एंटी चाइना सेंटीमेंट से एशियन ग्रेनिटो को बड़ा फायदा, एक्सपोर्ट रेवेन्यू में ग्रोथ

एंटी चाइना सेंटीमेंट से एशियन ग्रेनिटो को बड़ा फायदा, एक्सपोर्ट रेवेन्यू में ग्रोथ
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

पूरी दुनिया चीन का विरोध कर रही है, ऐसे में भारत के पास टाइल्स और सेनेटरी वेयर जैसे प्रोडक्ट में ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का मौका है.

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नई दिल्ली. चीन विरोधी भावना के चलते अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टाइल्स कंपनियों के लिए नए मौके बने हैं. इस क्षेत्र में भारत की एक लीडिंग टाइल्स कंपनी एशियन ग्रेनिटो भी अंतर्राष्ट्रीय मांग से बढ़ने से खुश है. बेहतर एक्सपोर्ट के दम पर पिछले वित्त वर्ष में कंपनी के रेवेन्यू में शानदार बढ़त हुई है. ऐसे में कंपनी ने बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए खासतौर पर गुजरात में एक केंद्र स्थापित किया है.

एंटी डंपिंग ड्यूटी घटने का फायदा
एशियन ग्रेनिटो इंडिया लिमिटेड के इंटरनेशनल मार्केटिंग डायरेक्टर प्रफुल्ल गट्टानी कहते हैं कि, "निश्चिच रूप से चीन विरोधी भावनाओं का फायदा हमें मिला है और इससे हमारे निर्यात में और उछाल आएगा. खासतौर पर अमेरिका ने जबसे इंडियन क्वार्टज पर CVV और एंटी डंपिंग ड्यूटी को 87.5% से घटाकर 3.19% किया है. इससे AGIL सहित तमाम कंपनियों के लिए अमेरिका जैसे देशों में मांग बढ़ी है.” दूसरी तरफ अमेरिका ने चीनी कंपनियों पर CVD (काउंटरवेलिंग ड्यूटी) और एंटी डंपिंग शुल्क बढ़ाकर 336.69%.  कर दिया है. इसके साथ ही चीन से आने वाले क्वार्ट्ज स्लैब पर 190.99%  तक  काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगती है और ये दोनों ही शुल्क मिलाकर, चीन से आयात होने वाले सामानों पर ड्यूटी बढ़कर करीब 500 प्रतिशत तक पहुंच जाती है.

उन्होंने कहा, "हम भारत में क्वार्ट्ज के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक हैं और चीन की तुलना में क्वार्ट्ज पर कम शुल्क होने का फायदा हमें मिलेगा. इससे AGIL को अमेरिकी बाजार को टार्गेट करने में मदद मिलेगी और अगर सब कुछ प्लानिंग के मुताबिक रहा तो AGIL भारत की सबसे बड़ी क्वर्ट्ज एक्पोर्टर कंपनी बन जाएगी. कुल मिलाकर प्रफुल्ल इन सभी सेंटीमेंट्स को भारतीय कंपनियों के लिए अनुकूल मानते हैं. इसके अलावा अमेरिका ने चीन से आने वाली सेरामिक टाइल्स पर करीब 714.83% की एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई है, जबकि भारत के लिए ये शुल्क सिर्फ 8.5 प्रतिशत है. इसके कारण आने वाले समय में टाइल कंपनियों, खासकर AGIL को अपना अंतर्राष्ट्रीय कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी.
भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर जोर


AGIL के इंटरनेशनल मार्केटिंग डायरेक्टर प्रफुल्ल गट्टानी का कहना है कि जबकि पूरी दुनिया चीन का विरोध कर रही है, ऐसे में भारत के पास टाइल्स और सेनेटरी वेयर जैसे प्रोडक्ट में ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का मौका है. इस रणनीति के तहत AGIL, सियाम सीमेट ग्रुप जैसी कंपनियों के साथ कारोबार कर रही है जिनकी उपस्थिति इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, फिलीपींस, श्रीलंका और अन्य सहित 21 देशों में है.
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