मोदी सरकार की नई योजना, बिजली बनाने में इस्तेमाल होगा ये फ्यूल, होगी सेविंग

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Updated: December 20, 2018, 7:13 PM IST

अब आपके घरों, अपार्टमेंट और मोबाइल टावर में चलने वाले जेनरेटर अब डीजल के बजाय मेथेनॉल से चल सकेंगे.

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अब आपके घरों, अपार्टमेंट और मोबाइल टावर में चलने वाले जेनरेटर अब डीजल के बजाय मेथेनॉल से चल सकेंगे. नीति आयोग ने एक प्राइवेट कंपनी के साथ मिलकर ऐसा फ्यूल सेल विकसित किया है जो डीजल जेनरेटर के मुकाबले न सिर्फ सस्ता होगा बल्कि प्रदूषण भी कम करेगा. नीति आयोग ने एक प्राइवेट कंपनी के साथ मिलकर इसका ट्रायल रन किया है. मेथेनॉल जेनरेटर से प्रति यूनिट बिजली का खर्च 10-12 रुपये आएगा. वहीं, डीजल जेनरेटर का प्रति यूनिट बिजली का खर्च 18-19 रुपये में पड़ता है. इससे डीजल से चलने वाले जेनरेटर के मुकाबले 30 फीसदी प्रदूषण कम होगा. नीति आयोग के साथ मिलकर इंजीनियरिंग कंपनी थर्मेक्स ने ये तकनीक तैयार की है.

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सबसे पहले टेलिकॉम टावर में मेथेनॉल जेनरेटर को लगाने की योजना है. इसके लिए नीति आयोग ने एक निजी टेलीकॉम कंपनी से करार भी किया है. शुरू में करीब 10 हजार टेलिकॉम टॉवर में इसका इस्तेमाल होगा. इन टॉवरों में 2-3 महीने में मेथेनॉल जेनरेटर लगाने का लक्ष्य है. घरों और अपार्टमेंट में पावर बैकअप के लिए भी इनका इस्तेमाल होगा.

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इस मेथेनॉल जेनरेटर में मेथेनॉल को 260 डिग्री पर गर्म किया जाता है. गर्म करने से मेथेनॉल कार्बन डाय-ऑक्साइड और हायड्रोजन में टूट जाता है. फिर हाइड्रोजन को इकठ्ठा करके उसे फ्यूल सेल डालकर बिजली पैदा की जाती है.

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First published: December 20, 2018, 6:55 PM IST
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