकड़े आज, 40 साल में पहली बार अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने की आशंका
एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून तिमाही) में मंदी में फिसल सकती है.

India Q1 GDP-भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) 40 साल में पहली बार मंदी में जा सकती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन के चलते देश की जीडीपी ग्रोथ नकारात्मक हो सकती है. इसके 10 फीसदी से ज्यादा गिरने की आशंका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 31, 2020, 8:52 AM IST
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नई दिल्ली. देश की जीडीपी ग्रोथ (India GDP Data Today) के आंकड़े आज जारी होंगे. कोरोनाकाल (Coronavirus Pandemic) में अर्थव्यवस्था की तस्वीर कैसी रही, अप्रैल से जून के दौरान जीडीपी के आंकड़े से ये तस्वीर साफ होगी. देश के सेंट्रल बैंक आरबीआई से लेकर दुनिया की कई रेटिंग एजेंसियां जीडीपी में भारी गिरावट की आशंका जता रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून तिमाही) में मंदी में फिसल सकती है. अगर ऐसा होता है तो ये 40 साल में पहली बार होगा.

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय जारी  करेगा GDP आंकड़े- राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की तरफ से आज चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी किए जाएंगे. कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ गई थीं, जिसकी वजह से भारत समेत दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है.

नहीं संभल पा रही है अर्थव्यवस्था- न्यूज  एजेंसी रॉयटर्स के एक पोल के मुताबिक़, भारत की अब तक दर्ज सबसे गहरी आर्थिक मंदी इस पूरे साल बरक़रार रहने वाली है. इस पोल के मुताबिक़ कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की वजह से अब भी खपत में बढ़ोतरी नहीं दिख रही है और आर्थिक गतिविधियों पर लगाम लगी हुई है.



इस पोल के मुताबिक़ चालू तिमाही में अर्थव्यवस्था के 8.1 फीसदी और अगली तिमाही में 1.0 फीसदी गिरने का अनुमान है. यह स्थिति 29 जुलाई को किए गए पिछले पोल से भी ख़राब है. उसमें चालू तिमाही में अर्थव्यवस्था में 6.0 फीसदी और अगली तिमाही में 0.3 फीसदी की कमी आने का अनुमान था.
भारत सरकार ने लॉकडाउन से प्रभावित अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मई में 20 लाख करोड़ के आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा की थी. इस पैकेज के तहत 5.94 लाख करोड़ रुपये की रकम मुख्य तौर पर छोटे व्यवसायों को क़र्ज़ देने और ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और बिजली वितरण कंपनियों की मदद के नाम पर आवंटित करने की घोषणा की गई थी.

इसके अलावा 3.10 लाख करोड़ रुपये प्रवासी मज़दूरों को दो महीने तक मुफ़्त में अनाज देने और किसानों को क़र्ज़ देने में इस्तेमाल करने के लिए देने की घोषणा की गई. 1.5 लाख करोड़ रुपये खेती के बुनियादी ढाँचे को ठीक करने और कृषि से जुड़े संबंधित क्षेत्रों पर ख़र्च करने के लिए आवंटित करने की घोषणा की गई.

इस पैकेज के ऐलान को भी अब तीन महीने बीत चुके हैं. बाज़ार भी अधिकांश जगहों पर खुल चुके हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक भी मार्च से ब्याज़ दरों में 115 बेसिस पॉइंट्स की कमी कर चुका है. लॉकडाउन के दौरान लोगों को बैंक से लिए कर्ज़ पर राहत देने की भी बात कही गई.

रिजर्व बैंक ने भी दिया है गिरावट का अनुमान-भारतीय रिज़र्व बैंक का कहना है कि चालू वित्त वर्ष या कारोबारी साल में सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी में नेगेटिव ग्रोथ रह सकती है. मई में रिजर्व बैंक ने कहा था कि 2020-21 में देश की वृद्धि दर नकारात्मक दायरे में रहेगी.



फिक्की सर्वे में भी गिरावट की आशंका- उद्योग मंडल फिक्की ने जुलाई में कहा था कि चालू वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर नकारात्मक रहेगी. फिक्की के आर्थिक परिदृश्य सर्वे में अनुमान लगाया गया था कि 2020-21 में देश की अर्थव्यवस्था 4.5 प्रतिशत नीचे जाएगी.
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