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सालाना लाखों रुपये कमाने के लिए स्टार्ट करें ये बिजनेस, कभी कम नहीं होगी डिमांड, ऐसे करें इसे शुरू?

आलू की खेती (Potato Farming) से करें मोटी कमाई

आलू की खेती (Potato Farming) से करें मोटी कमाई

आज के समय में लोग नौकरी से ज्यादा बिजनेस (Business Idea) में रुचि दिखा रहे हैं. इसकी खास वजह इससे होनी वाली कमाई (Earn Money) है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. अगर आप भी कोई बिजनेस शुरू करने का प्लान बना रहे हैं तो आज हम एक बिजनेस (Business Idea) के बारे में बता हैं जिसकी डिमांड हर समय रहती है और नुकसान भी ना के बराबर होता है. हम बात कर रहे हैं आलू की खेती (Potato Farming) की…जी हां आलू तो आप जानते ही हैं जिसे सब्जियों का राजा कहा जाता है. इसकी डिमांड 12 महीने बनी रहती है जिसके कारण नुकसान होने का तो चांस ही नहीं. आलू की खेती करके कई किसान लाखों रुपए कमा रहे हैं. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कैसे कम लागत में मुनाफेवाली (Profitable Farming) आलू की खेती कर सकते हैं.

    बिहार के मधुबनी जिले में रहने वाले किसान अशोक कुमार ने नए जमाने में नए तरीके से खेती के महत्व को समझा और आज इसके जरिए सालाना 50 लाख रुपये तक कमा रहे हैं. उन्होंने सालाना कुल संसाधनों से लगभग 50 लाख रुपये की आमदनी होती है और लगभग 25 लाख रुपये खर्च हो जाता है. इस प्रकार इन्हे सालाना 25 लाख रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है.

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    कैसी मिट्टी में पैदा होते हैं आलू?
    यूं तो आलू को किसी मिट्टी (क्षारिय के अलावा) में बो सकते हैं, लेकिन इसके सबसे बेहतरीन बलुई दोमट मिट्टी है. इसके अलावा ऐसी भूमि का चयन करना होगा, जहां पर पानी निकासी की सुविधा हो. साथ ही अच्छी पैदावार के लिए रोगमुक्त बीजों की भी आवश्यकता होती है. वहीं, समय समय पर कीटनाशक और खाद उर्वरक का प्रयोग भी जरूरी है. इससे पौधे पर कीड़े नहीं लगते हैं और आलू के पौधे भी काफी उन्नत होते हैं.

    आलू की खेती (Potato Farming)

    बोने का सही तरीका
    आलू की फसल बोते समय उनके बीच की दूरी का हमेशा ध्यान रखें, इससे पौधों को रोशनी, पानी और पोषक तत्व आसानी से मिलते हैं. जानकारों के मुताबिक, आलू की क्यारियों के बीच की दूरी कम से कम 50 सेंटीमीटर तो दो पौधों के बीच की दूरी 20 25 सेंटीमीटर होना चाहिए. अगर आप इससे कम दूरी रखते हैं तो आलू के साइज छोटे होंगे और ज्यादा दूरी रखते हैं तो साइज बड़े, लेकिन उपज कम हो जाएगी. ऐसे में दूरी का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. बता दें कि एक बीघा जमीन में 5 6 क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है.

    कब करें खाद्य उर्वरक का प्रयोग और सिंचाई
    आलू की खेती में खाद्य उर्वरक का प्रयोग बेहद अनिवार्य है, इस वजह से फसल में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश पर्याप्त मात्रा में डालें. इससे पौधे की पत्तियां तो बढ़ती ही हैं, साथ ही साथ उनके कंदमूल का आकार भी तेजी से बढ़ता है. वहीं, सिंचाई की बात करें तो पौधे जब उग जाएं तब पहली बार पटवन करना चाहिए, वहीं इसके 15 दिन बाद दोबारा पौधों में पानी देना चाहिए. आलू की खेती में पानी देने की यह प्रक्रिया हर 10 से 12 दिन पर दोहराना चाहिए. पूर्वी भारत में अक्टूबर से जनवरी के बीच बोई जाने वाली आलू की फसल में 6 से 7 बार सिंचाई की जाती है.

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    कहां बेच सकते हैं अपनी फसल
    आप अपनी फसल को मंडी में भी बेच सकते हैं लेकिन यहां दिक्कत है कि आढ़तियों और बीच के एजेंट्स के चक्कर में आपको सही कीमत नहीं मिल पाती है. लिहाजा आप ऐसे मैन्युफैक्चर्स को संपर्क कर सकते हैं तो आलू और इसे जुड़े प्रोडक्ट्स बनाती है. सरकारी विभाग और बेवसाइट के अलावा आपको इंटरनेट पर कुछ निजी कंपनियों की भी जानकारी मिल जाएगी. लेकिन अगर आप एक ही जगह देश के बड़े मैन्युफैक्चर्स ढूंढना चाहते है तो potatopro.com पर जा सकते हैं.

    इन कंपनियों के साथ कर सकते हैं संपर्क
    आईटीसी, बीकानेर, बिकानो समेत कुछ बड़ी कंपनियां आलू चिप्स और इनसे जुड़े कारोबार करती है. अगर किसान सीधे इन कंपनियों से संपर्क करें तो दाम अच्छे मिलते है.

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